रोड एक्सीडेंट ने छीनी वन्य सौंदर्य की धड़कन
राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर अज्ञात वाहन की टक्कर से मादा तेंदुए की मौत, वन्यजीव सुरक्षा पर फिर सवाल
Seoni 19 November 2025
सिवनी यशो :- पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी के बफर क्षेत्र में एक और चिंताजनक घटना ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को झकझोर दिया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर अज्ञात वाहन की टक्कर से एक स्वस्थ मादा तेंदुए की दर्दनाक मौत हो गई, जिसने न केवल वन विभाग बल्कि पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय आबादी को भी विषाद में डाल दिया है। सड़क हादसों में वन्य जीवों की लगातार हो रही मौत अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।

वन्यजीवों के लिए खतरा बनता राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर-44
सीमा क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहन बने खतरा — स्पीड कंट्रोल, वाइल्डलाइफ़ क्रॉसिंग और अंडरपास की मांग तेज
यह हादसा वन परिक्षेत्र खवासा (बफर) के कोठार बीट, कक्ष क्रमांक आर-330, मध्यप्रदेश–महाराष्ट्र सीमा के पास घटित हुआ, जहां से प्रतिदिन भारी वाहन तेज रफ्तार से गुजरते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र में तेंदुआ, हिरण और जंगली सूअर बार-बार सड़क पार करते देखे जाते हैं, लेकिन वाहनों की रफ्तार और जागरूकता की कमी वन्यजीवों के लिए मौत का कारण बन रही है।
मौके पर तत्काल वन विभाग की कार्रवाई
विशेष टीम, मेडिकल जांच, SOP के तहत अंतिम संस्कार
सड़क हादसे में वन्यजीव की मौत की सूचना मिलते ही पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा एनटीसीए नई दिल्ली एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक भोपाल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप त्वरित कार्रवाई की गई। मादा तेंदुए के शव को सुरक्षा के साथ खवासा स्थित वन्यप्राणी चिकित्सालय लाया गया।
19 नवंबर को शव परीक्षण वेटरिनरी एक्सपर्ट डॉ. अमित रैयकवार एवं डॉ. मृणालिनी रामटेके द्वारा किया गया। रिपोर्ट में सभी अंग सुरक्षित पाए गए और किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि नहीं मिली।
निर्धारित प्रक्रिया अनुसार शवदाह/भस्मीकरण की कार्यवाही क्षेत्र संचालक एवं मुख्य वन संरक्षक देवाप्रसाद जे.,
तहसीलदार दामोदर प्रसाद दुबे,
उपसरपंच खवासा कासिम खान,
एनटीसीए प्रतिनिधि राहुल क्षीरसागर एवं डब्ल्यूसीटी टीम की उपस्थिति में की गई।
वन्यजीव संरक्षण केवल नारा नहीं, जिम्मेदारी है
वन्यजीव सिर्फ जंगल की सुंदरता नहीं, हमारे पर्यावरण तंत्र के संतुलन की रीढ़ हैं।
सड़क हादसों में वन्यजीवों की लगातार मौत जैव विविधता पर गहरा खतरा है।
यदि अब ठोस कदम नहीं उठाए गए,
तो आने वाली पीढ़ियाँ सिर्फ कहानियों और तस्वीरों में तेंदुआ, हिरण और बाघ देख पाएंगी।





