ज़हरीले सांप पर भारी पड़ा सचिन! डसने के बाद तड़प तड़प कर मरा

सांप ने काटा… लेकिन खुद ही मर गया!
बालाघाट के सचिन नगपुरे के ‘जहरीले’ खून से मर गया सांप, विशेषज्ञ भी हैरा
Balaghat 20 June 2025
“सांप ने मुझे काटा… लेकिन मरा वो खुद”—यह कोई फिल्मी संवाद नहीं, बल्कि बालाघाट के 25 वर्षीय युवक सचिन नगपुरे की सच्ची घटना है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है।
गुरुवार सुबह करीब 7 बजे जब सचिन अपने खेत में टहल रहे थे, तभी उनका पैर गलती से एक सांप पर पड़ गया। बचाव में सांप ने सचिन को काट लिया। लेकिन जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया—सांप ने जैसे ही डंस मारा, वह कुछ ही मिनटों में तड़पने लगा और 5-6 मिनट में उसकी मौत हो गई।
खून ही बन गया ‘जहर’, दावा खुद सचिन का
सचिन पेशे से कार मैकेनिक हैं। वह पिछले 7-8 वर्षों से सुबह दातून करने के लिए चिड़चिड़िया, पिसुंडी, पुलसा, जामुन, आम, तुअर, आजन, करंजी और नीम जैसी वनस्पतियों की टहनियों का उपयोग कर रहे हैं। उनका मानना है कि इन सभी पेड़-पौधों की औषधीय शक्ति ने उनके खून को इस कदर ‘शुद्ध’ या ‘संजीवनी’ बना दिया है कि यह विषैले सांप के लिए ही घातक बन गया।
क्या कहती है विशेषज्ञों की राय?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्यत: ऐसा नहीं होता कि किसी इंसान को काटने के बाद सांप मर जाए। यह मामला अत्यंत दुर्लभ है और इसके पीछे कई संभावनाएं हो सकती हैं, जैसे—
- सांप पहले से बीमार या घायल रहा हो,
- उसने गलती से अत्यधिक जोर से डंस लिया हो जिससे उसकी खुद की नसें क्षतिग्रस्त हो गई हों,
- या फिर सचिन के खून में वाकई किसी प्रकार के औषधीय यौगिक हों।
फॉरेंसिक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सांप की मौत का असली कारण क्या रहा।
मैं हर रोज़ इन्हीं पेड़ों की दातून करता हूँ। लगता है अब ये मेरी ताकत बन गई है।❞
— सचिन नगपुरे
विशेष आकर्षण
- स्थान: ग्राम बेलगांव, ज़िला बालाघाट
- घटना का समय: सुबह 7 बजे
- सांप की प्रजाति: स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह एक विषैला सांप था (शायद करैत या कोबरा)



