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पुराने टैंकर की रिपेयरिंग में लाखों का खेल? सागर मोहली पंचायत में “मरम्मत” के नाम पर घोटाले के आरोप

“जितने में नया टैंकर आता, उतने में पुराने की रिपेयरिंग!” — सरपंच-सचिव और तकनीकी अमले पर उठे सवाल

सागर मोहली पंचायत टैंकर घोटाला- रिपेयरिंग के नाम पर लाखों के खेल के आरोप, तकनीकी अमले पर भी सवाल

Seoni 10 May 2026
सिवनी / छपारा यशो:- Janpad Panchayat Chhapara अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सागर मोहली में पुराने पानी के टैंकर की रिपेयरिंग को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि पंचायत द्वारा पुराने टैंकर की मरम्मत पर इतनी राशि खर्च कर दी गई, जितने में नया टैंकर खरीदा जा सकता था।

मामले को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। आरोप है कि रिपेयरिंग के नाम पर एक लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च कर पंचायत के जिम्मेदारों ने नियमों को दरकिनार करते हुए बंदरबांट की है।

सागर मोहली पंचायत टैंकर घोटाला - ग्राम पंचायत में टैंकर रिपेयरिंग को लेकर विवाद
सागर मोहली पंचायत टैंकर घोटाला – टैंकर मरम्मत कार्य में अनियमितता के आरोपों के बाद जांच की मांग तेज

“रिपेयरिंग या फर्जीवाड़ा?”

जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सागर मोहली के सरपंच और सचिव द्वारा सिवनी स्थित एक वेल्डिंग वर्कशॉप के नाम से बिल लगाकर टैंकर सुधार कार्य दर्शाया गया। आरोप है कि मरम्मत कार्य की वास्तविक लागत और भुगतान की गई राशि में भारी अंतर है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पुराने टैंकर की रिपेयरिंग दिखाई गई, उसकी स्थिति ऐसी थी कि उस पर इतना बड़ा खर्च करना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा। इसी कारण अब पूरे मामले में फर्जी बिल और वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।

तकनीकी अमले की भूमिका पर भी सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि टैंकर रिपेयरिंग कार्य का मूल्यांकन किस उपयंत्री या तकनीकी अधिकारी द्वारा किया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि बिना तकनीकी स्वीकृति और उचित अनुमति के इतनी बड़ी राशि खर्च नहीं की जा सकती। ऐसे में पंचायत के साथ-साथ तकनीकी अमले की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।

“क्या अधिकारियों से ली गई थी अनुमति?”

ग्राम पंचायत स्तर पर किसी भी बड़े मरम्मत कार्य के लिए प्रक्रिया और अनुमति आवश्यक होती है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या पंचायत प्रतिनिधियों ने संबंधित अधिकारियों से पूर्व अनुमति ली थी या नहीं।

यदि अनुमति नहीं ली गई, तो भुगतान किस आधार पर किया गया? और यदि अनुमति ली गई थी, तो क्या अधिकारियों ने कार्य का भौतिक सत्यापन किया?

छपारा जनपद पंचायत में बढ़ रही चर्चाएं

इस मामले के सामने आने के बाद छपारा जनपद पंचायत के कामकाज और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।

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