सिवनी भागवत कथा विश्राम दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न
श्री द्वारकाधीश मंदिर में श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा का विश्राम दिवस
सिवनी भागवत कथा विश्राम, भगवान भीतर का आवरण देखते हैं, मृत्यु रूपी तक्षक सबको काटेगा : ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप
श्री द्वारकाधीश मन्दिर के सत्संग भवन में चल बह रही श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा के
विश्राम दिवस की कथा में ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी
स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के परम कृपापात्र शिष्य ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प
स्वरूप जी महाराज ने अपार जनसमुदाय को प्रवचन दिया।

पूज्य महाराज ने कहा कि संसार के लोग बाह्य आवरण को देखते हैं जबकि भगवान
भीतर का आवरण देखते हैं। सुदामा जी फटी धोती पहनकर श्रीकृष्ण से मिलने गए,
वे ज्ञानी महात्मा थे, फिर भी उन्हें बाहर से देखकर सम्मान नहीं मिला।
लेकिन परमात्मा ने उनका सम्मान किया क्योंकि उनका मन अत्यंत पवित्र था।
उन्होंने कहा कि तक्षक वास्तव में मृत्यु है। यह मृत्यु रूपी तक्षक
प्रत्येक जीव को काटता है और इसी भय से जो त्रास उत्पन्न होता है,
उसकी निवृत्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा है।
भागवत कथा मनुष्य के भय को दूर करती है और भोग व मोक्ष दोनों प्रदान करती है।
हरि अनंत हैं और हरि कथा भी अनंत है। सात दिन नहीं, सात कल्पों तक भी
भगवान की महिमा का अंत नहीं किया जा सकता।
कथा विश्राम के अवसर पर पूज्य महाराज ने इस भव्य आयोजन का श्रेय अपने
ब्रह्मलीन गुरुदेव जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज
की अहेतुकी कृपा को दिया तथा वर्तमान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद
सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन को भी नमन किया।
उन्होंने आयोजन समिति, श्रद्धालुओं, प्रशासन एवं सिवनी मीडिया के सहयोग
की सराहना करते हुए सभी के कल्याण की कामना की।
🕉️ प्रतिदिन की आरती एवं दर्शन समय
प्रातः 06 बजे मंगला आरती, 10 बजे अभिषेक आरती, 12 बजे भोग आरती के साथ
भगवान का विश्राम होगा। दोपहर 03:30 बजे पुनः पट खुलेंगे।
सायं 07 बजे संध्या आरती तथा रात्रि 09 बजे शयन आरती के साथ
मंदिर के पट अगले दिन के लिए बंद हो जाएंगे।



