डेढ़ सौ संगठनों ने किया महामहिम राज्यपाल डॉ. ढालसिंह बिसेन का भव्य नागरिक अभिनंदन, जन्मभूमि के स्नेह से अभिभूत हुए
बोले– पद और प्रतिष्ठा कितनी भी ऊंची हो जाए, अपनी मिट्टी और संस्कारों को कभी नहीं भूलना चाहिए, शरीर से दूर रहूंगा लेकिन हृदय से कभी दूर नहीं
ग्राम पंचायत से राज्यपाल तक की गौरवशाली यात्रा का हुआ अभिनंदन, पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद भारती पारधी सहित जनप्रतिनिधियों ने व्यक्त किए विचार, बाहुबली लॉन में उमड़ा स्नेह और सम्मान का जनसैलाब
Seoni, 07 November 2026
सिवनी यशो:- अपनी जन्मभूमि के प्रति लगाव, जनता के विश्वास और वर्षों के सार्वजनिक जीवन में अर्जित उपलब्धियों का जब एक साथ सम्मान हुआ तो माहौल भावनाओं से भर उठा। देवभूमि उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल डॉ. ढालसिंह बिसेन के राज्यपाल पद की शपथ ग्रहण करने के पश्चात प्रथम बार अपने गृह जिले सिवनी आगमन पर बाहुबली लॉन में भव्य नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। नागरिक अभिनंदन समिति के तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामय समारोह में जिले के सामाजिक, राजनीतिक, स्वयंसेवी, कर्मचारी एवं विभिन्न जाति-बिरादरी संगठनों सहित लगभग डेढ़ सौ संगठनों ने सहभागिता कर महामहिम राज्यपाल का आत्मीय अभिनंदन किया। शाल, श्रीफल और प्रतीक चिह्न भेंट कर किए गए सम्मान ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

समारोह में भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, सिवनी-बालाघाट सांसद श्रीमती भारती पारधी, सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन, बरघाट विधायक कमल मर्सकोले तथा केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र के वरिष्ठजन, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। मंच से वक्ताओं ने डॉ. ढालसिंह बिसेन के लंबे सार्वजनिक जीवन, उनके व्यक्तित्व, कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए उन्हें सिवनी की गौरवशाली उपलब्धि बताया।

सरलता, सौम्यता और विकास की व्यापक सोच रही डॉ. बिसेन की पहचान
अभिनंदन समारोह में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने अपने संबोधनों में कहा कि डॉ. ढालसिंह बिसेन ने जनप्रतिनिधि के रूप में सदैव सेवा भावना और अपने पद के अनुरूप पूरी निष्ठा के साथ दायित्वों का निर्वहन किया है। उनकी सरलता, सौम्य व्यवहार, सहज उपलब्धता और क्षेत्र के व्यापक विकास की सोच उनके सार्वजनिक जीवन की विशेष पहचान रही है।

वक्ताओं ने कहा कि ग्राम स्तर से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कर विधायक, सांसद और अब राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद तक पहुंचना उनके लंबे अनुभव, निरंतर सक्रियता और जनविश्वास का परिचायक है। आज वे संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। उनके राजनीतिक एवं सार्वजनिक जीवन के अनुभवों का लाभ केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के अन्य क्षेत्रों को भी प्राप्त होगा। वक्ताओं ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सिवनी की धरती से निकले इस व्यक्तित्व का इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर पहुंचना पूरे जिले के लिए गौरव का विषय है।

अपनी जन्मभूमि पर पहुंचकर भावुक हुए महामहिम राज्यपाल
समारोह का सबसे भावनात्मक पक्ष महामहिम राज्यपाल डॉ. ढालसिंह बिसेन का संबोधन रहा। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ करते हुए कहा कि आज इस ऐतिहासिक क्षण में वे स्वयं को अभिभूत महसूस कर रहे हैं। देवभूमि उत्तराखंड के राज्यपाल का दायित्व ग्रहण करने के बाद अपने गृह क्षेत्र में प्रथम बार आकर अपने लोगों के दर्शन करना उनके लिए अत्यंत भावपूर्ण अवसर है।
उन्होंने नागरिक अभिनंदन समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समिति ने यह आयोजन कर उन्हें अपनी जन्मभूमि के लोगों के बीच आने और उनसे मिलने का अवसर प्रदान किया है। दीपावली की व्यस्तताओं के बीच बड़ी संख्या में लोगों का उनके सम्मान के लिए उपस्थित होना उनके लिए विशेष महत्व रखता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में कितनी भी ऊंचाइयां प्राप्त कर ले, उसकी पहचान और व्यक्तित्व की वास्तविक जड़ें उसकी जन्मभूमि, परिवार और समाज में ही होती हैं। अपनी मिट्टी की सुगंध, अपने लोगों का अपनापन और बचपन की स्मृतियां जीवनभर मनुष्य के साथ रहती हैं। सिवनी उनके लिए ऐसी ही आत्मीय भूमि है, जिसके संस्कार और स्मृतियां सदैव उनके अंतर्मन में अंकित रहेंगी।
माता के संस्कारों और गुरुजनों के आशीर्वाद को बताया जीवन की सबसे बड़ी पूंजी
अपने जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए डॉ. बिसेन ने अपनी माता का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने कहा कि माता से मिले संस्कार, परिश्रम की प्रेरणा और सेवा का भाव उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी रहे हैं। उन्होंने अपने गुरुजनों, वरिष्ठजनों और उन सभी आत्मीय लोगों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने समय-समय पर उन्हें स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद दिया।

उन्होंने कहा कि आज वे जिस स्थान पर पहुंचे हैं, उसमें अनेक लोगों के योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस उपलब्धि को वे अपने प्रारब्ध, पूर्वजों के आशीर्वाद और शुभचिंतकों के सहयोग का परिणाम मानते हैं।
ग्राम पंचायत और सहकारी संस्था से शुरू हुआ सफर पहुंचा राज्यपाल के संवैधानिक पद तक
डॉ. ढालसिंह बिसेन ने अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि उनकी जनसेवा का सफर ग्राम स्तर से प्रारंभ हुआ। चिकित्सा व्यवसाय के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रियता दिखाई तथा ग्राम पंचायत और सहकारी संस्था के माध्यम से जनसेवा की शुरुआत की। इसके बाद संगठन में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए विधायक और सांसद के रूप में जनता की सेवा करने का अवसर मिला।

उन्होंने कहा कि आज राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद तक पहुंचने की यात्रा में सिवनी की जनता का विश्वास, सहयोग और स्नेह सदैव उनका संबल रहा है। उन्होंने अपने शुभचिंतकों और उन सभी लोगों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से उन्हें उत्तराखंड जैसे पवित्र प्रदेश की जनता की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ।
संविधान की गरिमा और मर्यादा के अनुरूप निभाएंगे दायित्व
उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान की गरिमा, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन करना उनके लिए गौरव के साथ एक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है।
उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि शिक्षा, उच्च शिक्षा, अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण, कृषि और जनकल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर रचनात्मक संवाद और सकारात्मक पहलों को प्रोत्साहित किया जाए।

मध्यप्रदेश को अपनी जन्मभूमि और उत्तराखंड को वर्तमान
कर्मभूमि बताते हुए उन्होंने दोनों प्रदेशों की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विशेषताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक ओर मध्यप्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है, तो दूसरी ओर हिमालय की दिव्यता, मां गंगा और यमुना के पावन उद्गम स्थल तथा चारधाम की आध्यात्मिक महिमा से सुशोभित उत्तराखंड है। दोनों प्रदेशों की अपनी विशिष्ट पहचान है, लेकिन भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रसेवा के संस्कार हमें एक सूत्र में बांधते हैं।
सिवनी की मिट्टी में परिश्रम और जनमानस में आगे बढ़ने की अद्भुत क्षमता
अपने गृह जिले के विकास की संभावनाओं पर विचार व्यक्त करते हुए महामहिम राज्यपाल ने कहा कि सिवनी की धरती अपनी परंपराओं, वनांचलों, कृषि संस्कृति और सांस्कृतिक वैभव के लिए विशिष्ट पहचान रखती है। यहां की मिट्टी में परिश्रम है, समाज में आत्मीयता है और जनमानस में आगे बढ़ने की अद्भुत क्षमता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्थानीय प्रतिभाओं, उपलब्ध संसाधनों और सामूहिक प्रयासों के समन्वय से सिवनी विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर सकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की प्रतिभा, मातृशक्ति का सामर्थ्य, किसानों का परिश्रम और ज्ञान-विज्ञान की शक्ति निर्णायक भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि समाज तभी वास्तविक अर्थों में समृद्ध बनेगा, जब प्रत्येक व्यक्ति को समान शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर मिलें, किसानों का जीवन समृद्ध हो, महिलाओं की भागीदारी सशक्त बने और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यही समावेशी विकास का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।
नागरिक अभिनंदन को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, जन्मभूमि के लोगों का आशीर्वाद माना
अपने सम्मान से अभिभूत डॉ. बिसेन ने कहा कि आज जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ उनका अभिनंदन किया जा रहा है, वह उनके लिए अत्यंत भावुक क्षण है। वे इस सम्मान को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि अपनी जन्मभूमि के लोगों के विश्वास और आशीर्वाद के रूप में स्वीकार करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह स्नेह और सम्मान उन्हें सदैव अपनी जड़ों से जुड़े रहने तथा अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा और समर्पण से निर्वहन करने की प्रेरणा देता रहेगा।
उन्होंने सिवनीवासियों से अपनी माटी, परंपराओं और सामाजिक सद्भाव पर गर्व करने तथा भावी पीढ़ी को श्रेष्ठ शिक्षा और संस्कार देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जन्मभूमि हमारी पहचान है, संस्कार हमारी शक्ति हैं और राष्ट्रसेवा हमारे जीवन का सर्वोच्च ध्येय है।
बोले– अब पहले की तरह आपका स्थानीय मतदाता नहीं रह पाऊंगा, लेकिन सिवनी से मेरा रिश्ता कभी नहीं टूटेगा
महामहिम राज्यपाल के संबोधन का सबसे भावुक और यादगार क्षण तब आया, जब उन्होंने अपने गृह क्षेत्र के लोगों से अपने नए संवैधानिक दायित्व को लेकर आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि अब वे पहले की तरह सिवनी के स्थानीय मतदाता नहीं रह पाएंगे, क्योंकि अब उन्हें उत्तराखंड के प्रथम नागरिक के रूप में संवैधानिक दायित्व निभाना है। उन्होंने कहा कि आपने मुझे इस महत्वपूर्ण दायित्व पर भेजा है, इसलिए भविष्य में पहले की तरह प्रत्यक्ष रूप से आपके बीच उपस्थित होना संभव नहीं हो पाएगा।
लेकिन उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि मैं आपसे शरीर से दूर रहूंगा, लेकिन हृदय से कभी दूर नहीं रहूंगा।
उन्होंने सिवनी के विकास और क्षेत्रवासियों के हित में संवैधानिक पद की मर्यादाओं के अनुरूप जो भी संभव होगा, उसके लिए सकारात्मक प्रयास करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठजनों और नागरिकों का मार्गदर्शन तथा सहयोग उनके लिए सदैव महत्वपूर्ण रहेगा। वे अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपनी जन्मभूमि और क्षेत्रवासियों के लिए भी सकारात्मक योगदान देने का प्रयास करेंगे।
सामाजिक सद्भाव और समृद्ध सिवनी की कामना के साथ संबोधन का समापन
अपने संबोधन के अंतिम चरण में डॉ. बिसेन ने दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के सुखी, स्वस्थ और निरोग रहने की कामना करते हुए कहा कि समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारा बना रहना चाहिए।
उन्होंने सिवनीवासियों से मिल-जुलकर ऐसा सिवनी बनाने का आह्वान किया, जहां सामाजिक सद्भाव के साथ सभी लोग प्रगति करें और अपने क्षेत्र का नाम रोशन करें। अपने गृह जिले के लोगों से मिले अपार स्नेह और सम्मान के लिए उन्होंने पुनः हृदय से आभार व्यक्त किया।
डेढ़ सौ संगठनों की सहभागिता ने समारोह को बनाया यादगार
बाहुबली लॉन में आयोजित इस नागरिक अभिनंदन समारोह में सामाजिक, राजनीतिक, स्वयंसेवी संस्थाओं, जाति-बिरादरी संगठनों और कर्मचारी संगठनों सहित लगभग डेढ़ सौ संगठनों की सहभागिता रही। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने शाल, श्रीफल एवं प्रतीक चिह्न भेंट कर महामहिम राज्यपाल का सम्मान किया। बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति ने समारोह को भव्य स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम का आयोजन नागरिक अभिनंदन समिति के तत्वावधान में किया गया। समिति में वरिष्ठ पत्रकार श्री संजय सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन सुजीत जैन, संदीप मिश्रा एवं श्री गजानन पंचेश्वर ने किया। राष्ट्रगीत के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ तथा समापन राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
सिवनी की धरती पर आयोजित यह नागरिक अभिनंदन समारोह केवल एक संवैधानिक पद पर पहुंचे व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उस जनसेवा की यात्रा, संघर्ष, संस्कार और जन्मभूमि के प्रति अटूट आत्मीयता का सम्मान बन गया, जिसने ग्राम पंचायत से लेकर राज्यपाल के पद तक का सफर तय किया है।