समग्र हिंदी साहित्य सेवा के लिए मिला 11 हजार रुपये का प्रतिष्ठित सम्मान, संस्कारधानी जबलपुर में देशभर के 129 साहित्यकारों एवं मनीषियों का हुआ सम्मान
बालाघाट/जबलपुर यशो:- बालाघाट की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक धरा के गौरव, वरिष्ठ साहित्यकार पं. सुधाकर शर्मा को उनकी समग्र हिंदी साहित्य सेवा के लिए संस्कारधानी जबलपुर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘कादम्बरी’ द्वारा ज्ञानवारिधि पं. ब्रह्मदत्त तिवारी स्मृति सम्मान ‘वाङ्मय भूषण’ से सम्मानित किया गया। 11 हजार रुपये की सम्मान राशि से अलंकृत यह सम्मान पं. सुधाकर शर्मा की दीर्घ साहित्यिक साधना, बहुआयामी लेखन और हिंदी भाषा-साहित्य के प्रति उनके समर्पण का महत्वपूर्ण प्रतिफल है। इस उपलब्धि से बालाघाट सहित साहित्यिक जगत में हर्ष का वातावरण है।
समारोह के उद्घोषक राजेश पाठक प्रवीण ने पं. सुधाकर शर्मा के साहित्यिक अवदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका समग्र लेखन सोद्देश्य और बहुविधायी है। उनके साहित्य में राष्ट्रीय मूल्य, सामाजिक एवं राजनीतिक संचेतना के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का व्यापक स्रोत दिखाई देता है। उनका लेखन चाहे स्फुट हो अथवा प्रबंधात्मक, भाषा की स्पष्टता, भावाभिव्यक्ति की सहजता और पात्रों के अनुरूप अभिव्यक्ति उनकी विशिष्ट पहचान है। उनके निबंधों, संस्मरणों, व्यंग्य रचनाओं और प्रबंध काव्यों में यह साहित्यिक विशेषता प्रभावशाली रूप से परिलक्षित होती है।
पिता की स्मृति में प्रारंभ हुआ प्रतिष्ठित सम्मान
ज्ञानवारिधि पं. ब्रह्मदत्त तिवारी स्मृति ‘वाङ्मय भूषण’ सम्मान की परंपरा साहित्याचार्य एवं संपादक प्रवर राजकुमार तिवारी ‘सुमित्र’ ने अपने पूज्य पिता की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रारंभ की थी। उनके सुपुत्र हर्ष तिवारी ने इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाते हुए अपने पिता की साहित्यिक विरासत और संकल्प को सम्मानित किया है। इसी परंपरा के अंतर्गत पं. सुधाकर शर्मा को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।
सात घंटे चला भव्य समारोह, 129 मनीषियों का सम्मान
कादम्बरी संस्था के तत्वावधान में जबलपुर के शहीद स्मारक भवन में आयोजित यह विशाल सम्मान समारोह लगभग सात घंटे तक अनवरत चलता रहा। देश-विदेश के ख्यातिलब्ध साहित्यकारों, पत्रकारों एवं समाजसेवियों की उपस्थिति से सभागार पूरे समय खचाखच भरा रहा। समारोह में कुल चार लाख 18 हजार रुपये की सम्मान निधि वितरित की गई। इस अवसर पर 21 हजार, 11 हजार, 5 हजार और 2100 रुपये की सम्मान राशि से कुल 129 मनीषियों को सम्मानित किया गया।
संस्था के अनुशासित आयोजन की पं. शर्मा ने की सराहना
सम्मान प्राप्त करने के पश्चात पं. सुधाकर शर्मा ने प्रेस को बताया कि किसी गैर-सरकारी संस्था द्वारा इतने विशाल स्तर पर सम्मान समारोह का निरंतर आयोजन करना अपने आप में सराहनीय, अनुकरणीय और प्रेरणादायी है। उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं, संस्था की आत्मानुशासित महिला एवं पुरुष कार्यकर्ताओं की समर्पित टीम और उनके उत्कृष्ट टीमवर्क की विशेष प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन को अनुशासन, समन्वय और व्यवस्थित ढंग से संपन्न करना संस्था की कार्यक्षमता और साहित्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पं. सुधाकर शर्मा को प्राप्त यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत साहित्यिक उपलब्धि है, बल्कि बालाघाट की साहित्यिक-सांस्कृतिक पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने वाला अवसर है।