धर्मसिवनी

मोक्ष सप्तमी पर सिवनी में विशेष आयोजन: पहली बार रक्षाबंधन पर विश्व की प्रथम राखी प्रभु को अर्पित होगी

श्री पार्श्वनाथ भगवान के मोक्षकल्याणक महोत्सव में 108 बहनों द्वारा राखी अर्पण की ऐतिहासिक पहल

 Seoni 31 july  2025 

 सिवनी यशो:- सिवनी नगर स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में आज श्रावण शुक्ल सप्तमी (मोक्ष सप्तमी) के अवसर पर श्री पार्श्वनाथ भगवान का मोक्षकल्याणक महोत्सव अत्यंत भव्यता एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर पहली बार विश्व की प्रथम राखी प्रभु पार्श्वनाथ को अर्पित की गई, जो रक्षाबंधन पर्व को आध्यात्मिक अर्थों में एक नई दिशा प्रदान करती है।

🛕 विशेष धार्मिक क्रियाएँ

यह आयोजन मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज एवं मुनि श्री भावसागर जी महाराज के सान्निध्य तथा ब्रह्मचारी मनोज भैयाजी जबलपुर के निर्देशन में संपन्न हुआ।

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प्रातःकाल में श्रद्धालुओं द्वारा महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, पारसनाथ विधान, निर्वाण लाडू अर्पण जैसी पावन धार्मिक क्रियाओं का आयोजन किया गया।

🎀 रक्षाबंधन पर प्रभु को अर्पित होगी विशेष राखी

विशेष बात यह रही कि प्रथम बार रक्षाबंधन पर प्रभु को अर्पण हेतु 108 बहनों द्वारा विशिष्ट राखियाँ तैयार की जा रही हैं, जो इस पावन पर्व को आध्यात्मिक गौरव से जोड़ती हैं। 

कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह ने प्रवचन में शामिल होकर मार्गदर्शन प्राप्त किया

सेठ अजित कुमार जैन, श्रीमती ममता जैन, चंदन जैन और श्रीमती प्राशी द्वारा सौधर्मेंद्र बनने का सौभाग्य प्राप्त किया गया।

🧘 मुनि श्री भावसागर जी महाराज का प्रवचन

मुनिश्री ने कहा,

“संकटों का आना आत्मा की परीक्षा है। चंदन की तरह महान पुरुषों की सुगंध उनके प्रति हिंसक भाव रखने वालों को भी पवित्र कर देती है।”

उन्होंने कमठ और भगवान पार्श्वनाथ के संवाद का प्रेरणादायक उदाहरण देते हुए समझाया कि क्षमाशीलता और आत्म-साधना से कर्म भी पराजित हो जाते हैं।

🕉️ मोक्ष प्राप्ति की पावन स्मृति

श्रावण शुक्ल सप्तमी को ही प्रभु पार्श्वनाथ ने सम्मेद शिखर जी की सुवर्णभद्र टोंक से खड़गासन में मोक्ष प्राप्त किया था।

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इस दिन को मुकुट सप्तमी या मोक्ष सप्तमी कहा जाता है क्योंकि प्रभु ने लोक के सर्वोच्च मुकुट स्वरूप स्थान को प्राप्त किया।

देवलोक से जयघोष और सौधर्म इन्द्र के आगमन के साथ केवलज्ञान प्राप्ति और मोक्ष की यह स्मृति, आज भी श्रावकगण द्वारा निर्वाण लाडू चढ़ाकर श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।

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