आवारा कुत्तों से बचाव के लिए चौराहों पर बनें ‘रिंग’, शेषराव यादव ने प्रशासन के सामने रखा सुझाव
इंडोनेशिया में देखी व्यवस्था का दिया उदाहरण, नसबंदी के बाद कुत्तों की पहचान के लिए टैगिंग और निर्धारित स्थान पर देखभाल का प्रस्ताव
आवारा कुत्तों से बचाव के लिए चौराहों पर बनें ‘रिंग’: शेषराव यादव
Chhindwara 16 September 2026
छिंदवाड़ा यशो:-। शहरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव ने नगरीय निकाय एवं जिला प्रशासन के समक्ष चौराहों पर निर्धारित स्थानों पर कुत्तों को रखने के लिए गोलाकार ‘रिंग’ या सुरक्षित पिंजरे बनाए जाने का सुझाव दिया है। यादव के अनुसार इससे एक ओर आम लोगों को आवारा कुत्तों से सुरक्षा मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर नसबंदी, टीकाकरण और उनकी संख्या की निगरानी भी व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।
शेषराव यादव ने बताया कि वे हाल ही में इंडोनेशिया के दौरे पर गए थे। वहां उन्होंने सड़क पर रहने वाले कुत्तों के प्रबंधन के लिए विभिन्न स्थानों पर बनाए गए गोलाकार पिंजरों की व्यवस्था देखी। उनके अनुसार ऐसे स्थानों पर कुत्तों को रखा जाता है और पशु प्रेमी अथवा समाजसेवी वहां जाकर उनके लिए भोजन की व्यवस्था कर सकते हैं।
नसबंदी के बाद टैगिंग का सुझाव
यादव का कहना है कि यदि आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित स्थान बनाए जाते हैं तो उनकी नसबंदी एवं टीकाकरण की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित किया जा सकता है। नसबंदी किए गए कुत्तों की पहचान के लिए टैगिंग करने का सुझाव भी उन्होंने दिया है, जिससे संबंधित कुत्तों की पहचान और संख्या का रिकॉर्ड रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से नगरीय निकायों के रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, प्रस्तावित रिंग या पिंजरे की व्यवस्था स्थानीय नियमों और पशु कल्याण संबंधी प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं, इस संबंध में प्रशासन एवं संबंधित विभाग से स्थिति स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता बताई गई है।
नगरीय निकाय और प्रशासन करें व्यवस्था का परीक्षण
शेषराव यादव ने सुझाव दिया कि नगरीय विकास विभाग तथा जिला प्रशासन इस व्यवस्था का परीक्षण कर सकते हैं। आवश्यकता होने पर नगरीय निकायों के आयुक्त या मुख्य नगरपालिका अधिकारी ऐसी व्यवस्थाओं का अध्ययन भी कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान में आम नागरिकों की सुरक्षा और पशु संरक्षण—दोनों पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है। निर्धारित स्थान पर कुत्तों की देखभाल, नसबंदी और निगरानी होने से व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है।
‘रिंग’ बनाने की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग
यादव ने जिला प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने का आग्रह किया है कि इस प्रकार के रिंग या सुरक्षित पिंजरे बनाए जाने की कानूनी एवं प्रशासनिक स्थिति क्या होगी। उनका कहना है कि व्यवस्था लागू करने से पहले संबंधित पशु कल्याण नियमों और स्थानीय निकायों के प्रावधानों के अनुरूप इसकी जांच की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के 2025 के आदेशों में आवारा कुत्तों के पकड़ने, नसबंदी, टीकाकरण और प्रबंधन को Animal Birth Control Rules, 2023 के अनुरूप करने पर जोर दिया गया है। बाद के आदेश में न्यायालय ने इन प्रावधानों के तहत नसबंदी और टीकाकरण के बाद सामान्यतः उसी क्षेत्र में छोड़े जाने की व्यवस्था को भी स्पष्ट किया था, जबकि रेबीज संदिग्ध या आक्रामक कुत्तों के संबंध में अलग प्रावधान रखे गए हैं।
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