धर्मसिवनी

सिवनी में 22वां मुनि दीक्षा दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न, मुनिश्री भावसागर जी का तप व संयम से भरा जीवन प्रेरणास्रोत

जैन बड़ा मंदिर सिवनी में मुनिश्री धर्मसागर जी और मुनिश्री भावसागर जी के सानिध्य में आयोजित हुआ तप कल्याणक महोत्सव, भक्ति-नृत्य, पूजन और आरती के साथ नगर भक्तिमय

सिवनी, 30 जुलाई 2025:
सिवनी के जैन बड़ा मंदिर परिसर में बुधवार को परम पूज्य मुनिश्री भावसागर जी महाराज का 22वां मुनि दीक्षा दिवस अत्यंत श्रद्धा, संयम और धार्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में परम पूज्य मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज और ब्र. मनोज भैयाजी जबलपुर के निर्देशन में विविध मांगलिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ।

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सुबह श्री नेमिनाथ भगवान के जन्म तप कल्याणक के साथ पाद प्रक्षालन, आचार्य पूजन, दीप प्रज्वलन, चित्र अनावरण, परिक्रमा व आरती जैसे मांगलिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में भक्तों ने भाग लिया। पूरा मंदिर परिसर केसरिया भक्ति में रमा हुआ था, जहाँ श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य कर अपनी आस्था प्रकट की।

मुनिश्री भावसागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा:

“22वें तीर्थंकर के कल्याण दिवस पर हमारी मुनि दीक्षा हुई — प्रभु और गुरु की कृपा से जीवन में सम्यक मार्ग की प्राप्ति संभव हुई। साधक कभी उपकार नहीं जताते, वे सेवा और संयम से मार्ग प्रशस्त करते हैं।”

उन्होंने गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन के प्रसंगों को साझा करते हुए बताया कि कैसे बाल्यकाल से ही रत्नत्रय का बीज उनमें अंकुरित था। उन्होंने अपनी दीक्षा से पहले और बाद में संयम और साधना से समाज को दिशा दी, जिससे असंख्य लोगों ने संयममार्ग अपनाया।

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दीक्षा न मिलने पर भी अनेक गृहस्थों ने उनके संकेत मात्र से संयम का व्रत लिया, अष्ट मूलगुण और देश संयम धारण किया। उनके संघ में बाल ब्रह्मचारियों को स्थान देकर संयम की परंपरा को नये आयाम दिये।

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