वरिष्ठ पत्रकार का विश्लेषण | संपादकीय
लेखक: गोविंद चौरसिया (वरिष्ठ पत्रकार)

छिंदवाड़ा यशो:- केंद्र सरकार द्वारा 10 फरवरी को प्रस्तुत आम बजट में रेल बजट को शामिल कर दिया गया है, लेकिन इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि रेलवे के अंतर्गत किस क्षेत्र को क्या सुविधाएं मिली हैं। यह सवाल वरिष्ठ पत्रकार गोविंद चौरसिया ने दैनिक यशोन्नति के लिए भेजे गए अपने विश्लेषण में उठाया है।
गोविंद चौरसिया का कहना है कि वर्ष 2017–18 तक रेल बजट अलग से प्रस्तुत किया जाता था। उस समय यह साफ तौर पर सामने आता था कि किस राज्य, किस संसदीय क्षेत्र या किस रेल मंडल को नई ट्रेन, रेल लाइन दोहरीकरण या स्टेशन विकास जैसी कौन-सी सौगात मिली। रेल बजट को आम बजट में शामिल किए जाने के बाद यह पारदर्शिता लगभग समाप्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि सांसद अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रेल मंत्री से मुलाकात कर नई ट्रेनों के संचालन, स्टेशन उन्नयन और रेल लाइनों के दोहरीकरण की मांग करते हैं। पहले जब रेल बजट अलग होता था, तब सांसद अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने स्पष्ट रूप से रख पाते थे और जनता भी यह जान पाती थी कि उनके प्रतिनिधि ने क्या प्रयास किए।
रेलवे के लिए 2.93 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान,स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं
वर्तमान बजट में केंद्र सरकार ने रेलवे के लिए 2.93 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है,
लेकिन यह नहीं बताया गया कि कितनी नई ट्रेनें शुरू होंगी, किन रेल लाइनों का दोहरीकरण होगा और
किस क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। इससे आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों में भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
बजट का प्रभावी प्रचार कैसे संभव होगा
वरिष्ठ पत्रकार गोविंद चौरसिया का कहना है कि-
एक ओर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंत्रियों और
नेताओं से बजट का व्यापक प्रचार करने का आह्वान किया है,
ताकि विकसित भारत की अवधारणा आम आदमी तक पहुंचे,
लेकिन जब रेल बजट की स्पष्ट जानकारी ही उपलब्ध नहीं होगी तो उसका प्रभावी प्रचार कैसे संभव होगा।
उन्होंने मांग की कि –
रेल मंत्रालय को बजट में मिले धन और उससे होने वाले विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे जैसा विशाल और
महत्वपूर्ण क्षेत्र होने के कारण आने वाले वर्षों में रेल बजट को पुनः अलग से पेश किया जाना चाहिए,
ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता को सही जानकारी मिल सके।



