नगर छपारा में सत्संग समारोह में आचार्य श्री ने सदगुरु की अमृतवाणी के महत्व पर डाला प्रकाश*
Seoni 09 June 2025
छपारा यशो:- नगर छपारा में आयोजित सदगुरु कबीर प्राकट्य महा महोत्सव एवं त्रिदिवसीय सत्संग समारोह के दूसरे दिन का शुभारंभ सदगुरु की आरती से हुआ। इस पावन अवसर पर कु. सरुपी, नूपुर, श्रुति अवधिया (भीमगढ़), कु. संजीवनी, खुशबू गुप्ता (बालाघाट) एवं यशु अवधिया द्वारा भावपूर्ण स्वागत भजनों की प्रस्तुति दी गई।
सदगुरु कबीर समाज उत्थान समिति छपारा द्वारा आयोजित इस समारोह में दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु भक्तों ने श्रद्धा-सुमन अर्पित कर पूज्य आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।
पूज्य गुरुदेव ने अपने आध्यात्मिक प्रवचन में सदगुरु कबीर साहेब के प्राकट्य का उल्लेख करते हुए कहा कि—”अगर विचारपूर्वक देखा जाए तो आज का मनुष्य अनेक प्रपंचों में उलझा हुआ है। उसे इतना समय ही नहीं कि वह सभी धर्म-दर्शन, संत महात्माओं की वाणियाँ अथवा वेद-वेदांत का सम्यक अध्ययन कर सके। ऐसे समय में सदगुरु कबीर साहेब की अमृतवाणी, हजारों शास्त्रों का सार रूप प्रस्तुत करती है—सरल, सारगर्भित और आत्मा को झकझोर देने वाली।”
उन्होंने कहा कि 14वीं शताब्दी के अंत में जब देश धार्मिक अंधविश्वासों, पाखंड और मजहबी उन्माद से घिरा हुआ था, तब मानव कल्याण हेतु सत्य के प्राकट्य के रूप में सदगुरु कबीर साहेब विक्रम संवत 1455, ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा, सोमवार को काशी के लहरतारा सरोवर में बाल रूप में प्रकट हुए।
*”धन्य कबीर कुछ जलवा दिखाना हो तो ऐसा हो, बिना मां-बाप के दुनिया में आना हो तो ऐसा हो…”*
अपने उद्बोधन में पूज्य आचार्य श्री ने सदगुरु की वाणियों और सिद्धांतों की गहराई का परिचय कराते हुए कहा कि—”सदगुरु कबीर साहेब ने परम तत्व, सत्यलोक-सत्यपुरुष, आत्मा का निज घर, भक्ति योग, नाम जाप, तथा अनेक सामाजिक बुराइयों—जैसे छुआछूत, जीव हिंसा, मांसाहार, व्यभिचार व नशा—के प्रतिरोध में जो शिक्षाएं दीं, वे आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।”
उन्होंने कहा कि जीवात्मा अपनी मूल पहचान से भटकी हुई है और माया के मोह में फंसकर 84 लाख योनियों में चक्कर लगाती रहती है। सदगुरु ही वह शक्ति हैं, जो उसे निज घर का मार्ग दिखा सकते हैं।
**”हे जियरा तुम सत्यलोक के, परयो काल बस आय । मन स्वरूपी देव निरंजन, तुमहि रखो भरमाय।”**
अपने प्रवचन के अंत में पूज्य गुरुदेव ने भावुक होकर कहा—”जीवात्मा के एकमात्र रक्षक सदगुरु हैं। उन्हीं की शरण में जाने से ही निर्वाण पद और परमानंद की प्राप्ति संभव है। अन्यत्र नहीं।”
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। भक्ति, भाव और श्रद्धा से ओतप्रोत यह दिन सदगुरु की अमृतवाणी की गूंज के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा।




