ठेकेदार से वसूली गई बाजार राशि सरपंच-पति को सौंपने के बाद गायब, पंचायत में बढ़ा तनाव
Seoni 16 December 2025
सिवनी यशो:- जनपद पंचायत सिवनी अंतर्गत ग्राम पंचायत कलारबांकी में शुक्रवार को लगने वाली साप्ताहिक बैठकी बाजार की ठेका वसूली राशि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ठेकेदार द्वारा चार माह की 42,500 रुपये की राशि वसूली कर सरपंच-पति भरत इनवाती को शासकीय कोष में जमा कराने के लिए सौंपी गई थी, लेकिन यह राशि अब तक पंचायत खाते में जमा नहीं की गई, जिससे पंचायत स्तर पर हंगामा खड़ा हो गया।
वसूली तो हुई, जमा नहीं हुई राशि
शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायत कलारबांकी में बैठकी बाजार की विधिवत नीलामी की गई थी।
ठेकेदार द्वारा पूर्व में नियमानुसार राशि पंचायत में जमा कराई जाती रही, लेकिन हाल के चार महीनों की वसूली की गई रकम देर रात बाजार बंद होने के बाद सरपंच श्रीमती पिंकी इनवाती के पति भरत इनवाती (जो स्वयं पंच भी हैं) को सौंपी गई।
आरोप है कि इसके बाद से उक्त राशि शासकीय कोष तक नहीं पहुंची।
राशि पूछने पर उग्र रवैया, झगड़े के आरोप
पंचों और सचिव का कहना है कि जब भी राशि जमा करने की बात की जाती है, तो सरपंच-पति उग्र हो जाते हैं और विवाद पर उतर आते हैं। इससे पंचायत का कार्य प्रभावित हो रहा है और माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है।
पंच–सचिव पहुंचे बंडोल थाना
बीते शुक्रवार को ग्राम पंचायत कलारबांकी के पंच एवं सचिव पंचायत कार्यालय पहुंचे और सरपंच व उनके पति से राशि के संबंध में जवाब मांगा। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर पंचायत सचिव पंचों के साथ बंडोल थाना पहुंचे और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
जनपद सीईओ से भी की जाएगी शिकायत
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि इस मामले की जानकारी जनपद पंचायत सिवनी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को भी दी जाएगी। पंचायत प्रतिनिधियों ने मांग की है कि
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शासकीय राशि तत्काल पंचायत खाते में जमा कराई जाए,
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पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो,
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और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
- शासकीय राशि से जुड़ा गंभीर मामला
बैठकी बाजार से होने वाली आय पंचायत के विकास कार्यों की रीढ़ मानी जाती है।
ऐसे में शासकीय राशि का समय पर जमा न होना न केवल वित्तीय अनियमितता,
बल्कि विश्वासघात का भी मामला माना जा रहा है।
अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि-
क्या इस प्रकरण में जिम्मेदारों पर सख्त कदम उठाए जाते हैं या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।



