जिसका परीक्षण नहीं, उसका प्रयोग नहीं होना चाहिए : आचार्य विशुद्ध सागर
अभूतपूर्व धर्म प्रभावना के साथ आचार्य संघ का मंगल पद बिहार
Seoni 02 January 2026
सिवनी यशो:- नव वर्ष की संध्या बेला में चौरई की ओर से पूज्य पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का सिवनी नगर में मंगल आगमन हुआ। नगर सीमा पर जैन एवं जैनेतर श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री एवं संघ की भव्य अगवानी कर धर्ममय वातावरण निर्मित किया।
महावीर मढ़िया के समीप स्थित मां श्यामा मंदिर के अधिष्ठाता पंडित यशोवर्धन मिश्र ने अपने परिवार एवं मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं के साथ पूज्य आचार्य श्री के पाद प्रक्षाल एवं गुरु पूजन उत्कृष्ट द्रव्यों से संपन्न कराया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

प्रवचन में दिया जीवनोपयोगी संदेश
प्रातःकालीन धर्मसभा में दिव्य देशना प्रदान करते हुए पूज्य आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि “जिसका परीक्षण नहीं हुआ है, उसका प्रयोग व्यावहारिक नहीं होना चाहिए।” इस सूत्र को उन्होंने कोरोना महामारी से जोड़ते हुए अत्यंत प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया।
आचार्य श्री ने कहा कि –
महामारी के समय जब व्यक्ति जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा था,
तब थाली बजाने,
कपूर आरती,
बिजली गुल करने जैसे अनेक उपाय किए गए,
किंतु वे सभी व्यर्थ सिद्ध हुए।
कोरोना कोई ऐसा जीव नहीं था जो इन उपायों से भाग जाता।
उन्होंने कहा कि कई दवा कंपनियों ने उस समय दवा तैयार करने का दावा किया,
किंतु सरकार ने बिना वैज्ञानिक परीक्षण के दवाओं के प्रयोग पर रोक लगाई,
क्योंकि बिना परीक्षण दवा का प्रयोग मानव जीवन के लिए घातक हो सकता था।
जब दवा का पूर्ण परीक्षण हुआ और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हुई,
तभी वह आमजन के लिए उपलब्ध कराई गई।
भोजन और जल में भी आवश्यक है परीक्षण
आचार्य श्री ने कहा कि-
यही सिद्धांत भोजन और जल पर भी लागू होता है।
हर व्यक्ति को हर किसी के हाथ का भोजन और पानी ग्रहण नहीं करना चाहिए।
विशेष रूप से विशिष्ट व्यक्तियों को पूर्ण परीक्षण एवं शुद्धता की संतुष्टि के बाद ही भोजन एवं जल ग्रहण करना चाहिए।
इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि-
क्रूर शासकों ने शत्रु राज्यों पर विजय पाने के लिए कुओं और जलाशयों में विष मिलवाया,
जिससे पूरा राज्य विषाक्त जल से काल के गाल में समा गया।
इसलिए प्रयोग से पहले परीक्षण अत्यंत आवश्यक है।
श्रद्धालुओं को मिला पुण्य लाभ
धर्मसभा में पूज्य आचार्य श्री के पाद प्रक्षाल का सौभाग्य पूर्व अध्यक्ष अनिल नायक परिवार को प्राप्त हुआ,
जबकि जिनवाणी ग्रंथ समर्पण का सौभाग्य पूर्व विधायक नरेश दिवाकर परिवार को मिला।
मध्यान्ह में पूज्य आचार्य श्री का मंगल बिहार कटंगी मार्ग की ओर हुआ।
उल्लेखनीय है कि –
आगामी 18 जनवरी से छत्तीसगढ़ के राजिम में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के लिए आचार्य संघ का मंगल पद बिहार निरंतर जारी है।
https://acharyaprashant.org/en/articles/aek-anuthi-tairak-aur-mahasagar-ka-akelapan-1_3987f34



