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कौन है वह नेता जो कानून अपनी जेब में रखकर चल रहा है ?

नपा अध्यक्ष को स्पष्ट करना चाहिये, किसने कहा बीजेपी का गमछा डालने से वे निर्दोष हो जायेंगे
नपा अध्यक्ष खान के बोलबच्चन कांग्रेस की मुसीबत बन सकते है

सिवनी यशो:- गलतियाँ खुद करों और तोहमत दूसरों पर लगाओं यह नगर पालिका अध्यक्ष शफीक खान का ही नहीं पूरी कांग्रेस पार्टी का चरित्र है । अनापसनाप बयानबाजी कर शफीक खान आम जनता के बीच भ्रामकता फैलाने और सुर्खियाँ बंटोरने का काम कर रहे है । उनके ऊपर न्यायालय में जो आरोप लगे है और उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया के समय अपनी गलत जानकारी दी है इस प्रकार का आरोप उन लगाते हुये आपत्ति दर्ज हुई और आपत्तिकत्र्ता द्वारा उच्च न्यायालय में केस दयार किया है जिसकी सुनवाई चल रही है भारतीय न्याय प्रणाली इतनी अधिक सस्ती नहीं है कि वह किसी के दबाव में काम करें और शफीक खान भाजपा का गमछा पहनले तो वे आरोप मुक्त हो जायेंगे उन्हें आरोपों से मुक्ति सही दस्तावेज प्रस्तुत करने से ही मिलेगी और आरोपों के संबंध में प्रस्तुत दस्तावेज सहित शफीक खान अपनी सफाई में जो दस्तावेज एवं तर्क प्रस्तुत करेंगे उस पर निर्णय करने का अधिकार न्यायालय का है नगर पालिका अध्यक्ष शफीक खान को माननीय न्यायालय का सम्मान करना चाहिये । भले ही आरोपो के अनुसार वे फर्जी दस्तावेजो के आधार पर नगर पालिका अध्यक्ष निर्वाचित हुये हो परंतु वर्तमान में वे नगर के प्रथम नागरिक है उन्हें जिम्मेदारी से बयानबाजी करना चाहिये । कुछ अखबारों में उनकी प्रतिक्रिया प्रकाशित हुई है जिसमें नपा अध्यक्ष ने कहा है कि भाजपा का गमछा पहनने से उनके सारे आरोप माफ हो जायेंगे ऐसा किसी भाजपा के नेता ने उनसे कहा है शफीक खान जी को उक्त भाजपा नेता के नाम का उल्लेख करना चाहिये और जिससे समझ में आये कि ऐसा कौन सा भाजपा का नेता है जो कानून अपनी जेब रखकर चलने का दावा कर रहा है और वह कानून से बड़ा हो गया है या फिर नपा अध्यक्ष शफीक खान सुर्खियाँ बटोरने के लिये बेतुकी बयानबाजी कर रहे है ।
मनमानी बयानबाजी के अनेक वीडियो हो चुके है वायरल
शफीक खान के बोल बच्चन कांग्रेस के लिये भारी मुश्किल खड़ी कर सकते है । यहाँ बता दें कि श्री खान के अनेक वीडियो भी वायरल हुये है और यह वीडियो भी उनके अध्यक्ष पद के लिये खतरनाक हो सकते है । उन्होंने यह भी एक बयानबाजी की थी कि वे तो बिक चुके थे और कांग्रेस उन्हें अध्यक्ष नहीं बनाती तो वे भाजपा के उम्मीदवार को सपोर्ट करते । कांग्रेस नेता पदम सनोडिया के संबंध में भी श्री खान ने इसी प्रकार बयानबाजी की थी जिसका बड़ा बवंडर खड़ा हुआ था जिसमें श्री खान ने कहा था कि पदम सनोडिया उन्हें खरीदने के लिये अध्यक्ष निर्वाचन के समय भाजपा के उम्मीदवार ज्ञानचंद सनोडिया के पक्ष में राशि लेकर पहुँचे थे । एक वीडियो और अध्यक्ष निर्वाचन के समय वायरल हुआ था जिसमें कांग्रेस दल के पार्षदों को धार्मिक ग्रांथों पर हाथ रखकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान के लिये शपथ दिलाई जा रही थी । इस प्रकार की बयानबाजी और भी अनेक अवसरों पर वे कर चुके है उनके द्वारा, मैं सबसे गुंडा जैसा विवादित धमकी भरा वीडियो भी सार्वजनिक है । इस प्रकार के वायरल वीडियो लोकतांत्रिक मर्यादओं के अनुरूप नहीं है हालांकि इस प्रकार के बहुत से वीडियो सोशल मीडिया में हास्य परिहास तक सीमित होकर रह जाते है संभव है इन वीडियो को कोई आधार बनाकर न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराये तो कांग्रेस पार्टी और नपा अध्यक्ष शफीक खान मुश्किल में पड़ सकते है ।
अगली सुनवाई 08 सितंबर को
यहाँ बतादें कि शफीक खान पर आरोप है कि उनके द्वारा निर्वाचन के समय जो जाति प्रमाण पत्र दिया गया है वह गलत है इसके साथ ही शफीक खान पर आरोप है कि उन्होंने निर्वाचन के समय अपने आपराधिक प्रकरण छुपाये है इसके साथ ही अनेक आरोप लगाये गये है जिनके आधार याचक ने याचना की है कि श्री खान की पार्षदी को शून्य घोषित किया जाये । याचक की याचिका पर हाई कोर्ट ने जिला कलेक्टर को सुनवाई के लिये निर्देश दिये है । जिसकी सुनवाई पहले 29 अगस्त थी फिर 01 सितंबर को निर्धारित हुई । 01 सितंबर को श्री खान ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया जिसकी अगली सुनवाई 08 सितंबर को निर्धारित है ।
पूर्ववर्ती चुनावो में भी गलत दस्तावेज दिये गये, अनेक शासकीय भूमियों पर अतिक्रमण के है आरोप
आरोप और चर्चाओं में तो यह भी है कि वर्तमान नपा अध्यक्ष शफीक खान इसके पूर्ववर्ती चुनावों के समय भी संतानों से संबंधित फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर चुके है । इसी प्रकार इनके द्वारा अनेक शासकीय भूमियों पर अवेध कब्जे किये गये है इनके व्यवसायिक प्रतिष्ठान और निवास भी अवैध शासकीय भूमि पर निर्मित है इनके निर्माणधीन भवन की वैधानिक स्वीकृति के संबंध में भी सवाल खड़े हो रहे है । शफीक खान की अध्यक्षीय परिषद में अनैतिक तरीके से नल कनेक्शन देने, नियमों को ताक पर रखकर शासकीय धन का दुरूपयोग जैसे अनेक आरोप चर्चाओं में है और दावा किया रहा है कि इस अध्यक्षीय परिषद के द्वारा नियमों को ताक पर रखकर इतनी गलतियाँ की गयी है कि जल्द ही कानून स्वयं अपना काम करेगा और अधिकारी भी कानूनी कार्यवाही की जद में आयेंगे ।

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