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सुपारी के नाम पर 35 लाख की ठगी, फर्जी फर्म खोलकर ठग फरार

छपारा के कारोबारी को सांगली बुलाकर रचा पूरा खेल, तीन दिन के किराये के गोदाम से गायब हुआ ठगी का नेटवर्क

छपारा में सुपारी सप्लाई के नाम पर 35 लाख की ठगी, फर्जी फर्म बनाकर ठग फरार

छपारा/सिवनी यशो :-ऑनलाइन कारोबार में भरोसे के नाम पर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। छपारा के कारोबारी वैभव शिवहरे को सुपारी सप्लाई के नाम पर कथित ठगों ने 35 लाख रुपये का चूना लगा दिया। आरोपियों ने फर्जी फर्म, नकली पहचान और किराये के गोदाम का सहारा लेकर ऐसा जाल बुना कि रकम हाथ लगते ही रातों-रात फरार हो गए।

वैभव शिवहरे कंस्ट्रक्शन, सप्लाई एवं अंतर्राष्ट्रीय सामग्री सप्लाई का काम करते हैं। जुलाई माह में उनकी फर्म को बांग्लादेश स्थित कंपनी अभिराज इंटरप्राइजेस से 100 मीट्रिक टन सुपारी सप्लाई का ऑर्डर मिला था। सामग्री उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जस्ट डायल पर जानकारी साझा की थी।

व्हाट्सएप सैंपल से बनाया भरोसा

6 जुलाई को एक व्यक्ति ने वैभव से संपर्क कर खुद को महाराष्ट्र के सांगली स्थित श्री बालाजी ट्रेडर्स का संचालक धीरज पाटिल बताया। आरोपी ने व्हाट्सएप पर सुपारी के सैंपल भेजे, जो वैभव को पसंद आए।

इसके बाद 100 मीट्रिक टन सुपारी का सौदा 2 करोड़ 20 लाख रुपये में तय हुआ। आरोपियों ने 20 प्रतिशत एडवांस राशि मांगी और वैभव ने उनके बताए बैंक खाते में तीन किश्तों में 35 लाख रुपये जमा कर दिए।

सांगली बुलाया, दिखाया फर्जी कारोबार

रकम लेने के बाद आरोपियों ने वैभव को माल लेने के लिए सांगली बुलाया। 19 जुलाई को वैभव वहां पहुंचे तो एक गोदाम के सामने श्री बालाजी ट्रेडर्स का बोर्ड लगा मिला। वहां दो लोगों ने खुद को धीरज पाटिल और दिलीप पाटिल बताया।

लेकिन जब वैभव ने सुपारी देखी तो मामला संदिग्ध लगा। गोदाम में रखा माल व्हाट्सएप पर दिखाए गए सैंपल से खराब गुणवत्ता का था। वैभव ने माल लेने से इनकार करते हुए सौदा रद्द कर दिया और रकम वापस मांगी।

पैसे लौटाने का वादा कर हुए गायब

आरोपियों ने 22 जुलाई को रुपये वापस करने का भरोसा दिया, लेकिन तय तारीख पर दोनों के मोबाइल बंद मिले।

जब वैभव दोबारा गोदाम पहुंचे तो वहां से श्री बालाजी ट्रेडर्स का बोर्ड गायब था। चौकीदार ने बताया कि दोनों लोगों ने गोदाम केवल तीन दिन के लिए किराये पर लिया था और रात में ही वहां से चले गए।

जांच में खुला फर्जीवाड़ा

वैभव ने जब इंटरनेट पर श्री बालाजी ट्रेडर्स की जानकारी जुटाई और सांगली स्थित वास्तविक फर्म से संपर्क किया तो पता चला कि धीरज पाटिल और दिलीप पाटिल नाम के व्यक्ति उस फर्म से जुड़े ही नहीं हैं।

पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आशंका है कि आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है।

सावधान रहें: ऑनलाइन व्यापार में किसी भी नए व्यापारी से बड़ा लेन-देन करने से पहले फर्म, दस्तावेज, जीएसटी नंबर और वास्तविक पते की पुष्टि जरूर करें।

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