उड़ीसा से मध्यप्रदेश तक फैला गांजा तस्करी नेटवर्क बेनकाब: घंसौर में 76 किलो खेप के साथ दो गिरफ्तार
छोटे वाहनों के जरिए हो रही सप्लाई, हाईवे रूट बना तस्करों का सुरक्षित गलियारा; एनसीबी-घंसौर पुलिस की कार्रवाई में खुल रहे बड़े नेटवर्क के संकेत
घंसौर गांजा तस्करी नेटवर्क
Seoni 18 March 2026
सिवनी / घंसौर यशो:- जिले में 76 किलो गांजा के साथ पकड़े गए ऑटो ने केवल एक तस्करी की घटना का खुलासा नहीं किया, बल्कि उड़ीसा से मध्यप्रदेश तक फैले एक सुनियोजित मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क की परतें भी खोल दी हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और घंसौर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है।

छोटे वाहनों से बड़े नेटवर्क का संचालन
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि तस्कर बड़े ट्रकों के बजाय छोटे और साधारण वाहनों—जैसे ऑटो—का उपयोग कर रहे हैं, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। पकड़ा गया ऑटो (एमपी 04 आरए 6965) भी इसी रणनीति का हिस्सा था, जिसमें 76 किलो गांजा छिपाकर उड़ीसा से विदिशा ले जाया जा रहा था।
घंसौर गांजा तस्करी नेटवर्क – हाईवे बना तस्करी का ट्रांजिट कॉरिडोर
मंडला-लखनादौन राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित टोल नाका के पास हुई यह कार्रवाई संकेत देती है कि यह मार्ग तस्करों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर बनता जा रहा है। इस रूट के जरिए उड़ीसा से मध्यप्रदेश और आगे अन्य राज्यों तक मादक पदार्थों की सप्लाई की आशंका जताई जा रही है।
मुखबिर तंत्र से मिली बड़ी सफलता
एनसीबी को मिली सटीक खुफिया सूचना के आधार पर ही यह कार्रवाई संभव हो सकी। घेराबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोकने के बाद तलाशी में बड़ी मात्रा में गांजा बरामद हुआ, जिसकी कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई गई है।
गिरफ्तार आरोपी सिर्फ ‘कैरीयर’ होने की आशंका
गिरफ्तार आरोपियों—रामबाबू रामेश्वर मीना (36) और इमरत रक्खसिंह मीना (46)—को लेकर जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि वे इस नेटवर्क के मुख्य सरगना हैं या केवल ‘कैरीयर’ के रूप में काम कर रहे थे। आमतौर पर ऐसे मामलों में बड़े गिरोह छोटे स्तर के लोगों को परिवहन के लिए इस्तेमाल करते हैं।
कहां से आ रहा, कहां जा रहा—पूरी चेन खंगालने में जुटी एजेंसियां
जांच का फोकस अब इस बात पर है कि गांजा किस स्रोत से लोड किया गया, बीच में किन-किन स्थानों से होकर गुजरा और अंतिम गंतव्य पर किसे सौंपा जाना था। मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और संपर्कों के आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। आगे की जांच में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की नजर: क्षेत्र में बढ़ रहा ड्रग ट्रैफिक
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य भारत का यह इलाका अब मादक पदार्थ तस्करी के लिए उभरता हुआ मार्ग बनता जा रहा है, जहां लगातार निगरानी और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।
इन्वेस्टिगेटिव एंगल – क्या संकेत मिलते हैं?
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छोटे वाहन – कम संदेह, ज्यादा मूवमेंट
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हाईवे रूट- तेज और आसान सप्लाई
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लोकल कैरीयर – नेटवर्क को सुरक्षित रखना
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इंटर-स्टेट लिंक – संगठित गिरोह की संभावना




