मध्यप्रदेश

मनरेगा में मध्यप्रदेश को 6,252 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन, ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बोले – “विकसित गांव” ही विकसित भारत की मजबूत नींव

ग्राम पंचायतों के जरिए होंगे विकास कार्य, मजदूरी भुगतान में नहीं आएगी बाधा

नई दिल्ली/भोपाल। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत वित्तीय वर्ष के लिए राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को अंतरिम आवंटन जारी किया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के साथ आयोजित महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन, रोजगार उपलब्धता और ग्रामीण विकास कार्यों को लेकर विस्तृत चर्चा की।

मनरेगा योजना के तहत मध्यप्रदेश को 6252 करोड़ रुपये का आवंटन करते केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान
नई दिल्ली में मनरेगा समीक्षा बैठक को संबोधित करते केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान।

बैठक में मध्यप्रदेश को 6,252.03 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन दिए जाने की घोषणा की गई। माना जा रहा है कि इस राशि से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना निर्माण, जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क, तालाब, सामुदायिक परिसंपत्तियों और कृषि आधारित कार्यों को नई गति मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने हेतु “विकसित गांव” बनाने का व्यापक अभियान है।

उन्होंने सभी राज्यों को निर्देश दिए कि कृषि के पीक सीजन को शीघ्र अधिसूचित किया जाए तथा मनरेगा हितग्राहियों का 100 प्रतिशत e-KYC सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जिला एवं ब्लॉक स्तर पर क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

बैठक में केंद्रीय मंत्री ने मिजोरम, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश द्वारा समय पर अधिसूचना जारी किए जाने की सराहना करते हुए अन्य राज्यों से भी त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 जुलाई तक मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने एवं मजदूरी भुगतान में किसी भी प्रकार की बाधा या कमी नहीं आनी चाहिए।

श्री चौहान ने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों का चयन ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता मिल सके। ग्राम स्तर से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर ही कार्यों को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जनभागीदारी को मजबूती मिलेगी।

बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कुल 95,692.31 करोड़ रुपये के अंतरिम आवंटन की घोषणा की गई। इसमें राज्यों को 92,550.17 करोड़ रुपये तथा केंद्र शासित प्रदेशों को 1,291.52 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त केंद्रीय प्रशासन एवं सोशल ऑडिट के लिए 1,850.62 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक 9,721.48 करोड़ रुपये का प्रावधान मिला है, जबकि पश्चिम बंगाल को 8,508 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 7,585.49 करोड़ रुपये और राजस्थान को 7,581.87 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मध्यप्रदेश को प्राप्त 6,252.03 करोड़ रुपये का आवंटन प्रदेश में ग्रामीण अधोसंरचना और रोजगार सृजन को मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों को 28 एवं 29 जून को नई दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में भाग लेने का आमंत्रण भी दिया। इस सम्मेलन में मनरेगा और ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत रणनीति पर चर्चा होगी।

श्री चौहान ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी राज्यों के सहयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह पहल ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा करोड़ों मजदूरों को स्थायी रोजगार, बेहतर जीवन और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर प्रदान करेगी।

https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2270775&reg=48&lang=2

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