कांग्रेस अपनी विफलताओं और आंतरिक षड्यंत्रों पर पर्दा डालने के लिए “नारी सम्मान” का सहारा ले रही : नीता पटेरिया
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होना महिला सम्मान नहीं, तथ्यों को छिपाने का मामला
नीता पटेरिया मीनाक्षी नटराजन बयान – पत्रकारों से चर्चा के दौरान पूर्व सांसद ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
Seoni 13 June 2026
सिवनी /छपारा यशो:- भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद श्रीमती नीता पटेरिया ने कांग्रेस द्वारा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मुद्दे को “नारी सम्मान” से जोड़ने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
उन्होंने कहा कि यह मामला किसी महिला सम्मान या महिला अधिकारों का नहीं, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने और कानूनी दायित्वों की अनदेखी का है।
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अपने गृह नगर छपारा में पत्रकारों से चर्चा करते हुए नीता पटेरिया ने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं, आंतरिक गुटबाजी और संगठनात्मक नाकामी पर पर्दा डालने के लिए इस पूरे मामले को “नारी सम्मान” का मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है।
महिला कार्यकर्ता की शिकायत पर कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर उठाए सवाल
नीता पटेरिया ने कहा कि कांग्रेस जिस विषय को महिला सम्मान बताकर प्रचारित कर रही है, उसकी वास्तविकता बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि यह मामला एक महिला कार्यकर्ता की शिकायत पर कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी, आरोपी नेताओं को संरक्षण देने और बाद में तथ्यों को छिपाने से जुड़ा हुआ है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना में कांग्रेस नेता कुंभम शिवकुमार रेड्डी पर एक महिला कार्यकर्ता ने शादी का झांसा देकर शोषण, ब्लैकमेल और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत दर्ज होने के बाद तत्कालीन तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे तथा उनका नाम भी अपराध पंजीयन में सामने आया।
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शपथ पत्र में जानकारी नहीं देने पर उठाए प्रश्न
पूर्व सांसद ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन स्वयं इस मामले में न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत कर चुकी हैं। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। इसके बावजूद नामांकन पत्र और शपथ पत्र में इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया, जो नामांकन निरस्त होने का प्रमुख कारण बना।
उन्होंने कहा कि यदि किसी न्यायालयीन प्रकरण की जानकारी होने के बावजूद उसे निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान छिपाया जाता है, तो यह गंभीर विषय है और निर्वाचन अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर हुआ है।
पीड़िता को नहीं मिला अपेक्षित सहयोग
नीता पटेरिया ने आरोप लगाया कि जब पीड़ित महिला कार्यकर्ता को संगठन और नेतृत्व के समर्थन की आवश्यकता थी, तब कांग्रेस नेतृत्व ने उसकी शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय आरोपी नेताओं को संरक्षण देने का कार्य किया।
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उन्होंने कहा कि पीड़िता ने कई बार कांग्रेस नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। एक प्रमुख समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में भी पीड़िता ने यह आरोप लगाया था कि यदि समय रहते उसकी शिकायत पर कार्रवाई की गई होती, तो उसे न्याय के लिए लंबा संघर्ष नहीं करना पड़ता।
कांग्रेस से पूछे कई सवाल
पूर्व सांसद नीता पटेरिया ने कांग्रेस से कई सवाल पूछते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि —
- नामांकन पत्र में तेलंगाना प्रकरण से जुड़ी जानकारी छिपाने का प्रयास क्यों किया गया?
- न्यायालयीन कार्यवाही और समन की जानकारी होने के बावजूद उसका उल्लेख शपथ पत्र में क्यों नहीं किया गया?
- महिला कार्यकर्ता की शिकायत को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया?
- आरोपी कांग्रेस नेता के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
“महिला सम्मान पर कांग्रेस का दोहरा चरित्र”
नीता पटेरिया ने कहा कि कांग्रेस को महिला सम्मान पर उपदेश देने से पहले अपने नेताओं और उनके बयानों का इतिहास देखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश सहित देशभर में कांग्रेस नेताओं द्वारा महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियों और असंवेदनशील व्यवहार के अनेक उदाहरण सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि महिला उत्पीड़न और शिकायतों की अनदेखी कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है और महिलाओं के सम्मान की रक्षा केवल नारों और राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि समय पर कार्रवाई और संवेदनशीलता से होती है।
भाजपा महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध
पूर्व सांसद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा का स्पष्ट मत है कि किसी भी महिला से जुड़े मामले में न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होना कांग्रेस द्वारा बताए जा रहे “नारी सम्मान” का मुद्दा नहीं, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया में आवश्यक तथ्यों के प्रकटीकरण से जुड़े प्रश्नों का परिणाम है। कांग्रेस को जनता को भ्रमित करने के बजाय इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।



