अरी-आष्टा मार्ग बना दलदल, राहगीरों की बढ़ी परेशानी
वर्षों से पक्की सड़क की मांग, बारिश में पैदल चलना भी मुश्किल; विधायक-सांसद पर क्षेत्रवासियों की उपेक्षा का आरोप
अरी-आष्टा मार्ग बना दलदल, 8-10 किमी अतिरिक्त घूमकर जाने को मजबूर ग्रामीण
Seoni, 03 September 2026
सिवनी / बरघाट यशो:- बरघाट विकासखंड की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत अरी से ताखला, सजनवाड़ा और पिपरिया होते हुए ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल आष्टा के काली मंदिर तक जाने वाला मार्ग इन दिनों बदहाल होकर दलदल में तब्दील हो गया है। बारिश के चलते मार्ग की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि राहगीरों का पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर गिर रहे हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
क्षेत्र के नागरिक लंबे समय से इस मार्ग को पक्का कराने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अथवा मुख्यमंत्री सड़क योजना के माध्यम से मार्ग का निर्माण कराया जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान हो सके। इसके बावजूद अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
कई गांवों के लोगों का प्रमुख आवागमन मार्ग
अरी से आष्टा जाने वाला यह मार्ग टिल्ली टोला, ताखला कला, निवारी, सजनवाड़ा, पिपरिया सहित आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग है। इसके अलावा आष्टा स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल मां काली मंदिर में दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार सिवनी से आष्टा जाने के लिए अरी होते हुए यह सीधा और सुगम मार्ग है, लेकिन लंबे समय से इसकी अनदेखी किए जाने के कारण अब बारिश के मौसम में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मजबूरी में 8 से 10 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर
मार्ग के दलदल में तब्दील होने के कारण राहगीरों को वैकल्पिक रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है। अरी से बोरी खुर्द, गंगेरूआ, धपारा और पनवास होते हुए आष्टा पहुंचने में लोगों को करीब 8 से 10 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। इससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।
चुनाव में आश्वासन, बाद में भूल जाते हैं जनप्रतिनिधि
क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक एवं जागरूक निवासी चिंतामन हरिनखेड़े ने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान क्षेत्र के लोगों को सड़क निर्माण सहित अन्य समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया जाता है। चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से जनप्रतिनिधियों को भारी मतों से विजयी बनाते आ रहे हैं, लेकिन सड़क की समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीण स्वयं को उपेक्षित और ठगा महसूस कर रहे हैं।
पक्की सड़क निर्माण की मांग
चिंतामन हरिनखेड़े ने विधायक कमल मर्सकोले, सांसद भारती पारधी एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. ढालसिंह बिसेन से मांग की है कि अरी से ताखला, सजनवाड़ा और पिपरिया होते हुए आष्टा तक के दलदलयुक्त मार्ग का शीघ्र निरीक्षण कराकर इसे पक्की सड़क में तब्दील कराया जाए। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों, विद्यार्थियों, किसानों और आष्टा आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।
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