क्राइममध्यप्रदेशसिवनी

धान खरीदी का काला खेल: रात के अंधेरे में बोरियों को नहलाकर बढ़ाया जा रहा वजन, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

समर्थन मूल्य के नाम पर किसानों और सरकारी खजाने की खुली लूट

स्व-सहायता समूह, सहकारी समितियां और अधिकारी संदेह के घेरे में

सिवनी यशो:- किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के नाम पर जिले में धान खरीदी एक संगठित लूट का अड्डा बनती जा रही है। खरीदी केंद्रों पर हर रोज ऐसे-ऐसे कारनामे सामने आ रहे हैं, जो न सिर्फ सरकारी धन की खुली बर्बादी हैं, बल्कि किसानों के हक पर सीधा डाका भी हैं। इस पूरे खेल में खरीदी से जुड़े विभाग, नोडल अधिकारी, सहकारी समितियां और स्व-सहायता समूहों की भूमिका गंभीर संदेह के घेरे में आ चुकी है।

धान खरीदी का काला सच : वजन बढ़ाने के लिए बोरियों में भरा जा रहा पानी

सूत्रों के अनुसार जिले के कई धान खरीदी केंद्रों पर रात के अंधेरे में धान की बोरियों में पानी डालकर वजन बढ़ाया जा रहा है। यह सारा खेल इतनी चालाकी से किया जाता है कि सिचाई के समय खरीदी केंद्र की पूरी लाइटिंग तक बंद कर दी जाती है, ताकि कोई देख न सके कि बोरियों को नहलाया जा रहा है।

ट्रक लगने से पहले होती है ‘सिचाई’, फिर माल रवाना

जानकारी के मुताबिक भंडारण केंद्रों के लिए ट्रक लोड होने से कुछ घंटे पहले ही मोटर लगाकर धान की बोरियों में पानी डाला जाता है। इसके बाद वही बोरियां ट्रकों में भरकर वेयरहाउस भेज दी जाती हैं।

यह भी चर्चा में है कि वेयरहाउस से जुड़े कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मौन सहमति के बिना यह गोरखधंधा संभव नहीं है।

वेयरहाउस में भी पकड़ा गया खेल, ट्रक लौटाए गए

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वेयरहाउस में जांच के दौरान ट्रकों के बीच वाले हिस्से में अत्यधिक गीली बोरियां पाई गईं।

तैनात सर्वेयर ने कई मामलों में धान को अमानक बताते हुए ट्रक वापस खरीदी केंद्र भेजे हैं, लेकिन इसके बावजूद यह खेल थमने का नाम नहीं ले रहा।

आष्टा खरीदी केंद्र का मामला : वीडियो-फोटो के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर धान उपार्जन का जिम्मा जिन महिला स्व-सहायता समूहों को दिया गया, वही अब सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहे हैं।

ऐसा ही गंभीर मामला आष्टा खरीदी केंद्र से सामने आया, जहां महिला स्व-सहायता समूह द्वारा रात के अंधेरे में खड़ी और सिली बोरियों में पानी डालते हुए वीडियो और फोटो बनाए गए।

गांव के जागरूक व्यक्ति ने तत्काल अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन समय पर कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

जांच में गीली बोरियां और 42 किलो तक भरी बोरी मिली

अगले दिन जब नायब तहसीलदार और कृषि विभाग की टीम ने जांच की, तो धान की बोरियां नीचे से गीली पाई गईं।

शिकायतकर्ता के अनुसार बोरियों की जांच करने पर उनका वजन मानक से बढ़कर 42 किलो तक पाया गया।

शिकायतकर्ता पर ही आरोप, कार्रवाई पर सवाल

हैरानी की बात यह रही कि इतनी गंभीर गड़बड़ी सामने आने के बावजूद खरीदी प्रभारी ने उल्टा शिकायतकर्ता पर ही झूठी शिकायत और ब्लैकमेलिंग का आरोप मढ़ दिया।

अब बड़ा सवाल यह है कि—

अगर शिकायत सही है तो अब तक बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

आखिर किसके संरक्षण में ऐसे स्व-सहायता समूहों को बचाने की कोशिश की जा रही है?

क्या जिले की संवेदनशील कलेक्टर शीतला पटले इस पूरे मामले में सख्त कदम उठाएंगी या फाइलें ही चलती रहेंगी?

अधिकारियों के बयान

एम.डी. परते (कृषि विभाग):

“हमारे द्वारा जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है। कार्रवाई करना विभाग का काम है।”

नायब तहसीलदार, बरघाट:

“जांच कर प्रतिवेदन एसडीएम को दे दिया गया है। कार्रवाई की जानी है।”

सुरेश सनखेरे (जिला प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति निगम, सिवनी):

“ऐसा कृत्य करने वाले समूह को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जा रही है।”

बड़ा सवाल

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी क्या किसानों के हित की योजना है या फिर कुछ लोगों के लिए रात के अंधेरे में वजन बढ़ाकर सरकारी धन लूटने का धंधा?

जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह काला सच यूं ही हर खरीदी सीजन में सामने आता रहेगा।

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!