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सीएए मानवीय दृष्टि से मोदी सरकार का श्रेष्ठ कदम – दिवाकर

सिवनी यशो:- देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून सीएए को लागू करने का जसे निर्णय लिया वह अभिनंदनीय एवं मानवीय कानून है जिसके माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के पीडि़त हिंदू एवं अल्पसंख्यक समुदाय को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करते हुए भारत की नागरिकता के उनके वर्षों के सपने को साकार करने की दिशा प्रशस्त होगी। नागरिकता संशोधन कानून एक मानवीय और भारत की महान संस्कृति का हिस्सा है जिसमें अपने पीडि़त जनों को सहारा देने का भाव समाहित है । इस कानून से देश के किसी भी व्यक्ति, समुदाय का अहित नहीं होगा बल्कि दुखित व्यक्ति जिनकी पीढिय़ाँ बंटवारे के दंश के कारण धार्मिक कट्टरता वाले देश का हिस्सा बन गयी और वहाँ लंबे समय से असहनीय यातनाएँ झेलते हुये भारत आकर शरणार्थी का जीवन जी रहे है और भारत माता के प्रति अपनी निष्ठा रख रहे है भारत का नागरिक बनने के लिये तैयार है ऐसे शरणाॢथयों को नागरिकता संशोधन कानून के तहत नागरिकता प्रदान करने प्रावधान है जो सरकार के मानवीय दृष्टि से बहुत ही स्वागत योग्य कानून है परंतु इस कानून का विपक्षी ताकते राजनैतिक लाभ के लिये गलत तरीके से प्रचार कर रही है जो निंदनीय तथा ओछी राजनीति का हिस्सा है । इस प्रकार की प्रतिक्रिया पूर्व विधायक और भाजपा नेता नरेश दिवाकार द्वारा प्रेस को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से व्यक्त की गयी है ।
श्री दिवाकर ने कहा कि सीएए नियमों के तहत ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन मांगे जाएंगे। इस प्रक्रिया का काम पूरा हो चुका है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियमों के तहत भारत के तीन मुस्लिम पड़ोसी देश, जिनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान शामिल हैं, से आए गैर मुस्लिम प्रवासी लोगों के लिए भारत की नागरिकता लेने के नियम आसान हो जाएंगे। इन छह समुदायों में हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी, शामिल हैं। नागरिकता संशोधन विधेयक 11 दिसंबर, 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था। एक दिन बाद ही इस विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति मिल गई थी। सीएए के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी।
मानवीय दुष्टि से सबसे श्रेष्ठ इस कानून के संबंध में देश की विपक्षी पार्टिया राजनैतिक लाभ के लिये भ्रम फैलाने का काम कर रही है । श्री दिवाकर ने कहा कि यह कानून नागरिकता देने के लिये है किसी की नागरिकता पर खतरा नहीं है परंतु कांग्रेस एवं वामपंथी विचारधारा के लोग इस कानून के संबंध में भ्रम की स्थिती निर्मित कर देश की जनता को भ्रमित कर डराने का काम कर रहे है । नागरिकता संशोधन कानून गांधीवादी विचारधारा और मानवीय दुष्टि से लिया गया राष्ट्रहित का अनुपम उदाहरण है । श्री दिवाकर ने कहा कि 1947 में धर्म के आधार पर भारत विभाजन हुआ था और उस समय यह तय हुआ था कि भारत में रह गये अल्पसंख्यको की चिंता पाकिस्तान करेगा और पाकस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई की चिंता भारत करेगा । भारत में रहने वाला अल्पसंख्यक भारत की संस्कृति में घुल मिल गया और हम सब प्रेम सदभाव से रहते है यहाँ के अल्पसंख्यको को वह सारे अधिकार है जो बहुसंख्यको को है परंतु पाकस्तान, अफगानिस्तान एवं बंगलादेश में रहने वाले अल्पसंख्यक अर्थाक हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई बेहद प्रताडि़त है और यह अपनी जान बचाकर भारत के शरणार्थी के रूप में रह रहे है इस कानूने के द्वारा इन्हीं शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है ।

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