कोर्ट के आदेश से लाखों शिक्षक भयभीत, सरकार से लगायी न्याय की गुहार
टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने भारतीय मजदूर संघ के प्रांताध्यक्ष संजय सिंह को सौंपा ज्ञापन
Court Order on TET
शिक्षकों की मुख्य मांगें
- टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए
- दो वर्ष में परीक्षा पास नहीं करने पर सेवा समाप्ति का प्रावधान हटाया जाए
- प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर करे
- कार्यरत शिक्षकों के हितों की रक्षा की जाए
Chhindwara 15 March 2026
छिंदवाड़ा यशो:- शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने से जुड़े Court Order on TET Teachers के बाद प्रदेश के लाखों शिक्षकों में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है। इस निर्णय के विरोध में शिक्षकों ने भारतीय मजदूर संघ के प्रांताध्यक्ष संजय सिंह को ज्ञापन सौंपकर सरकार से न्याय की गुहार लगाई।
ज्ञापन में बताया गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किए जाने संबंधी आदेश जारी किया गया है। इस Court Order on TET Teachers के कारण प्रदेश के लाखों कार्यरत शिक्षकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षकों का कहना है कि यदि दो वर्ष की अवधि में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाते हैं तो उन्हें शासकीय सेवा से हटाए जाने की स्थिति बन सकती है। इस निर्णय से मध्यप्रदेश के लगभग तीन लाख अध्यापक प्रभावित हो सकते हैं।
इस दौरान मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष रमेश शर्मा तथा जिला सचिव अरविंद भट्ट सहित उपस्थित शिक्षकों ने निवेदन किया कि भारतीय मजदूर संघ के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को अध्यापक संवर्ग की पीड़ा से अवगत कराया जाए।
शिक्षकों ने मांग की कि मध्यप्रदेश सरकार इस Court Order on TET Teachers के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पिटिशन दायर करे, ताकि इस निर्णय पर पुनर्विचार हो सके और शिक्षकों को राहत मिल सके।





