बिना ले-आउट स्वीकृति और विकास अनुमति के प्लॉट बेचने की शिकायतों पर तहसीलदार ने चार प्रतिवेदन एसडीएम को भेजे, एक की रिपोर्ट बाकी
Seoni, 25 October 2026
सिवनी यशो:- सिवनी नगर तहसील के ग्राम डोरली छतरपुर में कथित अवैध कॉलोनियां विकसित कर छोटे-छोटे भूखंड बेचने का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के अगले चरण में पहुंच गया है। इस मामले में पांच भूमिस्वामियों के विरुद्ध शिकायतों की जांच की गई है।
तहसीलदार सिवनी, भाग-2 द्वारा चार मामलों में जांच प्रतिवेदन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिवनी को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि एक अन्य मामले का प्रतिवेदन भेजा जाना शेष बताया गया है।
अब संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई एसडीएम स्तर से की जानी है। नियमानुसार कार्रवाई के तहत संबंधित लोगों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
सात खसरों में भूखंड बेचने की शिकायत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरटीआई कार्यकर्ता एवं पत्रकार राजेंद्र गुप्ता ‘तक्षक’ ने कुछ माह पूर्व तहसीलदार सिवनी के समक्ष अलग-अलग सात शिकायतें प्रस्तुत की थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि ग्राम डोरली छतरपुर स्थित विभिन्न खसरा नंबरों की भूमि पर सक्षम प्राधिकारी से ले-आउट स्वीकृत कराए बिना और आवश्यक विकास अनुमति प्राप्त किए बिना छोटे-छोटे आवासीय भूखंड काटकर बेचे गए।
शिकायत में मुस्तफा पिता असदु खान की भूमि के खसरा नंबर
23/1/1/1/2//1/1 में 0.1670 हेक्टेयर, खसरा नंबर 27/1/1/1/2 में 0.060 हेक्टेयर तथा खसरा नंबर 27/4/1/2/1/1 में 0.144 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख किया गया है।
इसी प्रकार अहसान खान पिता हफीज खान के नाम दर्ज खसरा नंबर 23/1/1/1/2/2 की 0.370 हेक्टेयर, मोहन पिता सूरज प्रसाद लांजेवार के नाम दर्ज खसरा नंबर 23/1/1/1/1 की 0.200 हेक्टेयर, आरिफ पिता वाहिद खान के नाम दर्ज खसरा नंबर 23/1/1/1/2/1 की 0.240 हेक्टेयर तथा नंदलाल पिता लक्ष्मीनारायण गहलोद के नाम दर्ज खसरा नंबर 23/2/2/2 की 0.310 हेक्टेयर भूमि पर भी नियमों के विपरीत भूखंड काटकर बेचे जाने के आरोप लगाए गए।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ भूखंड खरीदने वाले कुछ लोगों के नामांतरण आदेशों की प्रतियां भी संलग्न की थीं। शिकायत में कहा गया कि संबंधित भूखंडों की रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा कुछ स्थानों पर मकान भी निर्मित हो गए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने और प्रतिवेदन एसडीएम को भेजने का अनुरोध किया था।
नोटिस के बावजूद उपस्थित नहीं हुए संबंधित भूमिस्वामी
शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए तहसीलदार द्वारा संबंधित पांचों अनावेदकों को समन जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने की जानकारी है। प्रस्तुत विवरण के अनुसार, सुनवाई के दौरान संबंधित लोग उपस्थित नहीं हुए।
इसके बाद ग्राम डोरली छतरपुर के हल्का पटवारी से शिकायतों में उल्लेखित तथ्यों की जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन में आरोपों और संबंधित तथ्यों की पुष्टि होने की बात सामने आई। इसके आधार पर तहसीलदार द्वारा चार मामलों के प्रतिवेदन सक्षम स्तर पर आगे की कार्रवाई के लिए एसडीएम सिवनी को अग्रेषित किए गए।
हालांकि, मुस्तफा खान से संबंधित एक मामले में जांच प्रतिवेदन पर आपत्ति दर्ज कर पुनः जांच की मांग की गई थी। बताया गया है कि तहसीलदार ने हल्का पटवारी को तीन दिन के भीतर दोबारा जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिखित निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता के उपलब्ध विवरण के अनुसार, करीब डेढ़ माह बाद भी पुनः जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया था।
इस प्रकार, मामले में चार प्रतिवेदनों के आगे भेजे जाने और एक प्रकरण की पुनः जांच से संबंधित स्थिति स्पष्ट होना शेष है।
एफआईआर से लेकर जुर्माने तक हो सकती है कार्रवाई
अवैध कॉलोनी विकास और भूखंडों की बिक्री में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध लागू कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है। शिकायत में मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत राज अधिनियम, 1999 तथा ग्राम पंचायत कॉलोनी विकास नियम, 2014 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
सूत्रों के अनुसार, प्रकरणों की समीक्षा के बाद संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जा सकती है। दोष सिद्ध होने पर संबंधित प्रावधानों के अनुसार दंड, जुर्माना और अन्य वैधानिक कार्रवाई संभव है। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने, अपराध की धाराओं और संभावित सजा के संबंध में अंतिम स्थिति सक्षम प्राधिकारी के आदेश तथा लागू कानूनी प्रावधानों से ही स्पष्ट होगी।
अवैध कॉलोनी विकास के मामलों में यदि संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका अथवा लापरवाही सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है। इस संबंध में किसी अधिकारी की दोषसिद्धि या मिलीभगत को लेकर निष्कर्ष जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही निकाला जा सकता है।
भूखंड खरीदने वालों की बढ़ सकती है परेशानी
इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू उन लोगों से जुड़ा है, जिन्होंने इन कॉलोनियों में भूखंड खरीदकर मकान बना लिए हैं या निर्माण की तैयारी कर रहे हैं। यदि कॉलोनी विकास में जरूरी अनुमति और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ है, तो संबंधित भूखंडों और निर्माण कार्यों की वैधानिक स्थिति पर सवाल उठ सकते हैं।
ऐसे मामलों में खरीदारों को नामांतरण या रजिस्ट्री हो जाने मात्र से कॉलोनी की सभी विकास संबंधी अनुमतियां प्राप्त होने की गारंटी नहीं मिलती। सड़क, नाली, जलापूर्ति, विद्युत व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास में भी नियमानुसार बाधाएं आ सकती हैं।
हालांकि, संबंधित भूखंडों पर बने सभी मकानों को स्वतः अवैध घोषित करना या प्रत्येक खरीदार को सुविधाओं से वंचित होना तय मानना उचित नहीं होगा। प्रत्येक मामले में भूमि की स्थिति, स्वीकृतियों, निर्माण की वैधानिकता और संबंधित आदेशों के आधार पर निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
अन्य जिलों में भी शिकायतों और एफआईआर की जानकारी
प्राप्त जानकारी में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित कारोबार से जुड़े कुछ लोगों के विरुद्ध सिवनी जिले सहित पड़ोसी जिलों के विभिन्न थानों में पहले भी प्रकरण दर्ज हुए हैं। मुस्तफा खान के विरुद्ध कान्हीवाड़ा, पलारी, डूंडासिवनी और नैनपुर में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी का उल्लेख किया गया है। इन प्रकरणों की वर्तमान स्थिति और उनमें दर्ज आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ लोग दूसरे व्यक्तियों के नाम पर अथवा परिचितों की आड़ में कॉलोनी विकास का काम कर रहे हैं। इनमें एक कर्मचारी और एक रिश्तेदार के नाम का कथित इस्तेमाल किए जाने की बात भी कही गई है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच से होना बाकी है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
डोरली छतरपुर में अवैध कॉलोनी विकास से संबंधित शिकायतों पर तहसील स्तर से प्रतिवेदन आगे भेजे जाने के बाद अब एसडीएम सिवनी की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर भूखंड बेचने के आरोपों का सामना कर रहे भूमिस्वामियों की स्थिति पर निगाहें हैं, तो दूसरी ओर भूखंड खरीदकर मकान बना चुके लोगों के हित भी इस मामले से जुड़े हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन जांच प्रतिवेदनों के आधार पर क्या निर्णय लेता है, किन मामलों में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की कार्रवाई होती है और संबंधित भूमि एवं भूखंडों की वैधानिक स्थिति को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।