18 साल बाद फिर गूंजी ‘सिवनी लोकसभा वापस दो’ की मांग, परिसीमन की आहट से जिले में बढ़ी सियासी हलचल
सोशल मीडिया से सड़कों तक उठने लगी मांग फिर जागी लोकसभा सीट की उम्मीद; नेताओं पर बढ़ा जनदबाव
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परिसीमन की दस्तक, सिवनी में फिर जागी लोकसभा सीट की उम्मीद; नेताओं पर बढ़ा जनदबाव
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18 साल बाद फिर उठी सिवनी लोकसभा सीट की मांग, राजनीतिक दलों से लेकर आमजन तक बढ़ी सक्रियता
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परिसीमन की संभावना ने बदला सिवनी का सियासी माहौल, ‘लोकसभा बहाल करो’ अभियान ने पकड़ी रफ्तार
Seoni, 18 July 2026
सिवनी यशो:- देश में प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुई बहस के बीच सिवनी में वर्षों से शांत पड़ा एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा फिर जीवंत होता दिखाई दे रहा है। जिले की समाप्त हो चुकी लोकसभा सीट को पुनः बहाल करने की मांग अब केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सोशल मीडिया, राजनीतिक मंचों और जनभावनाओं के रूप में तेजी से उभरने लगी है। जिले में राजनीतिक कार्यकर्ता, सामाजिक संगठन और जागरूक नागरिक इस मुद्दे को लेकर पहले से अधिक सक्रिय नजर आ रहे हैं।
2008 में खत्म हुआ था सिवनी लोकसभा क्षेत्र
सिवनी लोकसभा क्षेत्र का अस्तित्व वर्ष 2008 में लागू हुए परिसीमन के बाद समाप्त हो गया था। भारत में अंतिम परिसीमन आयोग का गठन वर्ष 2002 में हुआ था, जिसकी सिफारिशें वर्ष 2008 में लागू की गई थीं।
परिसीमन से पहले सिवनी लोकसभा क्षेत्र में जिले की चार विधानसभा सीटें—
- सिवनी
- बरघाट
- केवलारी
- लखनादौन
के साथ गोटेगांव, पाटन, मझौली और बरगी विधानसभा क्षेत्र शामिल थे। वहीं घंसौर विधानसभा मंडला लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा थी, जो बाद में विधानसभा परिसीमन में ही समाप्त हो गई।
अंतिम समय तक थी उम्मीद, लेकिन आखिरी सूची में हो गया विलोपन
अंतिम समय में बदला गया था पूरा चुनावी नक्शा
राजनीतिक जानकारों के अनुसार वर्ष 2008 के परिसीमन के दौरान अंतिम चरण तक सिवनी लोकसभा क्षेत्र के अस्तित्व में बने रहने की चर्चा थी, लेकिन अंतिम अधिसूचना जारी होते ही पूरा चुनावी समीकरण बदल गया। सिवनी लोकसभा क्षेत्र का विलोपन कर दिया गया और जिले की चारों विधानसभा सीटों को दो अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों में बांट दिया गया। सिवनी और बरघाट विधानसभा को बालाघाट लोकसभा क्षेत्र में शामिल कर दिया गया, जबकि केवलारी और लखनादौन विधानसभा को मंडला लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा बना दिया गया। इस निर्णय के बाद जिले की अपनी स्वतंत्र लोकसभा पहचान समाप्त हो गई, जिससे व्यापक जनाक्रोश देखने को मिला। उस समय सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष किया, लेकिन इसके बावजूद सिवनी लोकसभा क्षेत्र को पुनः बचाया नहीं जा सका।
अब फिर जागी उम्मीद, बढ़ने लगी राजनीतिक सक्रियता
अब जबकि देश में नए परिसीमन की संभावनाएं तेज हुई हैं, सिवनी लोकसभा क्षेत्र की पुनर्बहाली की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है।
जिले में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, पूर्व जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और युवा वर्ग सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार अभियान चला रहे हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘सिवनी लोकसभा वापस दो’ जैसे संदेश तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में भी इस विषय पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कार्यकर्ता अपने-अपने दलों के सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की मांग कर रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों पर बढ़ रहा नैतिक दबाव
परिसीमन की संभावनाओं के बीच जिले के नागरिकों का मानना है कि यदि इस बार सिवनी अपनी बात मजबूती से नहीं रख पाया तो भविष्य में अवसर सीमित हो सकते हैं। यही कारण है कि जनभावनाओं को देखते हुए जनप्रतिनिधियों पर भी इस विषय में सक्रिय भूमिका निभाने का नैतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस बार जनता केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस पहल देखना चाहती है।
दो नई विधानसभा सीटों की संभावना से मजबूत हुई उम्मीद
हालांकि अभी परिसीमन का अंतिम प्रारूप सामने नहीं आया है और न ही यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में लोकसभा एवं विधानसभा सीटों की संख्या कितनी बढ़ेगी, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि सिवनी जिले में दो नई विधानसभा सीटें बनने की संभावना है।
यदि ऐसा होता है तो संसदीय क्षेत्रों के पुनर्गठन के दौरान सिवनी लोकसभा क्षेत्र को पुनः अस्तित्व में लाने की संभावना पहले की तुलना में अधिक मजबूत मानी जा रही है।
मानसून सत्र पर टिकी निगाहें
राजनीतिक कार्यकर्ताओं की निगाहें अब संसद के मानसून सत्र पर टिकी हैं। यदि इस दौरान परिसीमन से जुड़ा विधेयक आगे बढ़ता है या संसद में कोई ठोस पहल होती है, तो सिवनी में यह मांग और अधिक संगठित रूप ले सकती है।
सूत्रों के अनुसार विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारी संगठनों, युवाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच इस विषय पर बैठकों और रणनीति बनाने का दौर भी शुरू हो गया है। आने वाले समय में ज्ञापन, हस्ताक्षर अभियान, जनजागरण और सर्वदलीय पहल जैसी गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं।
अब केवल भावनाएं नहीं, संगठित जनअभियान की तैयारी
जिले में बन रहे माहौल से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि सिवनी लोकसभा की बहाली की मांग अब केवल अतीत की स्मृतियों तक सीमित नहीं है। इसे लेकर जनमत तैयार करने का प्रयास तेज हो रहा है। नागरिक चाहते हैं कि सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर जिले के हित में आवाज बुलंद करें।
यदि परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो सिवनी लोकसभा की पुनर्स्थापना जिले का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है, और आने वाले महीनों में इसकी गूंज सोशल मीडिया से निकलकर जनआंदोलन का स्वरूप भी ले सकती है।
महत्वपूर्ण तथ्य: वर्तमान में सिवनी लोकसभा क्षेत्र की बहाली को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय या प्रस्ताव जारी नहीं हुआ है। यह मांग संभावित परिसीमन प्रक्रिया और उससे जुड़ी चर्चाओं के आधार पर उठ रही है। अंतिम निर्णय परिसीमन आयोग, संसद और संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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