सिवनी जिले में गहराया डीजल-पेट्रोल संकट, ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी प्रभावित
रसोई गैस सप्लाई पर भी असर, घंटों कतारों में खड़े रहने को मजबूर ग्रामीण
सिवनी डीजल पेट्रोल संकट गहराया, ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और रसोई गैस सप्लाई प्रभावित
Seoni, 14 June 2026
सिवनी यशो:- जिले में डीजल और पेट्रोल की बढ़ती किल्लत अब गंभीर समस्या का रूप लेती जा रही है। जिला मुख्यालय को छोड़कर अधिकांश ग्रामीण एवं ब्लॉक क्षेत्रों में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। हालात ऐसे हैं कि कई पेट्रोल पंपों पर “डीजल-पेट्रोल उपलब्ध नहीं” के बोर्ड लगे दिखाई दे रहे हैं, जबकि कई पंप समय-समय पर बंद भी हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी व्यक्ति को 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिया जाएगा।
ईंधन संकट का सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों और खेती-किसानी पर दिखाई दे रहा है। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ किसान जुताई, बखरनी और बोनी जैसे कृषि कार्यों में जुटे हैं, लेकिन ट्रैक्टरों के लिए पर्याप्त डीजल नहीं मिलने से कृषि कार्य बाधित हो रहे हैं।
पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, ग्रामीण परेशान
ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर सुबह से देर रात तक वाहनों और किसानों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। किसान छोटे-बड़े डिब्बे और केन लेकर डीजल के इंतजार में घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर दोपहिया वाहन चालकों को मात्र 100 रुपये तक का पेट्रोल ही दिया जा रहा है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि कई पंपों पर अचानक सप्लाई बंद हो जाती है, जिससे लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी उन ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही है, जहां परिवहन और कृषि दोनों का प्रमुख आधार डीजल है।
जिला मुख्यालय छोड़ ग्रामीण इलाकों में अधिक संकट
जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय सिवनी में स्थिति कुछ हद तक सामान्य बनी हुई है, लेकिन उगली, छपारा, मोहबर्रा, ढुटेरा और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित है।
उगली क्षेत्र में संचालित चार प्रमुख पेट्रोल पंपों पर भारी दबाव बना हुआ है। छपारा के निकट गीता फ्यूल्स, ढुटेरा स्थित पेट्रोल पंप तथा मोहबर्रा के बिसेन पेट्रोलियम और गौरव पेट्रोलियम के माध्यम से पूरे क्षेत्र में ईंधन आपूर्ति की जा रही है, लेकिन मांग की तुलना में सप्लाई कम होने से हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
खेती-किसानी पर सीधा असर
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय खेती की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मानसून पूर्व खेतों की तैयारी के लिए ट्रैक्टरों का लगातार उपयोग हो रहा है, लेकिन डीजल की कमी के कारण किसान समय पर जुताई और बोनी नहीं कर पा रहे हैं।
कई किसानों ने बताया कि ट्रैक्टर लेकर घंटों पेट्रोल पंपों पर खड़ा रहना पड़ रहा है, इसके बावजूद पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा। इससे कृषि कार्यों की लागत भी बढ़ रही है और किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
रसोई गैस सप्लाई भी प्रभावित
ईंधन संकट का असर अब घरेलू रसोई गैस सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कई गांवों में गैस एजेंसियों की गाड़ियां निर्धारित समय पर नहीं पहुंच रहीं, जिससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि गैस सिलेंडर बुक कराने के बाद भी कई दिनों तक डिलीवरी नहीं मिल रही। कुछ स्थानों पर उपभोक्ताओं को स्वयं एजेंसी तक पहुंचकर सिलेंडर लाना पड़ रहा है। इससे आमजन की चिंता और बढ़ गई है।
पेट्रोल पंप संचालकों ने बताई सप्लाई की समस्या
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि उन्हें ऊपर से पर्याप्त मात्रा में डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बीते लगभग एक महीने से अनियमित सप्लाई के कारण अल्टरनेट डे के आधार पर ईंधन वितरण करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में सुरक्षा और नियंत्रण के मद्देनजर गैलन एवं डिब्बों में डीजल-पेट्रोल देने पर प्रतिबंध लगाया गया है तथा केवल वाहनों में ही ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है।
बढ़ती महंगाई ने बढ़ाई चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि डीजल-पेट्रोल संकट के साथ खाद और बीज की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है।
प्रशासन से नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग
ग्रामीणों, किसानों और वाहन चालकों ने प्रशासन से जिले में डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की नियमित एवं पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द हालात सामान्य नहीं हुए तो खेती-किसानी के साथ दैनिक जीवन भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।



