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एकलव्य स्कूल में सरकारी फंड का दुरुपयोग — बच्चों के हक की राशि में गड़बड़ी, जांच के बाद भी कार्रवाई ठप

Seoni 01 November 2025
सिवनी/घंसौर यशो:- घंसौर के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में सरकारी फंड के दुरुपयोग, और वित्तीय अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। विद्यालय में हुई गड़बड़ियों को लेकर पूर्व में तीन सदस्यीय टीम जांच कर चुकी है, जिसमें कई खामियाँ उजागर हुईं थीं। इसके बावजूद आज तक जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब एक बार फिर से कलेक्टर श्रीमती शीतला पटले को मंगलवार को नई शिकायत सौंपी गई है, जिसमें विद्यालय प्रबंधन पर मनमानी और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं।

🔹 पूर्व जांच में उजागर हुई थी गड़बड़ी

जानकारी के अनुसार, इस विद्यालय में हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच जनजातीय कार्य विभाग के निर्देश पर की गई थी। जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि सामग्री खरीदी और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ की गईं।

प्राचार्य द्वारा कुछ देयक (वाउचर) पारित न किए जाने के बावजूद भुगतान कर दिए गए।

इस आधार पर प्राचार्य सहित तीन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी,

लेकिन आज तक आदेश जारी नहीं हुए।

🔹 10 लाख की यूनिफार्म खरीदी में बड़ा घोटाला

वाउचर क्रमांक 168 में करीब ₹10 लाख की गड़बड़ी पाई गई। कान्हीवाड़ा के राज एंड संस को जेम पोर्टल के माध्यम से यूनिफार्म की सप्लाई का आदेश दिया गया।
जांच में पाया गया कि यूनिफार्म का विवरण अपूर्ण था, और भुगतान “शर्ट प्री-स्कूल यूनिफार्म (5-6 वर्ष)” के नाम पर किया गया, जबकि संस्था में 5 से 6 वर्ष के बच्चे अध्ययनरत ही नहीं हैं। इस पर भी संदेह जताया गया कि बिल फर्जी बनाए गए।

🔹 भ्रमण व ठेके में भी मिली गड़बड़ी

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि छब्बीलाल साहू टूर एंड ट्रेवल्स को भ्रमण के नाम पर ₹1.23 लाख का भुगतान किया गया, लेकिन वाहन क्रमांक, यात्रा दूरी और अनुमति विवरण कहीं दर्ज नहीं है।
इसी प्रकार फर्नीचर, वाटर कूलर और फ्रिज जैसी खरीदी में भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया। पुस्तकों की खरीदी में भी अनियमितता के प्रमाण मिले हैं।

🔹 शिकायत में नए बिंदु भी शामिल

नई शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि—

बिना टेंडर के करीब ₹18 लाख की खरीदी की गई है।

विभिन्न मदों की राशि को अन्य मदों में खर्च किया गया।

छात्र भ्रमण व प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग के लिए आवंटित राशि का दुरुपयोग किया गया।

मेस संचालन करने वाले ठेकेदार को मनमाना भुगतान किया गया।

जेईई और नीट की कोचिंग सुविधा छात्रों को नहीं मिल रही।

विद्यालय में अनावश्यक सीसीटीवी कैमरे खरीदे गए, जिनकी कोई आवश्यकता नहीं थी।

🔹 छात्रों के अधिकारों पर असर

इन वित्तीय अनियमितताओं के चलते विद्यालय के छात्र न तो निर्धारित भ्रमण पर जा पाए,

न ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सुविधा मिली।

यूनिफार्म वितरण भी अधूरा बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि-

“यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि बच्चों के हक पर चोट है।”

🔹 प्रशासनिक कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
कलेक्टर शीतला पटले को दी गई शिकायत में लिखा गया है कि “पूर्व जांच के निष्कर्षों को दबाया जा रहा है और स्कूल प्रबंधन को बचाने की कोशिश हो रही है।”
इस मामले में जिला प्रशासन ने कहा है कि शिकायत प्राप्त हुई है और जांच की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी।

🔹 सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

स्थानीय सामाजिक संगठनों ने इसे आदिवासी विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मामला बताया है।
उनका कहना है कि “यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।”

🔸 निष्कर्ष

जनजातीय कार्य विभाग के अधीन संचालित यह विद्यालय एक बार फिर चर्चाओं में है। शिक्षा व छात्र कल्याण के लिए जारी सरकारी फंड का दुरुपयोग अगर साबित हुआ, तो यह जिले में शिक्षा तंत्र की साख पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।

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