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नर्मदा परिक्रमा : अरब सागर की ओर भूल भुलाईयों वाले रास्ते से रोमांचक यात्रा

भाग 14 : कपिल पांडे की आध्यात्मिक यात्रा की अगली कड़ी

कपिल पांडे की यात्रा-वृत्तांत पर आधारित
स्थान: रायसिंगपुर से अरब सागर की ओर

रायसिंगपुर से अरब सागर की ओर

यात्रा के 10 दिन रायसिंग पुर के पहले हाईवे के पांच किलोमीटर अंदर एक हनुमान मन्दिर में आनंददायक रात्रिविश्राम हुआ यहाँ सुबह सूरज की लालिमा बहुत ही सुहावनी थीं, भगवान सूर्य नारायण को नमस्कार किया और आशीर्वाद प्राप्त किया । स्थानीय जनों से चर्चा कर पर्यावरण से संबंधित चर्चा की और उन्हें सिवनी एकत्रित कुछ पौधो के बीज दिये अनेक विषयों पर चर्चा की उन्होंने बताया कि यहाँ से अरब सागर अब लगभग 100 किलोमीटर बचा था । समुद्री बतावरण होने के कारण ठण्ड थोड़ी कम थीं हमने स्नान किया और मन्दिर की प्रात: आरती में शामिल हो गए उसके बाद अपना बोरिया बिस्तर बांधा और आगे की ओर निकल पड़े । आगे जाने की एक अलग ख़ुशी थीं समुन्दर पार करने का विशेष क्षण आने वाला था ।

दुखियारी सुखी बहन के चेहरे पर मुस्कान

हमें हाइवे के रास्ते ही जाना था क्योकि माँ नर्मदा के किनारे के रास्तो में भूल भुलइयाँ थीं तो एक स्थानीय सज्जन ने मार्गदर्शन किया अब हमने हाइवे मार्ग पकड़ लिया जो अरब सागर की ओर जाता है
हाइवे के रास्ते आगे बढ़ते रहे तभी एक गांव में चेतन भाई ने चाय नास्ता कराया उनसे मिलकर आगे बढे हाइवे का रास्ता सरल था आगे रोड पर एक माता जी केले और अन्य फल की दुकान में बैठी दिखाई दी पूछने पर पता चला उनका इस दुनिया में कोई नहीं है उनका नाम सुखी बहन था, लेकिन नाम के उलट था उनके चेहरे की मुस्कान उनका दुख जाहिर नहीं होने दे रहा था हमने उनसे केले लिए यहाँ केले किलो के भाव मिले और आगे की और निकल गए ।

यहां है कुष्ट रोगियों का उपचार

हमारा अगला पड़ाव था अंकलेश्वर लोक मान्यता के अनुसार भगवान राम माता सीता लक्ष्मण जी ने वनवास के लिए दक्षिण का रास्ता अपनाया तब इस स्थान पर विश्राम भी किया था इस स्थान पर भगवान राम के साक्ष्य भी राम कुंड के रूप में मिलता है मान्यता है राम कुंड में स्नान करने मात्र से कुष्ट रोगों से मुक्ति मिलती है । यह जानकारी महत्वपूर्ण थी जिसका उल्लेख इस प्रकार के रोगियों के लिये लाभदायक है ।

मदद के लिये आ जाती है चमत्कारी शक्तियाँ

अब हम अंकलेश्वर पहुंच चुके तभी एक व्यक्ति हमें दिखाई दिए हम उनसे राम कुंड का पता पूछने लगे तो वो हमसे अभद्रता करने लगे थोड़ी देर तक हमें समझ नहीं आया इनका क्या करें दूसरा शहर है हम कुछ देर चुप ही रहे तभी एक स्थानीय गुजरती भाई जिनका नाम चेतन था ने उस की सारी अकड़ उतार उसकी पिटाई कर दी वो भागने को मजबूर हो गया उन गुजरती भाई को हमने धन्यवाद दिया आज़ की यात्रा में एक ही नाम के दो व्यक्ति मदद करने खड़े रहे । अब हम वहां से आगे बढ़ गए मन में विचार चलता रहा कैसे माँ हर मोड़ हर खतरे पर मदद को खड़ी रहती है पूरी नर्मदा परिक्रमा में ये ऐसा एक ही बार हुआ था शायद इसमें भी कोई रहस्य छुपा हो ।

किसी को मना भी नहीं करना और इकठ्ठा भी नहीं करना

रास्ता पूछते हुए हम रामकुण्ड पहुंच गए । वहां भगवान के दर्शन किये भोजन पाया कुछ देर विश्राम किया और आगे समुद्र की और निकल गए रास्ते बहुत छोटे थे रास्ते भर स्थानीय लोग सेवा में लगे थे सीख मिली थीं कोई कुछ दे तो मना नहीं करना हमारे बैग में अब इतनी सामग्री एकत्रित हो गयी थीं के रखने को जगह न बची थीं अब मिलने वाले सामान को आश्रमो में छोड़ते चले गए सीख मिली कुछ इकठ्ठा नहीं करना है और आगे बढ़ते गए रास्ते भर कोई चाय पिलाता कोई कुछ खिलाने खड़ा रहता अब ये भी ज्यादा लगने लगा लेकिन मना करना ठीक नहीं था लोग मिलते गए हम आगे बढ़ते गए ।

नर्मदे हर बोलते ही उबलने लगता है पानी

आगे आया बलबला कुंड ये कुंड अपने अलग ही अंदाज के लिए प्रसिद्ध है कुंड के पानी में हमेशा बुलबुले निकलते रहते है जितनी तेज आप नर्मदे हर बोलते है उतनी शक्ति के साथ बुलबुले उठते है देखने पर लगता है पानी उबल रहा है लेकिन एक दम ठंडा ये ऋषि कश्यप की तपोस्थली यहाँ एक भगवान शिव का बहुत भव्य प्राचीन मन्दिर है यहाँ आकर माँ नर्मदा परिक्रमा का एक चरण पूरा माना जाता है । अभी 3 चरण और बाकी थे ।

बाजरे के टिक्कड़ प्रेम पूर्वक खिलाते मिले मूंछो वाले

दर्शन कर हम यहाँ से आगे बढ़ गए सड़को का निर्माण कार्य चल रहा था सोमनाथ से आये कुछ बड़ी बड़ी मूछों वाले लोग पंडाल लगाकर परिक्रमा वासियो को रुकने का आग्रह कर रहे थे एक किनारे उनके साथी बाजरे की टिक्कड़ बना रहे थे उनके प्रेम भाव को देखकर हमरा मन यही रुकने का हुआ लेकिन हमें हनुमान गढ़ी तक पहुंचना था वही से समुद्र मार्ग से जाने के लिए रजिस्ट्रेशन होता है अभी समय बाकी था तो हम वहां से चाय पीकर निकल गए कुछ ही देर में हम हनुमान गढ़ी पहुंच गए ।

यहाँ मिले हमारे शहर के लोग

यहाँ से अरब सागर मात्र 15 किलोमीटर शेष रह गया था आश्रम बहुत ही विशाल था गांव के सरपंच राजू भाई ने यहाँ हमारी बहुत सेवा की शाम की पूजन कर खिचड़ी और कढ़ी का प्रसाद मिला सोने के लिए हमें बहुत ही सुन्दर कुटिया प्राप्त हुई वहां कुछ बस से परिक्रमा कर रहे यात्री मिले जो सिवनी के थे उनसे आत्मीय भेट हुई कुछ देर उनके साथ सत्संग हुआ और फिर हम विश्राम के लिए चले गये ।
नर्मदे हर
कल आगे की यात्रा नव के द्वारा समुद्र पार करना एक बहुत ही अविष्मरणीय अनुभव बने रहिये

Dainikyashonnati

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