Table of Contents
Toggle🔱 सिवनी की धरती पर सिद्धों की महाराधना
श्री 1008 सिद्ध चक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन
विश्व शांति की कामना से आयोजित विधान के पुण्यार्जक बने बाझल परिवार
Seoni 07 January 2026
सिवनी यशो:- इसी क्रम में यह कहा जा सकता है कि सौभाग्यशाली होते हैं वे परिवार,
जो अपने संचित द्रव्य का एक भाग अपने आराध्य की महाराधना के निमित्त समर्पित कर
समारोहपूर्वक धार्मिक महोत्सव आयोजित करते हैं।
इसके अलावा, ऐसे आयोजन समाज को धर्म, संयम और संस्कारों से जोड़ने का कार्य भी करते हैं।
वहीं, सिवनी जैन समाज के सवाई सिंघई बाझल परिवार ने ऐसा ही प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
दरअसल, परिवार के सदस्य श्री विवेक बाझल ने अपनी जन्मदात्री माता
श्रीमती सूरज देवी बाझल की प्रेरणा से
श्री 1008 सिद्ध चक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन कर जिनेन्द्र प्रभु की महार्चना का अनुपम इतिहास रच दिया।

🔱 सिद्ध चक्र का पौराणिक इतिहास
वहीं दूसरी ओर, प्रथमानुयोग के पुराणों में वर्णित इस विधान के अनुसार
लाखों वर्ष पूर्व एक राजा ने षड्यंत्रपूर्वक अपनी पुत्री
राजकुमारी मैना सुंदरी का विवाह
कुष्ट रोग से पीड़ित श्रीपाल से कर दिया।
ऐसी विकट परिस्थिति में भी, सती मैना ने इसे अपना भाग्य मानते हुए
अपने पति एवं सात सौ कुष्ट रोगियों के साथ तीर्थ यात्रा कर
इसी दौरान श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का आयोजन किया।
फलस्वरूप, जिनेन्द्र प्रभु के अभिषेक के गंधोदक के सिंचन मात्र से
सभी रोगी सर्वांग सुंदर हो गए।
अतः, यह महापूजन आज भी संकट निवारण का प्रभावी माध्यम माना जाता है।

🛕 आयोजन विवरण:
इसके साथ ही, यह दिव्य आयोजन पूज्य
आचार्य श्री समयसागर जी महाराज एवं
आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से
नागपुर से पधारे विधानाचार्य श्री प्रिंस भैया के मार्गदर्शन में
7 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक
महावीर वार्ड स्थित राम मंदिर प्रांगण में संपन्न हुआ।
विधान के प्रारंभ में, मंगल घट यात्रा, ध्वजारोहण,
श्रीजी का महाभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई।
इसके बाद, श्रद्धालुओं ने चतुर्मुखी जिनबिंबों के समक्ष
अष्टद्रव्य अर्घ्य एवं श्रीफल समर्पित किए।
प्रथम दिन से ही, पूरा पांडाल श्वेत एवं केशरी परिधानों से सुसज्जित
श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से भक्तिमय वातावरण में परिवर्तित हो गया।
वहीं, रात्रि में श्रीजी की महाआरती, शास्त्र सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि सिवनी की धरती पर आयोजित
श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,
बल्कि जिन शासन की प्रभावना, विश्व शांति और आत्मकल्याण का सशक्त माध्यम बना।



