ईमानदारी की मिसाल: इंदौर के पीयूष बिड़ला ने लौटाया 2–2.5 लाख रुपये का मंगलसूत्र, समाज में कायम हुई भरोसे की मिसाल
बस यात्रा में गुम हुआ मंगलसूत्र, ईमानदार युवक ने लौटाकर जीता दिल
ईमानदारी की मिसाल: पीयूष बिड़ला ने लौटाया 2.5 लाख का मंगलसूत्र
Seoni 15 May 2026
इंदौर/ सिवनी यशो:- आज के दौर में जहां विश्वास डगमगाता नजर आता है, वहीं इंदौर निवासी पीयूष बिड़ला ने ईमानदारी और मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने सभी का दिल जीत लिया।
नंदन ट्रेवल्स की रात्रिकालीन बस यात्रा के दौरान संगठन उपाध्यक्ष रीता परमार का लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये मूल्य का मंगलसूत्र गुम हो गया था। घटना का पता सुबह करीब 4:30 बजे घर पहुंचने के बाद चला, जिसके बाद तुरंत नंदन ट्रेवल्स के संचालक मनीष ठाकुर को सूचना दी गई।
बस स्टाफ की सक्रियता से शुरू हुई खोज
सूचना मिलते ही मनीष ठाकुर ने बस स्टाफ से संपर्क कर तलाशी के निर्देश दिए, लेकिन शुरुआती प्रयासों में मंगलसूत्र नहीं मिला। इससे निराशा का माहौल बन गया।
इसी बीच सुबह करीब 10 बजे मनीष ठाकुर द्वारा एक नंबर साझा किया गया और बताया गया कि यह व्यक्ति ट्रेवल्स से जानकारी मांग रहा है।
पीयूष बिड़ला ने निभाई ईमानदारी की मिसाल
संपर्क करने पर सामने आया कि यह शख्स इंदौर निवासी पीयूष बिड़ला हैं, जो टाटा बैटरी कंपनी में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि बस से उतरते समय सीट के पास उन्हें मंगलसूत्र मिला था।
लेकिन उन्होंने बिना पुष्टि किए उसे अपने पास नहीं रखा और उसकी असली मालिक की तलाश शुरू की। बाद में नंदन ट्रेवल्स और स्टाफ की मदद से सही पहचान सुनिश्चित की गई।
घर आकर लौटाया कीमती मंगलसूत्र
पीयूष बिड़ला ने स्वयं पहुंचकर मंगलसूत्र संगठन को सौंपते हुए कहा कि “यह आपकी अमानत है, इसे आप स्वीकार करें।” इस कदम ने सभी को भावुक कर दिया।
ट्रेवल्स स्टाफ और सहयोगियों की भी सराहना
इस पूरे प्रकरण में नंदन ट्रेवल्स संचालक मनीष ठाकुर, गोलू परिहार एवं स्टाफ की सक्रिय भूमिका की भी सराहना की गई, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से सहयोग किया।
समाज में मजबूत हुआ भरोसा
मंगलसूत्र सुरक्षित मिलने पर संगठन ने पीयूष बिड़ला और ट्रेवल्स टीम का आभार व्यक्त किया। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि ईमानदारी आज भी जीवित है और समाज में भरोसे की नींव मजबूत है।
पीयूष बिड़ला जैसे लोग आज के समय में समाज के लिए प्रेरणा हैं, जिन्होंने यह साबित किया कि ईमानदारी और संस्कार आज भी सर्वोपरि हैं।
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