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सिवनी की पंचायतों में ठेकेदारी लूट का जाल! आदिवासी विकासखंडों में हो रहा है योजनाओं का सौदा

एक ही ठेकेदार को करोड़ों के काम; सरपंच-सचिव पर दबाव, जनप्रतिनिधियों ने जताया असंतोष

Seoni 24 July 2025

📌 पंचायतों के करोड़ों रुपये के कार्य एक ही ठेकेदार को
📌 आदिवासी विकासखंडों में कार्य ‘बेचे’ जाने के गंभीर आरोप
📌 सरपंच-सचिव को जिम्मेदार ठहराकर भयभीत किया जा रहा
📌 जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डहेरिया सहित जनप्रतिनिधि असंतुष्ट
📌 ईमानदार पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल के जिले की छवि पर आंच

सिवनी यशो:- जिले की पंचायतों में ठेकेदारी तंत्र हावी है। विकास रुक गया है, लेकिन बिल पास हो रहे हैं। एक ही ठेकेदार को लगातार बड़े-बड़े काम दिए गए। इसलिए गांवों में गुस्सा है और जनप्रतिनिधि असंतुष्ट हैं।

 आज ‘लोकतंत्र के अंतिम पायदान’ से नहीं, बल्कि  ठेकेदारों की जेब से संचालित हो रही हैं। अरबों की योजनाएं, पंचायतों के नाम पर एक ही ठेकेदार को बेच दी जा रही है । विकास नहीं, सौदा हो रहा है! और जो बोलेगा, उसे जेल में डाला जाएगा – यही है सिवनी की सच्चाई!

निर्माण आदेश 2629, 3345, 3682: भ्रष्टाचार का खुला दस्तावेज

दिनांक 6 फरवरी 2024 को जिले की दर्जनों पंचायतों में एक ही तारीख को जारी हुये और यह सभी कार्य प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से एक ही फर्म को, एक जैसे कार्यों के आदेश जारी किए गए ।

जानकारी के अनुसार बिना स्थल निरीक्षण, बिना ग्राम सभा की सहमति, बिना पारदर्शिता के नियम कानूनों को ताक पर रखकर कार्य किये जा रहे । अनेक पंचायतो ने आपत्ति व्यक्त करते हुये बताया है कि यह आदेश नहीं, भ्रष्टाचार का कागज़ी प्रमाण हैं ।

निर्धारित मापदंडों के अनुसार कार्य नहीं होने की शिकायते जनप्रतिनिधियों द्वारा की जाती है लेकिन अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं करते बल्कि संबंधित ठेकेदार गुंडागर्दी और दहशत का माहौल तैयार करते है ।

जनता चुप, सरपंच डरे, अफसर बेलगाम

जो सरपंच और सचिव सही बोलना चाहते हैं, उन्हें छोटे मामलों में फँसाकर चुप कराया जा रहा है।

“बोलेंगे तो निलंबन और जेल भेजने की धमकी दी जाती है, ठेकेदार और अधिकारी मिलकर उन्हें किसी भी जाँच के बहाने फंसा देने की धमकी देते है । पंचायत राज व्यवस्था का चालक लोग गला दबा रहे हैं।

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जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डहेरिया भी असंतुष्ट

 शिकायत पर अधिकारियों के कान जूँ नहीं रेंग रही लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती डहेरिया और कई जिला/जनपद सदस्य खुले तौर पर असंतुष्टि जता चुके हैं।

जिला पंचायत अध्यक्ष ने कुरई जनपद में हुये करोड़ों के कार्यो के साथ ही अन्य जनपदों में स्टापडेम निर्माण की जाँच कर प्रतिवेदन मांग है । जो अधिकारियों के लिये नागवार हो रहा है और कह रहे है कि वह नेतागिरी कर रही है ।

। ठेकेदारी तंत्र पर जनप्रतिनिधियों की नाराजी हैं लेकिन अधिकारी ‘ऊपर से आदेशÓ कहकर टालते हैं। क्या यही है पंचायती राज?

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आदिवासी विकासखंडों में योजनाओं का सौदा!

कुरई, घंसौर, केवलारी जैसे आदिवासी अंचलों में योजनाओं को ‘बेचनेÓ का आरोप है। जिनका लाभ गरीबों को मिलना था, वो कमीशन में बंट गया। मनरेगा जैसी रोजगार मूलक योजना ठेकेदारों की मशीने निगल रही है और मजदूरों के नाम पर जो फर्जीवाड़ा हो रहा है वह सरकार की मंशा और विकास को अवरूद्ध कर रहा है ।

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यह सब किसके नाम पर हो रहा है?

सांसद, विधायक और मंत्रियों के नाम पर अधिकारी मनमानी कर रहे है लेकिन क्या वे जानते हैं कि उनके नाम का दुरुपयोग कर अफसर जनता में उनके विरूद्ध और भाजपा सरकार के विरूद्ध नफरत फैला रहे हैं?

सिवनी प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल की राजनीति की जन्मभूमि है, और यहीं पंचायतें बिक रही हैं! यह बेहद अफसोसजनक है ।

पंचायत मंत्री श्री पटेल अपनी ईमानदार और अनुशासित छवि के लिये पहचाने जाते है उनकी प्रथम राजनैतिक कर्मभूमि में भ्रष्टाचार का तंडाव अधिकारी करने की हिम्मत कर रहे है यह चिंता का विषय है ।

अब सवाल ये है:

क्या ठेकेदार तय करेंगे कि कौन-सी पंचायत में क्या होगा?

क्या सरपंचों और सचिवों का काम केवल साइन करने तक सीमित है?

क्या “लोकतंत्र के अंतिम पायदान” की हत्या हो रही है?

जनता और मीडिया की माँग:

जिला कलेक्टर विशेष ऑडिट टीम गठित करें

निर्माण कार्यों की त्रक्कस् टैगिंग, फोटो सहित रिपोर्टिंग अनिवार्य की जाए

ठेकेदारों की लिस्ट सार्वजनिक हो

सरपंच-सचिव को धमकाने वाले अफसरों पर आपराधिक कार्रवाई हो

जिले की जनता की अपेक्षा है कि पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल स्वयं संज्ञान लें और विकास कार्यो की उच्च जाँच एजेंसी जाँच सुनिश्चित कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कराये ।

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