देश विदेशमध्यप्रदेशराजनीतिसिवनी

लाड़ली बहना योजना: बदली जीवन की धारा – सीता से गंगा तक की प्रेरक कहानियां

✍️ मनोज मर्दन त्रिवेदी 

सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनें आज सिर्फ योजनाओं की लाभार्थी नहीं हैं, वे अब आत्मनिर्भरता की प्रतीक बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार, यह योजना महज वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और स्वाभिमान की पुनर्स्थापना का माध्यम बन गई है।

Table of Contents

गंगा की मुस्कान: इंदौर की बहन ने बदला अपनी दुनिया का नक्शा

इंदौर की गंगा ने लाड़ली बहना योजना से प्राप्त राशि को सिर्फ बैंक में नहीं रखा, बल्कि उसे अवसर में बदला। उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी, साथ में एक छोटी सी किराना दुकान भी खोली। अब वह हर महीने 8,000 से 10,000 तक कमा रही हैं। गंगा कहती हैं,”पहले किसी पर निर्भर रहना पड़ता था, अब मेरे बच्चे मुझ पर गर्व करते हैं।”

सीता की बकरियां: आत्मनिर्भरता की सीढ़ी बनी योजना

बेलखेड़ा के निकटवर्ती गांव की सीता ने योजना की राशि से दो बकरियां खरीदीं। आज उनके पास सात बकरियां हैं, जिनसे वे दूध बेचती हैं और साल में दो बार बिक्री से अतिरिक्त आमदनी अर्जित करती हैं।

“यह योजना नहीं, मेरे आत्मसम्मान की नींव है,” – सीता की यह बात कई बहनों की आवाज है।

सिर्फ पैसा नहीं, यह बहनों का हक है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, “लाड़ली बहना योजना सिर्फ  1250 की मासिक सहायता नहीं, बल्कि यह बहनों की गरिमा, अधिकार और आत्मनिर्भरता की पुनर्प्रतिष्ठा है।” अब तक 30,000 करोड़ से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है।

 गैस, राशन और सम्मान – बहनों के लिए हर मोर्चे पर सहयोग

  • उज्ज्वला योजना के तहत 27 लाख बहनों को ₹39.14 करोड़ गैस रिफिल अनुदान

  • रेडीमेड गारमेंट व्यवसाय करने वाली बहनों को ₹5000 अतिरिक्त सहायता

  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से 1.33 करोड़ परिवारों को निःशुल्क राशन

  • जनकल्याण संबल योजना में 6,821 श्रमिक परिवारों को ₹150 करोड़ राहत राशि

भविष्य की रोशनी: स्कूटी, लैपटॉप और सांदीपनि विद्यालय

डॉ. यादव ने ऐलान किया है कि आगामी माह में मेधावी छात्रों को स्कूटी व लैपटॉप प्रदान किए जाएंगे। साथ ही सांदीपनि विद्यालयों में खेल और अध्ययन दोनों को प्राथमिकता दी जाएगी।

उम्मीद की मिसाल: हर बहन एक बदलाव की कहानी

सीता और गंगा, आज अकेली नहीं हैं। पूरे मध्यप्रदेश में लाखों ऐसी कहानियाँ हैं, जो बताती हैं कि जब सरकार “सहारा” नहीं, “सशक्तिकरण” का रास्ता चुनती है, तो लाड़ली बहनें खुद अपनी दुनिया बदल देती हैं।

स्रोत: मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित
लेख: मनोज मर्दन त्रिवेदी, दैनिक यशोन्नति

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!