धर्मसिवनी

दूसरों का उपकार करने वालों का नाम अमर हो जाता है : मुनि श्री भावसागर जी महाराज

सिवनी जैन बड़ा मंदिर में रक्षाबंधन पर विश्व की प्रथम 1008 फिट राखी भगवान को अर्पित, धर्मसभा में मिला परोपकार का संदेश

 सिवनी यशो:- श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, सिवनी में परम पूज्य मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज एवं मुनि श्री भावसागर जी महाराज के सानिध्य में प्रातःकालीन बेला में मांगलिक क्रियाएँ संपन्न हुईं।
इस अवसर पर पहली बार रक्षाबंधन पर्व पर विश्व की प्रथम 1008 फिट राखी भगवान को अर्पित की गई।

“परोपकार के समान कोई धर्म नहीं होता और दूसरों को पीड़ा पहुँचाने से बड़ा कोई अधर्म नहीं होता। सेवा से शत्रु भी मित्र हो जाता है। सेवा के लिए पैसे की जरूरत नहीं, बल्कि संकुचित जीवन छोड़ने की जरूरत है।”

मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने आगे कहा कि जरूरतमंदों की निःस्वार्थ सेवा ही जीवन का वास्तविक आनंद है। धन-दौलत तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज और जनहित में हो। असली संपन्नता धन से नहीं, बल्कि जनसेवा से प्राप्त यश से आती है।

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सिवनी जैन बड़ा मंदिर में रक्षाबंधन पर पहली बार विश्व की 1008 फिट लंबी राखी भगवान को अर्पित की गई

सिवनी जैन बड़ा मंदिर में रक्षाबंधन पर पहली बार विश्व की 1008 फिट लंबी राखी भगवान को अर्पित की गई

  • सेवा से हृदय शुद्ध होता है और अहंकार दूर होता है।
  • माता-पिता की सेवा करना हर पुत्र का पहला कर्तव्य है।
  • सबसे बड़ी सेवा है, अपनी खुशियाँ दूसरों के साथ बाँटना।
  • परोपकार की भावना सभी गुणों में श्रेष्ठ है और अमरत्व दिलाती है।

अंत में मुनि श्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में हर क्षण निःस्वार्थ परोपकार की भावना बनी रहनी चाहिए, क्योंकि यही जीवन को संतोष, पूर्णता और रस से भर देती है।

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