धर्मसिवनी

दूसरे दिन दशलक्षण महापर्व की मांगलिक क्रियाएं संपन्न – हथकरघा के वस्त्र चर्म रोग से बचाते हैं

मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने प्रवचन में ध्यान, सरलता और हथकरघा वस्त्रों के महत्व पर प्रकाश डाला

Seoni 31 August 2025
सिवनी यशो:-  श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, सिवनी (मध्यप्रदेश) में दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत दूसरे दिन मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुईं। कार्यक्रम में महासमाधि धारक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के शिष्य – मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज और मुनि श्री भावसागर जी महाराज का सान्निध्य प्राप्त हुआ। साथ ही अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त योगाचार्य डॉ. नवीन कुमार जैन के निर्देशन में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन हुए।

कार्यक्रम के अंतर्गत अभिषेक, विशिष्ट मंत्र शांतिधारा, दशलक्षण महापर्व पूजन, छत्र अर्पण एवं चंवर स्थापना की गई।

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शास्त्र दान का सौभाग्य प्राप्त किया।

दोपहर में तत्वार्थ सूत्र का वाचन और मुनि श्री द्वारा धार्मिक कक्षाएं संचालित की गईं।

शाम को मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज का विशेष उद्बोधन हुआ, वहीं रात्रि में महाआरती, योगाचार्य जी के प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि –

ध्यान के माध्यम से मन, शरीर और आत्मा के रोग दूर हो जाते हैं।

उन्होंने बताया कि परोपकार सबसे बड़ा धर्म है और इसके लिए यदि आवश्यक हो तो व्यक्ति को अपना धन-दौलत तक त्याग देना चाहिए।

मुनि श्री ने कहा कि –

  • दूसरों की प्रशंसा करना आत्मोन्नति का मार्ग है।

  • प्रतिक्रमण आत्मा को पवित्र करता है।

  • सरलता जीवन की अमूल्य निधि है।

  • पैसों से परमात्मा नहीं, लेकिन पैसों के त्याग से परमात्मा प्राप्त होते हैं।

  • चोरी का धन तीन पीढ़ियों से अधिक नहीं टिकता।

  • छल और ठगी आत्मा को दूषित करते हैं।

उन्होंने हथकरघा वस्त्रों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि –

 ये वस्त्र न केवल शुद्ध होते हैं बल्कि गरीबों, कैदियों और महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराते हैं।

साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण में सहायक होते हैं और चर्म रोग जैसी बीमारियों से भी बचाते हैं।

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