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राष्ट्रपति मुर्मु ने छात्रों को दी बधाई, सीएम डॉ. यादव ने बताया छात्रों के लिए क्या-क्या कर रही सरकार

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह

राज्यपाल बोले- पिछड़ों और जनजातीय समाज के विकास के लिए कई योजनाएं संचालित, मुख्यमंत्री ने गिनाए उच्च शिक्षा और कौशल विकास के प्रयास

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह: राष्ट्रपति मुर्मु ने छात्रों को दी बधाई, सीएम मोहन यादव ने गिनाए शिक्षा सुधार

Bhopal 21 June 2026
भोपाल/जबलपुर यशो:- “आपके ज्ञान, ऊर्जा और संकल्प से विकसित भारत का सपना साकार होगा। शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक कल्याण के लिए होना चाहिए।

अपने आसपास के वंचित, ग्रामीण और जनजातीय समाज की समस्याओं को समझिए, उनके समाधान में सहभागी बनिए और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी भूमिका निभाइए।” यह बात राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही।

“रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के 36वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान करते हुए”
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु।

शनिवार को आयोजित इस गरिमामयी समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालय प्रशासन, शोधार्थी, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह में 141 मेधावी विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

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राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने स्वयं 20 स्वर्ण पदक वितरित किए। इसके अलावा 182 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

“रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के 36वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान करते हुए”
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह का दृश्य

तीन विद्वानों को डी-लिट, एक विद्वान को डीएससी तथा वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधियां भी प्रदान की गईं।

रानी दुर्गावती साहस और नारी शक्ति की प्रतीक

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि रानी दुर्गावती, जिनके नाम पर यह विश्वविद्यालय स्थापित है, अदम्य साहस, पराक्रम और स्वाभिमान की प्रतीक थीं। उन्होंने अपने राज्य और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। रानी दुर्गावती का जीवन आज भी नारी शक्ति और नेतृत्व क्षमता का प्रेरणास्रोत है।

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उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के आसपास जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध विरासत मौजूद है। ऐसे में विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजातीय समाज, वंचित वर्गों और विशेष रूप से बेटियों के सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

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जनजातीय समाज की चिंता करना शिक्षित युवाओं का कर्तव्य

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज अत्यंत स्वाभिमानी है। यह समाज अक्सर अपनी समस्याओं और कठिनाइयों को खुलकर व्यक्त नहीं करता। ऐसे में जो युवा शिक्षा प्राप्त कर समाज में आगे बढ़ रहे हैं, उनका दायित्व है कि वे अपने समुदाय और गांवों से जुड़ाव बनाए रखें।

“रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के 36वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान करते हुए”
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह का दृश्य

उन्होंने कहा कि कई बार ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी नहीं मिल पाती। शिक्षित युवाओं को आगे आकर उन्हें मार्गदर्शन देना चाहिए। यह समाज के प्रति उनका सबसे बड़ा योगदान होगा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीवंत राष्ट्र है और उसका विकास तभी संभव है जब अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे।

शिक्षा ही विकास का सबसे प्रभावी माध्यम

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि शिक्षा सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन है। जनजातीय समुदायों और वंचित वर्गों के शैक्षणिक विकास के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा ग्रामीण एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संचालित योजनाओं की सराहना की।

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उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने वाले केंद्र नहीं होते, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और रचनात्मक सोच को विकसित करने वाले संस्थान भी होते हैं। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, उद्यमिता और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना समय की आवश्यकता है।

“रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के 36वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान करते हुए”
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह का दृश्य

भारतीय ज्ञान परंपरा और नवाचार का संगम

राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक गणित और भारतीय शैक्षणिक मूल्यों के संरक्षण एवं प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का डिजाइन इनोवेशन सेंटर नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है तथा पेटेंट प्राप्त कर नई उपलब्धियां हासिल कर चुका है।

उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा के संतुलन के साथ ही भारत का समग्र विकास संभव है। युवाओं को अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और विरासत को कभी नहीं भूलना चाहिए।

बेटियों की सफलता नए भारत की तस्वीर

राष्ट्रपति ने कहा कि इस दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली छात्राओं की संख्या अधिक है, जो महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल परिवार और विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सफलता है।

उन्होंने कहा कि भारत युवा शक्ति का देश है और देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है। यही युवा शक्ति विकसित भारत-2047 के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बनेगी।

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मूल्यों को जीवन का आधार बनाएं युवा

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि बदलती दुनिया में आधुनिक तकनीक, डिजिटल नवाचार, स्टार्टअप और अंतरिक्ष अनुसंधान के अवसरों का लाभ उठाएं, लेकिन अपने मूल्यों को कभी न भूलें। सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे भारतीय जीवन मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाएं।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और वंचित वर्गों के उत्थान जैसे विषयों पर अनुसंधान और अध्ययन समाज और राष्ट्र दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।

पांच-पांच गांव गोद लें युवा : राज्यपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी विकसित भारत-2047 की नई शक्ति हैं। उन्होंने जनजातीय समाज के शिक्षित युवाओं से आह्वान किया कि वे कम से कम पांच गांवों को गोद लेकर वहां के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग करें।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बैगा, भारिया और सहारिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही हैं। पीएम जन-मन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक विकास कार्य किए जा रहे हैं।

छात्रों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार छात्रों के सर्वांगीण विकास और उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की सकल नामांकन दर बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई है तथा स्कूल शिक्षा में ड्रॉपआउट दर लगभग समाप्त हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर सृजित करने के लिए तीन नए शासकीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय की पढ़ाई शुरू की गई है और युवाओं को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए नए कौशल विकास पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

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ज्ञान, सेवा और राष्ट्र निर्माण का संदेश

दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का भी अवसर है। राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, प्रतिभा और ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र निर्माण, समाज सेवा और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए करें। इसी भावना के साथ विकसित भारत-2047 का सपना साकार किया जा सकता है।

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