दुनिया लॉजिक से नहीं, धर्म से चलती है - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इंदौर में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की पुस्तक ‘परिक्रमा कृपा सार’ का विमोचन किया
Indore 14 September 2025
इंदौर। हिंदी दिवस (14 सितंबर) के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत इंदौर दौरे पर पहुँचे। यहाँ उन्होंने मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा लिखित पुस्तक ‘परिक्रमा कृपा सार’ का विमोचन किया। यह आयोजन ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में हुआ, जहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित प्रदेश की कई बड़ी हस्तियाँ मौजूद रहीं।
‘परिक्रमा कृपा सार’ का विमोचन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पुस्तक ‘परिक्रमा कृपा सार’ का विमोचन किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने अपने अनुभव साझा किए। पुस्तक नर्मदा परिक्रमा से जुड़े उनके गहन अनुभवों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1994 और 2005 में उन्होंने दो बार माँ नर्मदा की परिक्रमा की थी। लगभग 30 वर्षों के अनुभव और आध्यात्मिक चिंतन को इस पुस्तक में पिरोया गया है।

मोहन भागवत के विचार – “दुनिया लॉजिक से नहीं, धर्म से चलती है”
अपने उद्बोधन में मोहन भागवत ने कहा –
“मैं और बाकी में अंतर समझना पड़ेगा। मैं और मेरा – वो और उसका से ही झगड़े जन्म लेते हैं। दुनिया लॉजिक से नहीं, धर्म से चलती है। ध्यान, कर्म और भक्ति की त्रिवेणी पर आस्था रखकर ही हमारा देश चलता है। इंग्लैंड बंटने की स्थिति में है, पर हम आगे बढ़ेंगे। कभी बंट गए थे, उन्हें भी वापस जोड़ लेंगे।”
उन्होंने कहा कि मनुष्य भौतिक दृष्टि से उन्नत तो हुआ है, लेकिन परिवार और सामाजिक संबंध टूटने लगे हैं। जबकि भारत में आज भी नदियों को मैया कहकर पूजने की परंपरा है, यही भाव हमें जोड़ता है।

कार्यक्रम में शामिल प्रमुख हस्तियाँ
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत,
महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 ईश्वरानंद जी महाराज,
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर,
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल,
प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह,
प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद जी सहित कई संत-महात्मा और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
नर्मदा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कहा –
“प्रहलाद पटेल जी ने दो बार माँ नर्मदा की परिक्रमा कर अपने अद्भुत अनुभवों को इस पुस्तक में संजोया है।उनका नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के प्रति समर्पण अनुकरणीय है।उद्गम मानस यात्रा के माध्यम से उन्होंने 108 नदियों के उद्गम स्थलों का महत्व सामने रखा।”
यह पुस्तक न केवल माँ नर्मदा की महिमा और संस्कृति का परिचय कराती है,
बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक धरोहरों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती है।
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