कृषि उपज मंडी के लिए अधिग्रहित 0.77 हेक्टेयर भूमि के बदले दिया गया था 1.94 लाख रुपये का मुआवजा, एसडीएम के अपीलीय आदेश से नामांतरण के बाद कई बार बिक्री का आरोप
Seoni, 29 October 2026
सिवनी / केवलारी यशो:- कृषि उपज मंडी मैरा (पलारी) के निर्माण के लिए अधिग्रहित शासकीय प्रयोजन की भूमि को कथित तौर पर राजस्व अभिलेखों में दोबारा निजी नाम दर्ज कराकर बेचने का मामला सामने आया है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों एवं अन्य व्यक्तियों की भूमिका को लेकर शिकायत किए जाने के करीब तीन माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता पक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मैरा पलारी निवासी श्रीमती समनीबाई पति चंदनलाल गोली के नाम दर्ज प.ह.नं. 07, राजस्व निरीक्षक मंडल पलारी के खसरा नंबर 55/1 एवं 55/2 की कुल 0.77 हेक्टेयर भूमि कृषि उपज मंडी मैरा के लिए अधिग्रहित की गई थी। भू-अर्जन अधिकारी एवं पदेन एसडीएम केवलारी द्वारा उक्त भूमि के एवज में 1,94,292 रुपये का मुआवजा दिए जाने का उल्लेख शिकायत में किया गया है। दावा है कि अधिग्रहण संबंधी अधिसूचना मध्यप्रदेश शासन के राजपत्र (असाधारण) में क्रमांक 232, दिनांक 5 जून 2014 को प्रकाशित हुई थी।
नायब तहसीलदार ने खारिज किया था आवेदन
शिकायत में उल्लेख है कि मोहनलाल चंद्रवंशी पिता टीकाराम चंद्रवंशी, निवासी मैरा (पलारी) ने 13 अगस्त 2020 को वसीयत के आधार पर उक्त भूमि पर अपना नाम दर्ज कराने के लिए नायब तहसीलदार पलारी के न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। प्रकरण की जांच के बाद नायब तहसीलदार ने 18 नवंबर 2020 को आवेदन खारिज कर दिया था।
इसके बाद मोहनलाल चंद्रवंशी ने नायब तहसीलदार के आदेश और भू-अर्जन संबंधी कार्रवाई को चुनौती देते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) केवलारी के न्यायालय में अपील प्रस्तुत की। शिकायत के अनुसार, तत्कालीन एसडीएम महेश अग्रवाल ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 0034/अपील/2024-25 में अपील स्वीकार करते हुए संबंधित भूमि पर मोहनलाल चंद्रवंशी का नाम दर्ज करने का आदेश पारित किया।
नाम दर्ज होने के बाद कई बार बिक्री का आरोप
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज होने के बाद मोहनलाल चंद्रवंशी ने उक्त भूमि सुनील ठाकुर, निवासी थांवरी हिनोतिया, को विक्रय कर दी। इसके बाद सुनील ठाकुर द्वारा भूमि कंचन मालवीय, सुरेंद्र मालवीय तथा सतीश एवं गोपाल साहू, निवासी आदेगांव, लखनादौन को बेचे जाने की जानकारी शिकायत में दी गई है।
मामले में तत्कालीन एसडीएम, राजस्व अधिकारियों और पंजीयन प्रक्रिया से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। शिकायत में सर्विस प्रोवाइडर सुनील कुमार रजक तथा उपपंजीयक प्रफुल्ल ढोले के बीच कथित तालमेल का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है।
अधिग्रहण के बाद भूमि का निजी नाम पर दर्ज होना जांच का प्रमुख बिंदु
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि भूमि विधिवत अधिग्रहित कर ली गई थी और उसके बदले मुआवजा भी दिया जा चुका था, तो बाद में उस पर निजी व्यक्ति का नाम दर्ज करने का आदेश किन तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर पारित किया गया? साथ ही, नामांतरण के बाद हुए कथित भूमि हस्तांतरणों के दौरान अधिग्रहण संबंधी राजपत्र अधिसूचना और राजस्व अभिलेखों की जांच किस स्तर पर की गई, यह भी जांच का विषय है।
अधिवक्ता पवन यादव द्वारा इस मामले में साक्ष्यों सहित उच्च स्तर पर शिकायतें भेजे जाने की जानकारी दी गई है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के लगभग तीन माह बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
शासकीय प्रयोजन के लिए अधिग्रहित भूमि से जुड़े इस प्रकरण में दस्तावेजों की सत्यता, राजस्व न्यायालय के आदेश, नामांतरण की प्रक्रिया, पंजीयन अभिलेख और भूमि की बाद की बिक्री की जांच आवश्यक है। यदि जांच में दस्तावेजों के कूटरचित होने, अधिकारों के दुरुपयोग अथवा किसी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष तथा जांच की आधिकारिक स्थिति सामने आना शेष है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय होना उचित होगा।