प्रदेशभर से जुटेंगे बाल मित्र, पेंच के जंगलों में वन, वन्यजीव और पर्यावरण के महत्व को करीब से समझेंगे विद्यार्थी
सिवनी यशो :- वन्यजीवों की रोमांचक दुनिया, प्रकृति की अनमोल विरासत और जंगलों के संरक्षण का संदेश लेकर एक बार फिर मोगली बाल उत्सव का आयोजन होने जा रहा है। सिवनी जिले के कुरई विकासखंड अंतर्गत टुरिया-खवासा के समीप स्थित मोगलीलैंड में 2 से 4 नवंबर तक आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय उत्सव प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित विद्यार्थियों को प्रकृति से सीधे जुड़ने का अनूठा अवसर प्रदान करेगा। मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले इस उत्सव में बच्चे केवल जंगलों की खूबसूरती ही नहीं देखेंगे, बल्कि वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के महत्व की ऐसी उपयोगी जानकारी भी प्राप्त करेंगे, जो उनके जीवन में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने में सहायक होगी।नक्शे देखें
जंगल की पाठशाला में सीखेंगे संरक्षण का महत्व
मोगली बाल उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां बच्चों को प्रकृति के बारे में केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें प्राकृतिक परिवेश के बीच रहकर उसे समझने का अवसर मिलता है। जंगल, पेड़-पौधे, वन्यजीव, जैव विविधता और पर्यावरण के परस्पर संबंधों को करीब से जानने का अनुभव विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होता है।
बच्चों को यह समझने का अवसर मिलता है कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि असंख्य जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं। वन्यजीवों का संरक्षण, जंगलों की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील व्यवहार क्यों आवश्यक है, ऐसे विषयों की जानकारी उत्सव को विशेष महत्व प्रदान करती है।
रोमांच के साथ ज्ञान और अनुभव का संगम
उत्सव के दौरान जंगल सफारी, नेचर ट्रेल यानी प्रकृति भ्रमण, पर्यावरण विषयक निबंध प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पर्यावरण आधारित फिल्मों के प्रदर्शन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करने और उन्हें प्रकृति के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चयनित होकर आने वाले विद्यार्थी इस आयोजन में ‘बाल मित्र’ के रूप में भाग लेंगे। अलग-अलग क्षेत्रों से आए बच्चों के बीच विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान भी उत्सव को खास बनाता है। प्राकृतिक वातावरण में सीखने का यह तरीका बच्चों के मन में वन्यजीवों के प्रति आकर्षण के साथ उनके संरक्षण की भावना को मजबूत करता है।
विभिन्न विभागों की सहभागिता, सीईई का तकनीकी सहयोग
मोगली बाल उत्सव के आयोजन में जिला शिक्षा विभाग, जनजातीय कार्य विभाग, वन विभाग तथा संबंधित विभागों की सहभागिता रहती है। सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन (सीईई), इंडिया इस उत्सव के लिए तकनीकी सलाहकार के रूप में सहयोग करता है। विभिन्न विभागों के समन्वय से आयोजित यह पहल विद्यार्थियों को पर्यावरण शिक्षा से जोड़ने और संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
मोगली की दुनिया से सिवनी को मिली विशिष्ट पहचान
सिवनी के जंगलों का नाम विश्वप्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग की चर्चित कृति द जंगल बुक और उसके लोकप्रिय पात्र मोगली के संदर्भ में विशेष रूप से लिया जाता है। जंगलों और वन्यजीवों के बीच जीवन की कल्पनाशील दुनिया ने पीढ़ियों से बच्चों को आकर्षित किया है। मोगली की कथा ने प्रकृति, साहस, मित्रता और जंगल के जीवन के प्रति जिज्ञासा जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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द जंगल बुक पर आधारित टेलीविजन धारावाहिक के लिए गुलजार द्वारा लिखे गए लोकप्रिय गीत ‘जंगल-जंगल बात चली है, पता चला है…’ ने मोगली को देशभर के बच्चों के बीच और भी लोकप्रिय बना दिया। इसी लोकप्रियता और सिवनी के जंगलों से जुड़ी पहचान ने मोगली बाल उत्सव को एक विशेष सांस्कृतिक और शैक्षणिक महत्व प्रदान किया है।
बच्चों के मन में जागेगा प्रकृति बचाने का संकल्प
आज जब पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा दुनिया के महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं, ऐसे समय में मोगली बाल उत्सव जैसी पहल का महत्व और बढ़ जाता है। बचपन में प्रकृति को समझने और उसके संरक्षण की सीख प्राप्त करने वाले बच्चे भविष्य में अधिक जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।
तीन दिनों तक चलने वाला यह उत्सव विद्यार्थियों के लिए मनोरंजन, रोमांच और ज्ञान का संगम होगा। जंगलों के बीच बिताए गए पल, वन्यजीवों के बारे में मिली जानकारी और पर्यावरण संरक्षण के अनुभव उनके मन में लंबे समय तक अंकित रहेंगे। यही इस उत्सव की वास्तविक सार्थकता है कि बच्चे यहां से केवल यादें लेकर नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा करने और वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने की प्रेरणा लेकर लौटें।