दुर्गापुर फार्महाउस से 1.04 लाख रुपये नकद, पांच मोबाइल और तीन चाकू जब्त; लंबे समय से कथित तौर पर चल रहे जुए के कारोबार और संरक्षण के दावों की जांच भी जरूरी
Seoni, 28 October 2026
सिवनी यशो:- जिले में जुए के अवैध कारोबार पर पुलिस की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है। कुरई, कोतवाली और डुंडासिवनी पुलिस की संयुक्त टीम ने ग्राम दुर्गापुर स्थित एक फार्महाउस में दबिश देकर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। मौके से 1 लाख 4 हजार 200 रुपये नकद, पांच एंड्रॉइड मोबाइल, 52 ताश के पत्ते और तीन धारदार चाकू जब्त किए गए हैं। जब्त मशरूका का कुल मूल्य 2 लाख 55 हजार 400 रुपये बताया गया है।
कार्रवाई निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस की कार्रवाई केवल जुआ खेलते पकड़े गए लोगों तक सीमित रहेगी, या फिर इस कथित कारोबार के पीछे सक्रिय लोगों और इसके संचालन से जुड़े पूरे नेटवर्क तक भी पहुंचेगी?

पांच गिरफ्तार, तीन चाकू भी मिले
पुलिस के अनुसार, 26 अक्टूबर को सहायक उपनिरीक्षक भूपेंद्र नागेश्वर को सूचना मिली थी कि दुर्गापुर के एक फार्महाउस के बरामदे में जुए का फड़ संचालित हो रहा है। सूचना की तस्दीक के बाद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दबिश दी और पांच लोगों को ताश के पत्तों पर रुपये का दांव लगाते हुए पकड़ा।
गिरफ्तार आरोपियों में जितेंद्र डेहरवाल, सुदेश वर्मा, शब्बीर उर्फ कैलाश डागौर, संतकुमार उर्फ नानू सराठे और आकाश चौकसे शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, फड़ के नीचे बिछे कंबल की तलाशी के दौरान तीन आरोपियों के पास से तीन धारदार चाकू भी बरामद हुए, जिनके संबंध में वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
इस मामले में थाना कुरई में अपराध क्रमांक 465/2026 के तहत जुआ अधिनियम की धारा 13, आर्म्स एक्ट की धारा 25 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(1) में प्रकरण दर्ज कर विवेचना की जा रही है। पुलिस ने नागपुर के कथित जुआरियों की संलिप्तता और फार्महाउस मालिक की भूमिका की भी जांच किए जाने की जानकारी दी है।
सवाल केवल पांच जुआरियों का नहीं, पूरे नेटवर्क का है
स्थानीय स्तर पर इस जुए के फड़ को लेकर लंबे समय से कारोबार की तरह संचालन किए जाने और रसूखदार लोगों की भूमिका को लेकर चर्चाएं होने के दावे सामने आते रहे हैं। यह भी आरोप लगाए जाते रहे हैं कि ऐसे अवैध कारोबारों को किसी न किसी स्तर पर संरक्षण मिलता रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और किसी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता के प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने आना अभी आवश्यक है।
ऐसे में पुलिस की मौजूदा कार्रवाई के बाद जांच का दायरा केवल मौके से पकड़े गए पांच लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह पता लगाना भी जरूरी है कि फार्महाउस किसका है, वहां जुआ खेलने के लिए लोगों को कौन जुटाता था, रकम के लेन-देन का संचालन कौन करता था और क्या इस गतिविधि से जुड़े अन्य लोगों की भी कोई भूमिका है।
यदि यह फड़ वास्तव में लंबे समय से संचालित हो रहा था, तो उसकी अवधि, नियमितता और संभावित नेटवर्क की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, संरक्षण या मिलीभगत के आरोपों में यदि कोई तथ्य सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखना यह है कि कार्रवाई कितनी दूर तक जाती है
अवैध जुए के खिलाफ छापेमारी तभी निर्णायक मानी जाएगी, जब उससे केवल तत्काल गिरफ्तारी और जब्ती तक सीमित परिणाम न निकलें, बल्कि अवैध कारोबार के संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की भी जांच हो। रसूखदार हो या सामान्य व्यक्ति, कानून के सामने सभी की जवाबदेही समान होनी चाहिए।
सिवनी पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण लालचंदानी के निर्देशन में हुई इस संयुक्त कार्रवाई ने जुए के फड़ पर पुलिस की सक्रियता दिखाई है। अब निगाहें विवेचना पर हैं। क्या जांच कथित संचालकों, आर्थिक लेन-देन और संभावित संरक्षण के आरोपों तक पहुंचेगी, या मामला केवल पांच गिरफ्तारियों और जब्ती के आंकड़ों के साथ दर्ज होकर रह जाएगा?
कार्रवाई की असली कसौटी यही होगी कि पुलिस जुए के फड़ पर छापा मारने के साथ-साथ, यदि कोई संगठित नेटवर्क और संरक्षण व्यवस्था मौजूद है, तो उसकी जड़ों तक भी पहुंचे।