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अविश्वास प्रस्ताव : हाईकोर्ट की रोक के बीच अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान, मालती डहेरिया की कुर्सी बची; कांग्रेस में घमासान!

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Oct 29, 2026 11:17 am / Post views : 4

हाईकोर्ट की रोक के बीच अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान, मालती डहेरिया की कुर्सी बची; कांग्रेस में घमासान!
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तीन सदस्यों वाली भाजपा के सामने 16 सदस्यों के समर्थन का दावा ध्वस्त, कुलस्ते-बघेल की रणनीति चर्चा में; भीतरघात की जांच के लिए समिति गठित, जिला प्रभारी सोहनलाल बाल्मीकि ने पद से मुक्त करने प्रदेश अध्यक्ष को लिखा पत्र

सिवनी यशो :- जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती मुकेश डहेरिया के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का विफल होना जिले की राजनीति का बड़ा घटनाक्रम बन गया है। इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने 22 अक्टूबर 2026 को अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित आगे की कार्यवाही अगली सुनवाई तक स्थगित रखने का अंतरिम आदेश जारी किया था।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आदेश जारी होने के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की प्रक्रिया चल रही थी। इसके बावजूद मतदान की प्रक्रिया पूरी हुई और अविश्वास प्रस्ताव औंधे मुंह गिर गया।

इस घटनाक्रम ने एक ओर न्यायालय के आदेश के समय और उसके संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस संगठन में कथित भीतरघात की चर्चा तेज कर दी है।

पार्टी के भीतर जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए समिति गठित किए जाने और जिला प्रभारी सोहनलाल बाल्मीकि द्वारा प्रभारी पद की जिम्मेदारी से मुक्त करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

राजनीतिक हलकों में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और भाजपा जिला महामंत्री मुकेश बघेल की रणनीतिक भूमिका की भी चर्चा हो रही है।

हालांकि, मतदान के परिणाम के पीछे की वास्तविक वजह और सदस्यों के रुख का स्पष्ट आकलन आधिकारिक मतदान विवरण के आधार पर ही किया जा सकता है।

हाईकोर्ट का आदेश, मतदान जारी रहने से उठा बड़ा सवाल

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर में WP No. 44034/2026, मालती डेहरिया विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य, की सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 को हुई। न्यायमूर्ति मनींदर एस. भट्टी ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए अनुलग्नक पी/5, दिनांक 14 अक्टूबर 2026 के आधार पर शुरू की गई आगे की कार्यवाही को अगली सुनवाई तक स्थगित रखने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी ने दलील दी थी कि अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं अपनाई गई और बैठक बुलाने की समय-सीमा का पालन नहीं किया गया। न्यायालय ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने तथा राज्य शासन की ओर से संपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए।

इस मामले का सबसे अहम पहलू आदेश और मतदान के समय के बीच का घटनाक्रम है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जब न्यायालय का आदेश जारी हुआ, तब जिला पंचायत में मतदान की प्रक्रिया चल रही थी। ऐसे में यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि आदेश की जानकारी संबंधित सक्षम अधिकारी को कब प्राप्त हुई और उसके बाद क्या कदम उठाए गए।

यदि आदेश की जानकारी मतदान के दौरान संबंधित अधिकारी तक नहीं पहुंची थी, तो यह तथ्य भी पूरे घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण होगा। इसलिए आदेश जारी होने के समय और उसके संप्रेषण के समय के बीच अंतर को स्पष्ट करना आवश्यक है। इस संबंध में न्यायालय का आदेश, प्रेषण रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्यवाही की समय-सारणी महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।

16 सदस्यों के समर्थन के दावे के बावजूद कैसे गिरा अविश्वास प्रस्ताव?

जिला पंचायत के राजनीतिक समीकरणों में कांग्रेस के 11 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पांच सदस्यों का आंकड़ा चर्चा में था। इस तरह विपक्ष के पास कुल 16 सदस्यों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा था, जबकि भाजपा के तीन सदस्य बताए जा रहे थे।

संख्या बल के इन दावों के बीच अध्यक्ष मालती डहेरिया की कुर्सी पर संकट गहराने की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के विफल होने से राजनीतिक आकलन उलट गए। अब सवाल यह है कि विपक्ष का घोषित समर्थन निर्णायक परिणाम में क्यों नहीं बदल पाया।

यह परिणाम भाजपा के लिए राजनीतिक राहत और विपक्ष के लिए आत्ममंथन का विषय बन गया। हालांकि, वास्तविक मतदान में कितने सदस्य उपस्थित रहे, कितने वैध मत पड़े और प्रस्ताव विफल होने का सटीक कारण क्या रहा, इसका निष्कर्ष आधिकारिक मतदान विवरण से ही निकाला जाना चाहिए।

कुलस्ते-बघेल की रणनीति की चर्चा तेज

अविश्वास प्रस्ताव की विफलता के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते और भाजपा जिला महामंत्री मुकेश बघेल की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई हैं। मतदान से पहले मुकेश बघेल द्वारा प्रस्ताव के विफल होने का दावा किए जाने की चर्चा भी अब राजनीतिक हलकों में हो रही है।

भाजपा के सीमित संख्याबल और विपक्ष के बड़े दावों के बीच परिणाम का अध्यक्ष के पक्ष में जाना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। इसे भाजपा की रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। फिर भी यह स्पष्ट करने के लिए कि निर्णायक भूमिका किसकी रही और परिणाम किन परिस्थितियों में आया, संबंधित नेताओं के बयान और आधिकारिक मतदान रिकॉर्ड जरूरी हैं।

कांग्रेस में भीतरघात की तलाश, समिति गठित

अविश्वास प्रस्ताव विफल होने के बाद कांग्रेस संगठन में गहमागहमी की जानकारी सामने आई है। पार्टी के भीतर इस बात की पड़ताल किए जाने की चर्चा है कि समर्थन को लेकर किए गए दावे परिणाम में क्यों नहीं बदल पाए।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कथित भीतरघात करने वालों की पहचान के लिए समिति गठित की गई है। इस कदम को पार्टी के भीतर जवाबदेही तय करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। समिति की जांच में यह स्पष्ट हो सकेगा कि समर्थन के आकलन में कहां चूक हुई और क्या संगठनात्मक स्तर पर कोई गंभीर कमी रही।

जिला प्रभारी सोहनलाल बाल्मीकि ने प्रदेश अध्यक्ष को लिखा पत्र

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस जिला प्रभारी सोहनलाल बाल्मीकि द्वारा प्रभारी पद की जिम्मेदारी से मुक्त करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। यदि पत्र में यही अनुरोध दर्ज है, तो इसे अविश्वास प्रस्ताव की विफलता के बाद कांग्रेस संगठन में पैदा हुए असंतोष के महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा सकता है।

यह घटनाक्रम पार्टी के लिए केवल एक राजनीतिक हार का विषय नहीं रह गया है, बल्कि संगठनात्मक समन्वय, नेतृत्व की जवाबदेही और सदस्यों के समर्थन के आकलन पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

अब न्यायालय की अगली सुनवाई और जांच के निष्कर्ष पर निगाहें

मालती डहेरिया की कुर्सी बचने, हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और कांग्रेस संगठन में कथित भीतरघात की जांच—इन तीनों घटनाक्रमों ने सिवनी जिला पंचायत के राजनीतिक विवाद को नया मोड़ दे दिया है।

हाईकोर्ट का आदेश अंतरिम है और इसे अविश्वास प्रस्ताव की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। वहीं कांग्रेस की जांच समिति के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही कथित भीतरघात के आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।

दैनिक यशोन्नति का राजनीतिक विश्लेषण: सिवनी जिला पंचायत का यह प्रकरण केवल अविश्वास प्रस्ताव के गिरने तक सीमित नहीं है।

न्यायालय के आदेश और मतदान के समय का घटनाक्रम, विपक्ष के समर्थन संबंधी दावों का विफल होना और कांग्रेस संगठन में शुरू हुई कथित भीतरघात की पड़ताल इसे जिले की राजनीति का महत्वपूर्ण घटनाक्रम बनाते हैं।

अब सबकी निगाहें न्यायालय की अगली सुनवाई, आधिकारिक मतदान रिकॉर्ड और कांग्रेस की जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं।

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