शिक्षक दिवस 2025: ग्रामीण शाला से राज्यपाल पुरस्कार तक – शिक्षक राकेश कुमार मालवीय की प्रेरक यात्रा
शिक्षक दिवस विशेष: ग्रामीण शिक्षा में प्रेरक उदाहरण
Chhindwara 05 September 2025
छिंदवाड़ा यशो:- शिक्षक केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि बच्चों में संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों का संचार भी करते हैं। यही भूमिका छिंदवाड़ा जिले के विकासखंड चौरई की शासकीय प्राथमिक शाला कौआखेड़ा में 1998 से कार्यरत शिक्षक राकेश कुमार मालवीय ने बखूबी निभाई। वर्तमान में वे शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चाँद में पदस्थ हैं और अपनी विशिष्ट कार्यशैली से शिक्षा जगत में प्रेरणा बन चुके हैं।
शिक्षा में नवाचार और समाजिक सहभागिता
श्री मालवीय ने अपनी सेवा की शुरुआत से ही विद्यालय को समाज के सहयोग से आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
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बच्चों को खेल-खेल में सिखाने की विधि और गीतों के माध्यम से कठिन अवधारणाओं को सरल बनाना उनकी पहचान रही।
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उन्होंने बाउंड्रीवाल, फर्नीचर, कंप्यूटर, शौचालय, मां सरस्वती की प्रतिमा, कला मंच और मध्यान्ह भोजन हेतु बर्तनों की व्यवस्था ग्रामीण सहभागिता से कराई।
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इन प्रयासों से विद्यालय को राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल से “सेल्फ ऑपरेट स्कूल” की मान्यता मिली।
संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का संचार
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वर्ष 2007 में छात्रों में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति जगाने के लिए गांधी टोपी पहनने की परंपरा शुरू की।
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स्काउट गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए विद्यालय में भारत स्काउट उद्यान की स्थापना की।
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व्यापक पौधारोपण अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप विद्यालय को प्रदेश का प्रथम आदर्श दल पुरस्कार प्राप्त हुआ।
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उनके प्रयासों से ग्राम में शाला त्यागी और अप्रवेशी छात्रों की संख्या शून्य रही।
राज्यपाल पुरस्कार और वर्तमान कार्य
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शिक्षा क्षेत्र में सतत योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित।
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वर्तमान में जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल के मार्गदर्शन में चाँद के विद्यालय में भी:
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मां सरस्वती की स्थापना
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छात्र ठहराव दर में वृद्धि
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परीक्षा परिणामों में सुधार
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निरंतर जनसहयोग से कार्यरत
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अन्य गतिविधियाँ और नेतृत्व
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स्काउट एंड गाइड जिला संघ में सक्रिय
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जूनियर रेडक्रॉस गतिविधियों में जिम्मेदारी
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जिला प्रशिक्षण आयुक्त स्काउट और जिला संगठक की भूमिका

समर्पण, नवाचार और समाज की भागीदारी
ग्रामीण परिवेश में कार्यरत श्री मालवीय की यात्रा यह प्रमाण है कि समर्पण, नवाचार और समाजिक सहभागिता से शिक्षा को नई दिशा दी जा सकती है।
वे अपनी उपलब्धियों का श्रेय छात्रों, पालकों, गुरुओं, माता-पिता और अधिकारियों को देते हैं और आगे भी छात्रहित में सतत कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
निष्कर्ष
शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं होते। वे समाज के निर्माण, बच्चों में संस्कार और राष्ट्रभक्ति का संचार करते हैं।
राकेश कुमार मालवीय की यह प्रेरक यात्रा शिक्षा जगत के लिए उदाहरण और प्रेरणा है।



