🔴 हमारी शैक्षणिक गुणवत्ता ही हमें श्रेष्ठ बनाती है : अवनीश भटनागर
सिवनी में प्रांतीय प्राचार्य/प्रधानाचार्य बैठक का भव्य शुभारंभ
विद्याभारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवनीश भटनागर रहे मुख्य अतिथि
Seoni December 13, 2025
सिवनी यशो:- सिवनी जिले की अग्रणी शैक्षणिक संस्था सरस्वती शिशु/उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भैरोगंज में विद्याभारती महाकौशल प्रांत की योजनानुसार आयोजित दो दिवसीय प्रांतीय प्राचार्य/प्रधानाचार्य बैठक का गुरुवार को भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन अवसर पर विद्याभारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवनीश जी भटनागर ने दीप प्रज्ज्वलन एवं पूजा-अर्चन कर बैठक का विधिवत आरंभ किया।
इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
“विद्यालय की पहचान भवन या संसाधनों से नहीं, बल्कि उसकी शैक्षणिक गुणवत्ता से होती है। हमारी गुणवत्ता ही हमें श्रेष्ठ बनाती है और समाज में स्वीकार्य बनाती है।”

गरिमामय मंच, शिक्षा के दिग्गज रहे उपस्थित
उद्घाटन सत्र में विद्याभारती महाकौशल प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री अमित दवे, प्रादेशिक सचिव सुधीर अग्रवाल, प्रांत प्रमुख शिवानंद सिन्हा एवं विवेकानंद बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक साहू मंचासीन रहे।
अतिथियों का स्वागत विद्याभारती जिला सिवनी के जिला सचिव विनीत अग्रवाल, समिति उपाध्यक्ष नूपेश ठाकुर तथा विद्यालय परिवार की ओर से प्राचार्य ओमप्रकाश यादव ने किया।

“चुनौतियाँ हर विद्यालय में हैं, समाधान गुणवत्ता में छिपा है”
मुख्य अतिथि अवनीश भटनागर ने बैठक के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचार्य/प्रधानाचार्य को इस बैठक को औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि आत्ममंथन और नवाचार के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
उन्होंने कहा—
“आज बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो रहे हैं, लेकिन जिन विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता श्रेष्ठ है, वहां छात्र संख्या कभी कम नहीं होती।”
उन्होंने सिवनी के सरस्वती शिशु मंदिर का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां 1800 से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन स्वयं इसकी गुणवत्ता का प्रमाण है।
प्रहलाद प्रसंग से दिया प्रेरक संदेश
अपने उद्बोधन को और प्रभावी बनाते हुए श्री भटनागर ने हिरण्यकश्यप-प्रहलाद प्रसंग का उल्लेख किया और कहा कि—
हर चुनौती के भीतर समाधान छिपा होता है।
आज हमारे सामने इतनी बड़ी चुनौतियाँ भी नहीं हैं, जितनी कभी असंभव मानी जाती थीं। यदि हम चिंतन और प्रयास करें, तो समाधान निश्चित है।

हिंदी माध्यम भी बन सकता है उत्कृष्टता का केंद्र
उन्होंने दिल्ली के सरदार पटेल हिंदी माध्यम विद्यालय का उदाहरण देते हुए बताया कि-
वहां आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के बच्चे भी पढ़ते हैं। यह प्रमाण है कि भाषा नहीं, गुणवत्ता महत्वपूर्ण है।
इसी तरह मुंबई के एक कॉलेज का उल्लेख करते हुए कहा कि –
मान्यता से अधिक शिक्षा की उपयोगिता और गुणवत्ता मायने रखती है।
विद्यालय की आत्मा है नवाचार
श्री भटनागर ने कहा कि—
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विद्यालय की समय-सारिणी
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संसाधनों का उपयोग
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पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर का अधिकतम प्रयोग
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विद्यार्थियों की रुचि आधारित शिक्षण
ये सभी प्राचार्य/प्रधानाचार्य की नेतृत्व क्षमता का परिचायक हैं।
नवाचार ही शैक्षणिक उन्नयन की कुंजी है।
अभिभावक सबसे बड़े प्रचारक
उन्होंने स्पष्ट किया कि—
संतुष्ट अभिभावक विद्यालय के सबसे प्रभावी ब्रांड एंबेसडर होते हैं।
अभिभावकों को विद्यालय के कार्यक्रमों, राष्ट्रीय पर्वों और शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
पूर्व छात्र परिषद को बताया शक्ति-स्तंभ
उद्घाटन सत्र के पश्चात श्री भटनागर ने विद्यालय के पूर्व छात्रों से संवाद किया।
उन्होंने कहा कि-
आज शिशु मंदिर के पूर्व छात्र 90 से अधिक देशों में कार्यरत हैं और यही आत्मीयता पूर्व छात्र परिषद की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने पूर्व छात्रों से ऑनलाइन पंजीकरण का आह्वान किया और बताया कि –
अब तक 10 लाख से अधिक पूर्व छात्र पंजीकृत हो चुके हैं।
पंचपदीय शिक्षण पद्धति पर विशेष सत्र
प्रथम दिवस के तृतीय चरण में श्री भटनागर ने पंचपदीय शिक्षण पद्धति पर अत्यंत रोचक शैली में व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा—
“अध्यापक पढ़ाता नहीं, सीखने का वातावरण बनाता है।”
उन्होंने जिज्ञासा,
मन-बुद्धि-चित्त-अहंकार की भूमिका समझाते हुए बताया कि-
सीखना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है,
और जिज्ञासा जितनी अधिक होगी,
सीखने की गति उतनी तेज होगी।
14 दिसंबर को होगा समापन
यह प्रांतीय बैठक 14 दिसंबर 2025, शनिवार को सायं 6 बजे सम्पन्न होगी।
उल्लेखनीय है कि इस बैठक में महाकौशल प्रांत के 24 जिलों से लगभग 150 प्राचार्य/प्रधानाचार्य सहभागिता कर रहे हैं।



