जाँच पर सवाल – वन विकास निगम पर ‘मामले को रफा-दफा’ करने का आरोप
विहिप–बजरंग दल का आरोप: “मंदिर में तोड़फोड़ और पुजारी को अभिरक्षा में लिया गया”
बेहरई हनुमान मंदिर विवाद: तीन अधिकारियों पर निलंबन की अनुशंसा, तीन कर्मचारी हटाए गए, 16 पर एफआईआर
सिवनी यशो :- बरघाट क्षेत्र के बेहरई वन डिपो के पास स्थित लगभग 50 वर्ष पुराने हनुमान मंदिर में 14 नवंबर को हुई कार्रवाई ने सिवनी जिले में गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है।
वन विभाग, वन विकास निगम, पुलिस और हिंदू संगठनों के आरोप–प्रत्यारोप के बीच घटनाक्रम लगातार बदल रहा है।
पहले दिन बड़ी कार्रवाई—परंतु अब जाँच धीमी?
सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक कार्रवाई में—
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3 अधिकारियों पर निलंबन की अनुशंसा,
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3 कर्मचारियों को हटाया गया,
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16 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई।
इसके बाद आरोप लगाया जा रहा है कि वन विकास निगम जाँच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रहा है।
पुलिस ने भी शुरुआती दो गिरफ्तारियों के बाद कोई बड़ी प्रगति नहीं दिखाई है।
विहिप–बजरंग दल के आरोप: मंदिर में तोड़फोड़, सामग्री जप्त, पुजारी हिरासत में
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए ज्ञापन में दावा किया गया कि—
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मंदिर परिसर का टीन शेड,
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घंटा, दान पेटी, पूजा सामग्री,
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सोलर पैनल, कलश
जबरन तोड़े व हटाए गए तथा कुछ सामग्री जप्त की गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि—
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स्थल पर मौजूद पुजारी को अभिरक्षा में लिया गया,
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कार्रवाई बिना राजस्व और पुलिस विभाग को सूचित किए की गई,
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टीम द्वारा “गाली-गलौज” की गई।
संगठन ने मांग की है कि—
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संबंधित सभी कर्मचारियों–अधिकारियों पर मामला दर्ज कर गिरफ्तारी हो,
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मंदिर को पूर्व स्थिति में पुनर्स्थापित किया जाए,
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अन्यथा हिंदू समाज आंदोलन करेगा।
शिकायत में शामिल नाम (विहिप के ज्ञापन के अनुसार)
एसडीओ अनिल क्षत्रिय, रेंजर दिनेश झारिया, रवि गेडाम, पिचले, शैलेन्द्र परते, डिप्टी रेंजर मसराम, नाकेदार मानेश्वर, भारती मेहम, बरकडे चौकीदार जानकी विसेन, वहीद खान, गोविंद सोलंकी, राजेंद्र चौहान, शिवप्रसाद विसेन, हसीब खान और जावेद खान।
वन विकास निगम की प्रशासनिक कार्रवाई
बरघाट परियोजना मंडल द्वारा जबलपुर स्थित क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक को भेजे गए पत्र में कहा गया कि—
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उपसंभागीय प्रबंधक अनिल कुमार क्षत्रिय,
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परियोजना क्षेत्रपाल रवि गेडाम,
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परियोजना क्षेत्रपाल दिनेश झारिया
नियम विरुद्ध कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को बिना सूचना दिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।
इसके चलते तीनों पर निलंबन की अनुशंसा की गई है।
साथ ही आदेश क्रमांक 107 (दिनांक 14-11-2025) के अनुसार—
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वाहिद खान,
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असीम खान,
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जावेद खान
को परिक्षेत्र बेहरई से तत्काल प्रभाव से हटाया गया है।
निगम ने कहा कि यह कदम वानिकी कार्यों एवं वन्य जीव सुरक्षा के मद्देनज़र उठाया गया है।
पुलिस की कार्रवाई: 16 पर एफआईआर, जांच अधिकारी नियुक्त
बरघाट पुलिस ने विहिप–बजरंग दल के आवेदन पर एफआईआर दर्ज की है।
जांच अधिकारी को घटनास्थल, वीडियो, जब्ती कार्रवाई और विभागीय आदेशों की कानूनी वैधता की पुष्टि का दायित्व सौंपा गया है।
तीन दस्तावेज़ों से उठे बड़े सवाल
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निगम का पत्र
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विहिप का ज्ञापन
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पुलिस का एफआईआर प्रकरण
तीनों की तुलना से कई गंभीर असंगतियाँ सामने आ रही हैं—
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कार्रवाई का आधिकारिक आदेश कहाँ था?
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क्या विभागीय समन्वय हुआ?
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क्या अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह वैध थी?
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पुजारी को हिरासत में लेने का कानूनी आधार क्या था?
इन सवालों पर प्रशासनिक जांच की संभावना मजबूत हो गई है।
विधायक कमल मर्सकोले की दखल
घटना की जानकारी के बाद बरघाट विधायक कमल मर्सकोले ने चिंता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की।
उनके हस्तक्षेप के बाद—
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3 कर्मचारी हटाए गए,
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3 अधिकारियों के निलंबन की अनुशंसा हुई,
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16 के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कर ली गई।
लेकिन विहिप बजरंग दल का आरोप है कि पहले दिन की कार्रवाई के बाद मामला ठंडा कर दिया गया।
वन विकास निगम का पक्ष
डेविड चनाप, संभागीय प्रबंधक वन विकास निगम ने कहा—
“मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि इस क्षेत्र का प्रभार अब मेरे पास नहीं है, इसे हरीश बघेल जी को सौंप दिया गया है।”
मामला अभी भी गर्म-अगले दिनों में बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनने की संभावना
मामला अब—
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प्रशासनिक विभाग
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वन विभाग
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वन विकास निगम
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पुलिस विभाग
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और हिंदू संगठनों
सबके लिए गंभीर जांच और कार्यवाही का विषय बन चुका है।
संभावना है कि आने वाले दिनों में यह प्रकरण सिवनी जिले की प्रशासनिक घटनाओं में से एक बना रहेगा





