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मध्यप्रदेशमंडला

सुशासन, संवेदना और महिला सशक्तिकरण : मध्यप्रदेश में ‘मोहन मॉडल’ का सजीव अनुभव

सेवा और संकल्प के दो वर्ष

सेवा और संकल्प के दो वर्ष
श्रीमती संपतिया उइके
मंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मध्यप्रदेश

श्रीमती संपतिया उइके
मंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मध्यप्रदेश

जब आज से दो वर्ष पूर्व डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी, तभी यह आभास होने लगा था कि उनका नेतृत्व केवल प्रशासनिक स्थिरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह शासन को एक नैतिक, सामाजिक और मानवीय दिशा देने का प्रयास करेगा। सत्ता की बागडोर संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर यह स्पष्ट संकेत मिलने लगे थे कि वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विश्वासपात्र मुख्यमंत्रियों की सूची में शीघ्र ही अपना विशिष्ट स्थान सुनिश्चित करेंगे। इसका कारण केवल राजनीतिक सामंजस्य नहीं, बल्कि नीति, नीयत और क्रियान्वयन का संतुलन था।

मैं स्वयं एक साधारण श्रमिक पृष्ठभूमि से आती हूँ। जीवन में संघर्ष, अभाव और श्रम का अनुभव मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा रहा है।

ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मुझे मंत्रीमंडल का हिस्सा बनाना केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था,

बल्कि यह उस समावेशी सोच का प्रमाण था, जिसमें पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता और कार्यक्षमता को महत्व दिया जाता है।

मंत्रीमंडल में उन्होंने सभी साथियों के साथ समभाव और समानता का व्यवहार रखा और व्यवहार में उस लोककथन को चरितार्थ किया—

“मुखिया मुख सो चाहिए, खान-पान सब एक।”

यह केवल कहावत नहीं, बल्कि उनके शासन का स्वभाव बन चुका है।

“सबके भैया” के रूप में मुख्यमंत्री की पहचान

आज डॉ. मोहन यादव की पहचान केवल एक मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि “सबके भैया” के रूप में बन चुकी है।

मेरे मंडला जिले में आयोजित एक सामूहिक कार्यक्रम के दौरान मैंने सहज भाव से कहा था—
“हमारे भैया आज सब बहनों के भाई बन गए हैं।”

आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो गर्व होता है कि वह नारा प्रदेश की लाखों बहनों की भावना बन गया।

यह पहचान किसी प्रचार अभियान से नहीं, बल्कि उनके व्यवहार, संवाद और संवेदना से निर्मित हुई है।

महिला सशक्तिकरण : नीति नहीं, नैतिक प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यकाल के आरंभ में ही स्पष्ट कर दिया था कि-

महिला सशक्तिकरण उनकी सरकार के लिए केवल एक योजनागत प्राथमिकता नहीं,

बल्कि नैतिक प्रतिबद्धता है।

इसी सोच के साथ पूर्ववर्ती योजनाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यापक स्वरूप दिया गया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में कई नई योजनाओं की शुरुआत की गई, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

लाड़ली बहना योजना : विश्वास का सेतु

लाड़ली बहना योजना आज मध्यप्रदेश सरकार की पहचान बन चुकी है।

लगभग 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500 रुपये का नियमित अंतरण केवल आर्थिक सहायता नहीं,

बल्कि सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास का सेतु है।

इस राशि को चरणबद्ध रूप से 3000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा यह दर्शाती है कि –

सरकार इस योजना को दीर्घकालिक सामाजिक निवेश के रूप में देख रही है।

डिजिटल लेन-देन से महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और वित्तीय निर्णयों में उनकी भूमिका इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

योजना की 31वीं किश्त जारी करते हुए मुख्यमंत्री का यह कथन—

“बहनों का आशीर्वाद हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

उनके नेतृत्व की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

आत्मनिर्भर महिला, समृद्ध मध्यप्रदेश

महिला सशक्तिकरण को केवल सहायता तक सीमित न रखते हुए सरकार ने महिलाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाया है—

  • लखपति दीदी योजना – स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के लिए वार्षिक एक लाख रुपये आय का लक्ष्य

  • मुख्यमंत्री उद्यम शक्ति योजना – कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा

  • प्रदेश में 47% स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित

  • रेडीमेड गारमेंट उद्योग में महिलाओं को ₹5000 प्रोत्साहन

  • “एक बगिया माँ के नाम” योजना के अंतर्गत फलदार पौधरोपण

ये सभी पहल सरकार की सोच को स्पष्ट करती हैं कि महिलाएँ केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक भागीदार हैं।

सुरक्षा, सम्मान और अवसर

महिलाओं के लिए अवसरों के विस्तार हेतु—

  • सरकारी नौकरियों में आरक्षण 33% से बढ़ाकर 35%

  • संपत्ति पंजीयन शुल्क में 1% की छूट

  • कामकाजी महिलाओं के लिए ‘सखी निवास’ सुविधा

ये निर्णय महिला हितों के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाते हैं।

कथनी और करनी का सामंजस्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अपने पुत्र का विवाह सार्वजनिक सामूहिक विवाह समारोह में संपन्न कराना आज के समय में एक अनुकरणीय उदाहरण है।

यह कदम उन परिवारों के लिए आशा का संदेश है जो सीमित संसाधनों में जीवन यापन करते हैं।

यह उदाहरण सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है।

निष्कर्ष

पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने महिला सशक्तिकरण, सुशासन और संवेदना की दिशा में एक नई पहचान बनाई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहते हैं कि उन्हें प्रशंसा नहीं,

केवल बहनों का आशीर्वाद चाहिए—

और यही आशीर्वाद उन्हें निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करने की प्रेरणा देता है।

एक मंत्री, एक महिला और एक जनप्रतिनिधि के रूप में मुझे गर्व है कि मैं इस परिवर्तनकारी यात्रा की सहभागी हूँ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आज समावेशी विकास का सशक्त मॉडल बनकर उभर रहा है।

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