संदीपनी स्कूल विवाद: शिक्षक की अभद्रता और धमकी से छात्र ने की जान देने की कोशिश
लैब असिस्टेंट को वाइस-प्रिंसिपल बनाकर दिया गया असीमित अधिकार, अपमानजनक शब्दों और मानसिक प्रताड़ना से टूटा छात्र, पिता ने समय रहते बचाई जान, नहीं तो होती एक और त्रास
Chhindwara 18 November 2025
सिवनी यशो : – हर्रई के प्रतिष्ठित माने जाने वाले संदीपनी विद्यालय में छात्र के साथ मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे शिक्षा विभाग की कार्यशैली और संवेदनहीनता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कक्षा 12 कॉमर्स के छात्र तनिश भारती ने लिखित आवेदन में कहा कि उसे विद्यालय के एक शिक्षक (लैब असिस्टेंट — परंतु वाइस प्रिंसिपल के रूप में कार्यरत) द्वारा अभद्र, अपमानजनक और अर्मायादित शब्दों से बार-बार अपमानित किया गया। मानसिक तनाव इतना बढ़ा कि उसने आत्महत्या का प्रयास तक कर लिया। वह 10 फुट ऊंची दीवार फांदकर घर पहुंचा, जहां उसके पिता ने उसे जिंदगी गंवाने से रोका।
छात्र तनिश भारती का आवेदन — आरोपों के मुख्य बिंदु:
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मानसिक प्रताड़ना और सार्वजनिक रूप से अपमान।
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शिक्षक द्वारा अमर्यादित शब्दों और गाली-गलौज का उपयोग।
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बार-बार डांटने, धमकाने और “करियर बर्बाद कर दूंगा” जैसी धमकियाँ।
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छात्र इतना भयभीत हुआ कि उसने आत्महत्या की योजना बनाई।
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शिक्षक एक लैब असिस्टेंट होते हुए भी वाइस प्रिंसिपल के रूप में निर्णय ले रहा है, जो नियम विरुद्ध है।
सवालों के घेरे में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) — गंभीर लापरवाही के आरोप
निम्न गंभीर मामले सामने आए—
संदीपनी स्कूल, हर्रई:
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शिक्षक द्वारा मानसिक उत्पीड़न
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SMDC बैठक बिना निर्णय
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बिना प्रस्ताव के अयोग्य अतिथियों की भर्ती
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लैब असिस्टेंट को ‘प्रबंधक’ जैसा अधिकार
2️⃣ पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावास, हर्रई:
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एक संवेदनशील मामला — छात्रावास से बच्ची गायब
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गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज
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अधीक्षक और शिक्षा अधिकारी ने एक माह तक विभाग से छिपाए रखा
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कोई खोजबीन नहीं, कोई कार्रवाई नहीं
यह सिर्फ लापरवाही नहीं – शिक्षा तंत्र की सबसे बड़ी असफलता
मूल सवाल:
| क्रमांक | प्रश्न जो प्रशासन को झकझोरने चाहिए |
|---|---|
| एक लैब असिस्टेंट आखिर कैसे वाइस-प्रिंसिपल की भूमिका निभा रहा है? | |
| ऐसे शिक्षक को किसने अधिकार दिए कि वह छात्रों का अपमान करे और करियर से खेले? | |
| BEO और अधीक्षक ने गायब छात्रा केस छुपाकर आखिर क्या बचाया — अपना पद या अपराधियों को? | |
| कब तक शिक्षा विभाग ‘प्रताड़ना’, ‘गुमशुदगी’ और ‘अवैध नियुक्तियों’ पर चुप रहेगा? | |
| क्या हर्रई का शिक्षा तंत्र बच्चों को शिक्षित कर रहा है या मानसिक रूप से तोड़ रहा है? |
बच्चे की माँ की गुहार — “मेरे बेटे को इंसाफ चाहिए, नहीं तो वह बर्बाद हो जाएगा”
तनिश भारती की माँ न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं। उनका कहना है:
“स्कूल ने मेरे बच्चे को नहीं, उसकी आत्मा को चोट पहुँचाई है। अगर समय पर हमने उसे नहीं देखा होता, तो आज वह जिंदा नहीं होता।”
समाज और प्रशासन के लिए सबक:
🗯 शिक्षा सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा देना है
❗ एक बच्चा टूटता है, तो सिर्फ एक जीवन नहीं, एक पूरा परिवार बिखर जाता है
🚨 ऐसे मामलों को दबाना नहीं, तत्काल कार्रवाई और विभागीय जांच शुरू होना चाहिए
हमारी मांगें — जनता और मीडिया के सामने
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आरोपी शिक्षक और जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए
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विभागीय जांच समिति गठित कर 15 दिन में रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
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मानसिक उत्पीड़न के आरोपी शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षण-संवेदनशीलता प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए
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हर्रई के सभी विद्यालयों और छात्रावासों की प्रशासनिक ऑडिट करवाई जाए
“यह मामला सिर्फ एक छात्र तनिश का नहीं, हर उस बच्चे की आवाज़ है, जो चुप रहता है, सहता है — और अंत में टूट जाता है।”
अब सवाल यह है — क्या शिक्षा तंत्र जागेगा, या फिर किसी और तनिश की जिंदगी दांव पर जाएगी?



