मुकेश की 103वीं जन्म जयंती पर सिवनी में गूंजे सदाबहार नगमे
अग्रवाल धर्मशाला में सजी सुरों की महफिल, कलाकारों ने अमर गीतों से बांधा समां
सिवनी में मुकेश की 103वीं जन्म जयंती पर सजी सुरों की महफिल, सदाबहार गीतों ने बांधा समां
Seoni 25 July 2026
सिवनी यशो:- स्वर सम्राट और हिंदी सिनेमा के महान पार्श्व गायक मुकेश चंद्र माथुर की 103वीं जन्म जयंती के अवसर पर शहर के हृदय स्थल दुर्गा चौक स्थित अग्रवाल धर्मशाला में संगीतमय कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। संगीत प्रेमी एवं गायक गोविंद अग्रवाल के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के कलाकारों ने मुकेश के सदाबहार गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुकेश के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि योगेश्वर नाथ माल्या तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता नरेंद्र कौशल ने की। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि मुकेश केवल एक गायक नहीं, बल्कि भारतीय संगीत जगत की अमूल्य धरोहर हैं। उनके गीत आज भी हर पीढ़ी के दिलों में बसे हुए हैं और उनकी सादगी भरी गायकी उन्हें सदैव अमर बनाए रखेगी।
संगीत संध्या की शुरुआत जिले के गायक कलाकारों की प्रस्तुतियों से हुई। हेमकांत गढ़ेवाल ने ‘जाए कहां बताएं दिल’ और ‘मेरी तमन्नाओं की तस्वीर’ प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
नरेंद्र कौशल ने ‘नैना हैं जादू भरे’ और ‘सजन रे झूठ मत बोलो’ गाकर माहौल को संगीतमय बना दिया। वहीं संतोष जलज ने ‘जीना यहां मरना यहां’ तथा ‘डम डम डिगा डिगा’ की प्रस्तुति देकर तालियां बटोरीं। सत्येंद्र अवस्थी ने ‘दुनिया बनाने वाले’ गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में भावनात्मक रंग भर दिया।
कार्यक्रम के आयोजक गोविंद अग्रवाल ने ‘एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल’, ‘ओ महबूबा तेरे दिल के पास’, ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’ और ‘मैं पल दो पल का शायर हूं’ जैसे सदाबहार गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर उपस्थित संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके अलावा राजू सोनी, राजिक खान, राकेश श्रीवास्तव, संजय पंड्या, महेंद्र शर्मा, राजीव सोनी (चौरई), इंद्रेश शर्मा, दशरथ गौर तथा श्रद्धा साहू ने भी मुकेश के लोकप्रिय एकल एवं युगल गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। प्रत्येक प्रस्तुति पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के दौरान गोविंद अग्रवाल ने मुकेश के जीवन, उनके संघर्ष, फिल्मी सफर और उनके कालजयी गीतों से जुड़े कई रोचक प्रसंग साझा किए, जिन्हें श्रोताओं ने बड़े ध्यान और उत्साह के साथ सुना। उन्होंने बताया कि मुकेश की आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में उसी आत्मीयता के साथ जीवित है, जैसी दशकों पहले थी।
संगीत संध्या का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। इनमें विष्णु अग्रवाल, निशा अग्रवाल, गोविंद सोनी, विजय पालीवाल, पुष्प चौरसिया, पापे चौरसिया, इंद्रा अकेने, निधि अग्रवाल, संजय अग्रवाल, शायर आतिश मसूद तथा अनिल ठाकुर विशेष रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी आमंत्रित कलाकारों का पुष्पमालाओं से स्वागत एवं सम्मान किया गया। मंच संचालन गोविंद अग्रवाल ने किया। संगीतमय कार्यक्रम देर तक चलता रहा और मुकेश के अमर गीतों की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे सभागार को सुरमय बना दिया।
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