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जहरीला कफ सिरप कांड: 22 मासूमों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग मौन

एसआईटी ने 9 आरोपी दबोचे, लेकिन अफसरों पर आज तक न जांच समिति, न नोटिस

Chhindwara 29 December 2025
छिंदवाड़ा यशो:- प्रदेश की सबसे भयावह स्वास्थ्य त्रासदी में जहरीले कफ सिरप से 22 मासूम बच्चों की मौत हो गई, लेकिन जहरीला कफ सिरप कांड में इतने बड़े जनसंहार के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने अब तक न तो जांच समिति बनाई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की।
यह घटना अब केवल अपराध नहीं, बल्कि प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही का ज्वलंत उदाहरण बन चुकी है।

मीडिया में खबरें आईं, तब हरकत में आई पुलिस

बच्चों की मौत की खबरें जब अखबारों में प्रकाशित हुईं, तब जाकर पुलिस ने एसआईटी (SIT) का गठन कर जांच शुरू की।
एसआईटी ने अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है।

22 मौतें, फिर भी कोई विभागीय जांच नहीं

जहरीले कफ सिरप कांड से

  • छिंदवाड़ा,

  • पांढुर्ना

  • और बैतूल

जिलों में कुल 22 बच्चों की मौत हो चुकी है।
इसके बावजूद न तो बीएमओ, न जिला स्वास्थ्य अधिकारी, और न ही किसी वरिष्ठ अफसर को नोटिस जारी किया गया।

नागपुर से चेतावनी, फिर भी विभाग सोता रहा

जानकारी सामने आई कि नागपुर के डॉक्टरों ने पहले ही चेताया था कि

इस कफ सिरप के सेवन से बच्चों की किडनी फेल हो रही है।

इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने

  • ❌ दवा की जांच करवाई

  • ❌ सप्लाई रोकी

  • ❌ अस्पतालों को अलर्ट किया

यह सीधी-सीधी लापरवाही नहीं तो क्या है?

डॉ. प्रवीण सोनी छुट्टी पर, अस्पताल बिना डॉक्टर

डॉ. प्रवीण सोनी, जो परासिया अस्पताल में पदस्थ थे,

  • दो माह की छुट्टी लेकर निजी क्लिनिक चला रहे थे,

  • उनके स्थान पर कोई वैकल्पिक डॉक्टर पदस्थ नहीं किया गया।

यह जिम्मेदारी किसकी थी—
👉 बीएमओ की या जिला स्वास्थ्य अधिकारी की?
लेकिन अब तक किसी से जवाब नहीं।

एसआईटी ने जिनको गिरफ्तार किया

एसआईटी द्वारा अब तक जहरीला कफ सिरप कांड में जिन आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है—

  • डॉ. प्रवीण सोनी

  • रंगनाथन (श्रीसन फार्मा मालिक)

  • सौरभ सोनी (अपना मेडिकल)

  • राजेश सोनी (न्यू अपना मेडिकल)

  • एम.आर. सतीश शर्मा

  • महेश्वरी (केमिकल एनालिस्ट)

  • श्रीमती ज्योति सोनी

  • शैलेन्द्र पंड्या (सप्लायर)

  • अनिल मिश्रा

  • अशोक मिश्रा

इसके अतिरिक्त 28 दिसंबर को
➡️ रसेला मेडिकल स्टोर्स, परासिया के संचालक अनिल रसेला को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
यह अब तक की 9वीं गिरफ्तारी है।

जिन मासूमों ने गंवाई जान (नाम नहीं, सच है यह)

  • दिव्यांशु यदुवंशी (6 वर्ष) – 2 सितंबर

  • आतिया खान (7 वर्ष) – 3 सितंबर

  • शिवम राठौर (4 वर्ष) – 4 सितंबर

  • दिव्यांशु उईके (3 वर्ष) – 4 सितंबर

  • विधी डेहरिया (3 वर्ष) – 5 सितंबर

  • सतया पवार (8 वर्ष) – 6 सितंबर

  • अदनान खान (5 वर्ष) – 7 सितंबर

  • उसैद खान (4 वर्ष) – 13 सितंबर

  • ऋषिका पीपरे (5 वर्ष) – 15 सितंबर

  • सेहरिश सय्यद अली (6 माह) – 23 सितंबर

  • चंचलेश (7 वर्ष) – 26 सितंबर

  • विकास यदुवंशी (3 वर्ष) – 26 सितंबर

  • संध्या बोसम (1 वर्ष) – 1 अक्टूबर

  • योगिता ठाकरे (2 वर्ष) – 4 अक्टूबर

  • धानी डेहरिया (1 वर्ष) – 6 अक्टूबर

  • जयुषा यदुवंशी (2 वर्ष) – 7 अक्टूबर

  • वेदांश पवार (2 वर्ष) – 7 अक्टूबर

  • मयंक सूर्यवंशी (3 वर्ष) – 9 अक्टूबर

  • गार्विक पवार (1 वर्ष) – 9 अक्टूबर

  • हितांश सोनी (5 वर्ष) – 19 सितंबर

  • अंबिका विश्वकर्मा (3 वर्ष) – 15 अक्टूबर

👉 ये आंकड़े नहीं, सिस्टम की लापरवाही के शिकार बच्चे हैं।

दो डॉक्टरों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?

पीड़ित परिवारों का आरोप है कि

  • डॉ. अमन सिद्दकी

  • डॉ. अमित ठाकुर

ने भी वही कफ सिरप लिखा था, जिसके सेवन से तीन बच्चों की मौत हुई।
इसके बावजूद इन दोनों पर कोई आपराधिक या विभागीय कार्रवाई नहीं।

https://navbharattimes.indiatimes.com/state/madhya-pradesh/chhindwara/humanity-shamed-again-newborns-body-found-stuck-in-the-toilet-of-parasia-civil-hospital-removed-after-breaking-it/articleshow/125989251.cms

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