कक्का जी सहित पांच पर FIR के बाद भड़का आक्रोश, रात 2 बजे तक थाने में डटे किसान
महिला अधिकारियों पर कथित टिप्पणी, सभा स्थल और रास्ता रोकने को लेकर कार्रवाई; किसान महासंघ का पलटवार, कलेक्टर पर लगाए गंभीर आरोप
कक्का जी सहित 5 पर FIR, रात 2 बजे तक थाने में डटे किसान
Seoni 12 September 2026
सिवनी यशो:- राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ और संयुक्त किसान मोर्चा की आमसभा के बाद किसान आंदोलन को लेकर प्रशासन और किसान संगठन आमने-सामने हैं। मंडला बायपास स्थित आमाझिरिया में 10 सितंबर को हुई सभा के मामले में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ‘कक्का जी’ सहित पांच लोगों के खिलाफ डूंडासिवनी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर के बाद शुक्रवार रात कान्हीवाड़ा क्षेत्र से कुछ लोगों को पुलिस द्वारा उठाए जाने की खबर से किसानों में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में किसान कान्हीवाड़ा थाने पहुंच गए।
हालांकि, शनिवार को डूंडासिवनी पुलिस ने स्पष्ट किया कि तीन व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं और किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
महिला अधिकारियों पर कथित टिप्पणी समेत तीन आरोप
नायब तहसीलदार सिवनी की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 79, 223(ए) और 126(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी के अनुसार महिलाओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी, अनुमति प्राप्त स्थल के बजाय अन्य स्थान पर सभा करने और रास्ता रोकने के आरोपों को लेकर कार्रवाई की गई है।
डूंडासिवनी थाना प्रभारी चैनसिंह उइके के अनुसार कक्का जी के अलावा प्रांत संगठन मंत्री धनसिंह ठाकुर, जिला अध्यक्ष प्रीतम सिंह ठाकुर, शुभम दयाल पटेल और राजेश सोलंकी को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार मामले की विवेचना जारी है और जांच के दौरान आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।
एफआईआर पर किसान महासंघ का पलटवार
पुलिस कार्रवाई के बाद राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शोभाराम भलावी ने प्रशासन पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई करने और अधिकारियों-कर्मचारियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है।
भलावी का कहना है कि कक्का जी ने कलेक्टर के खिलाफ कोई अशोभनीय टिप्पणी नहीं की थी, बल्कि ज्ञापन नहीं लिए जाने की स्थिति में व्यंग्यात्मक टिप्पणी की गई थी। उन्होंने दावा किया कि 9 सितंबर को कक्का जी कलेक्टर से मिलने पहुंचे थे और करीब दो घंटे इंतजार के बाद भी मुलाकात नहीं हो सकी।
अनुमति को लेकर भी संगठन ने उठाए सवाल
किसान महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि रैली और सभा की अनुमति के लिए संगठन के पदाधिकारियों को कई दिनों तक परेशान होना पड़ा। उनके अनुसार 9 सितंबर की रात वाट्सऐप के माध्यम से मिशन स्कूल में सभा की अनुमति दी गई थी।
भलावी के मुताबिक 10 सितंबर को रैली के दौरान मंडला बायपास पर पुलिस-प्रशासन ने किसानों को रोक दिया और वहीं सभा करने को कहा। सभा समाप्त होने के बाद किसानों को शहर की ओर जाने की अनुमति नहीं दी गई। संगठन का दावा है कि किसानों ने जानबूझकर रास्ता नहीं रोका था।
गांव-गांव कलेक्टर के पुतले जलाने की चेतावनी
शोभाराम भलावी ने कहा कि सिवनी में किसानों और आदिवासियों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कार्रवाई के विरोध में गांव-गांव कलेक्टर के पुतले जलाकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
रात दो बजे तक थाने में डटे रहे किसान
इधर, कान्हीवाड़ा क्षेत्र से कुछ लोगों को पुलिस द्वारा उठाए जाने की जानकारी मिलने के बाद किसान थाने पहुंच गए। किसानों ने आंदोलन से जुड़े लोगों पर दर्ज मामले वापस लेने और कथित रूप से हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने की मांग की।
जानकारी के अनुसार किसान देर रात तक थाने में मौजूद रहे और करीब रात दो बजे तक कान्हीवाड़ा क्षेत्र में किसानों की मौजूदगी बनी रही। इससे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति के बीच पुलिस को भी सतर्क रहना पड़ा।
बाद में पुलिस की ओर से स्पष्ट किया गया कि तीन व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं और किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है।
अधिकारी-कर्मचारियों ने भी खोला मोर्चा
दूसरी ओर महिला अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कथित अमर्यादित टिप्पणी के विरोध में शुक्रवार को अधिकारी-कर्मचारी एकत्र हुए और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई, सार्वजनिक रूप से माफी और भविष्य के धरना-प्रदर्शनों में शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों की गरिमा एवं मर्यादा का ध्यान रखने की मांग की।
अजाक्स संघ ने भी पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर कक्का जी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस दौरान जिला अध्यक्ष चित्तौड़ सिंह कुशराम, पूर्व विधायक अर्जुन सिंह काकोडिया, संतकुमार मर्सकोले और सुरेंद्र बारमाटे सहित अन्य मौजूद रहे।
एफआईआर के बाद बढ़ी सियासी और प्रशासनिक सरगर्मी
एफआईआर के बाद किसान संगठन ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है, वहीं अधिकारी-कर्मचारी कथित टिप्पणी को लेकर कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। एक ओर पुलिस मामले की जांच कर रही है, तो दूसरी ओर किसान संगठन प्रशासन की कार्रवाई को लेकर विरोध का ऐलान कर रहा है।
फिलहाल विवाद के दोनों पक्षों के आरोप और दावे सामने आ चुके हैं। मामले की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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