सिवनी, 23 अगस्त 2025
सिवनी यशो:- श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, सिवनी (मध्यप्रदेश) में 21 अगस्त को प्रातःकालीन बेला में मंगलाचरण एवं धार्मिक क्रियाओं का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर महासमाधिधारक परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य, परम पूज्य मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज तथा मुनि श्री भावसागर जी महाराज का सान्निध्य प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम के अंतर्गत आचार्य श्री की पूजन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन और शास्त्र अर्पण किए गए।
मुनि श्री भावसागर जी का प्रवचन
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा—
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धर्म को सुरक्षित रखने के लिए एक संतान समर्पित करनी चाहिए, जो धर्म की रक्षा कर सके।
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अच्छे कार्यों में सदैव विघ्न आते हैं।
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बच्चों को ऐसे संस्कार देना आवश्यक है जिससे वे धार्मिक क्रियाएं श्रेष्ठ ढंग से कर सकें।
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बच्चों को अर्निंग, लर्निंग और रिटर्निंग की शिक्षा देना चाहिए।
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यदि श्रावण में श्रवण न खुले और भाद्रपद में अभद्र बने रहें, तो कुंवार में कोरे ही रह जाएंगे।
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दशलक्षण पर्व का महत्व
मुनि श्री ने कहा कि दशलक्षण पर्व एक विलक्षण महापर्व है, जो जीवन के आंगन को भर देता है।
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यह पर्व मनुष्यता का महोत्सव है जिसकी शक्ति अनंत होती है।
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इसे पवित्रताओं और निर्मलताओं की आहुति का पर्व कहा गया है।
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यह सार्वभौमिक पर्व है जिसमें जीवन जीने की कला सिखाई जाती है।
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जो व्यक्ति इन दस धर्मों को अपनाता है उसका कल्याण निश्चित होता है।
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यह पर्व अनादि और शाश्वत है।



