सरपंच संघ आक्रोशित; कलेक्टर से कार्रवाई की मांग, सरपंच से कथित अभद्रता पर बरघाट में बवाल
घायल पत्नी के इलाज को लेकर शुरू हुआ विवाद, सरपंच का आरोप—एक घंटे इंतजार के बाद की अभद्रता; डॉक्टर बोलीं—“मुझे कुछ नहीं कहना, जिसे शिकायत करना है करे”
बरघाट यशो :- घायल पत्नी को उपचार के लिए लेकर पहुंचे जेवनारा ग्राम पंचायत के सरपंच नंदकिशोर कटरे के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला अब बरघाट में तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। पिछले दो-तीन दिनों से घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चा है और अब सरपंच संघ खुलकर सामने आ गया है। संघ ने कलेक्टर सिवनी को शिकायत सौंपकर मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि सरपंच का आरोप है कि उपचार के लिए पत्नी को लेकर पहुंचने के बाद उन्हें करीब एक घंटे तक इंतजार कराया गया और इसके बाद उनके साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। वहीं मामले में डॉक्टर का पक्ष भी सामने आया है, जिन्होंने आरोपों पर विस्तार से प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा है कि “मुझे इस विषय में कुछ नहीं कहना है। मैं अस्पताल में हूं, जिसे जो शिकायत करना है, करे।”
पत्नी घायल थीं, इलाज के लिए पहुंचे थे सरपंच
सरपंच नंदकिशोर कटरे के अनुसार उनकी पत्नी घर पर गिरने के कारण घायल हो गई थीं और उन्हें अंदरूनी चोट की आशंका थी। वे तत्काल उपचार के लिए उन्हें लेकर बरघाट पहुंचे।
सरपंच का कहना है कि डॉ. उषा पांडे अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं, जिसके बाद वे उनके निवास स्थान पर पहुंचे, जहां निजी तौर पर उपचार किए जाने की बात सामने आई। वहां मौजूद डॉक्टर के पति ने कथित तौर पर उन्हें बताया कि मैडम करीब आधे घंटे में आ जाएंगी और इंतजार करने को कहा।
सरपंच के मुताबिक वे करीब 11:30 बजे से 12:30 बजे तक इंतजार करते रहे। जब उन्होंने मरीज की तकलीफ अधिक होने की बात कहते हुए पूछा कि उपचार कब होगा, तो कथित तौर पर उन्हें जवाब मिला—“जहां लगे वहां इलाज करा लो, कोई दिक्कत नहीं।”
“पहले बता देते तो एक घंटा क्यों खराब करता”—सरपंच
सरपंच के अनुसार उन्होंने केवल इतना कहा कि यदि पहले बता दिया जाता तो वे एक घंटे तक इंतजार नहीं करते और मरीज को भी परेशान नहीं होना पड़ता।
इसी दौरान उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा कि वे ग्राम पंचायत जेवनारा के सरपंच हैं। सरपंच का आरोप है कि इसके बाद उन्हें कथित तौर पर यह जवाब दिया गया कि “ऐसे कई सरपंच देखे हैं और कई भाजपा-कांग्रेस के नेता देखे हैं।”
सरपंच का आरोप है कि इसके बाद मामला और बिगड़ गया तथा उनके साथ कथित रूप से भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टर के आने के बाद भी उनके पति द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग जारी रहा।
सरपंच संघ क्यों हुआ आक्रोशित?
घटना की जानकारी सामने आने के बाद सरपंच संघ बरघाट ने मामले को गंभीरता से लिया। संघ का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि के साथ अभद्र व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। संघ ने कलेक्टर को दिए आवेदन में डॉ. उषा श्री पांडे एवं उनके पति रूपेन्द्र पांडे पर कथित अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज के आरोप लगाए हैं।
संघ ने घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। संघ की ओर से घटना का वीडियो उपलब्ध होने का भी दावा किया गया है।
डॉक्टर का दो टूक जवाब—“जिसे शिकायत करना है, करे”
इस पूरे विवाद में डॉक्टर का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया गया। डॉ. उषा श्री पांडे से जब घटना और लगाए गए आरोपों के संबंध में प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा—
“मुझे इस विषय में कुछ नहीं कहना है। मैं अस्पताल में हूं, जिसे जो शिकायत करना है, करे।”
डॉक्टर की ओर से आरोपों का कोई विस्तृत खंडन या घटनाक्रम का अलग पक्ष सामने नहीं रखा गया है। ऐसे में अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
सवाल सिर्फ सरपंच का नहीं, आम मरीज का भी
मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—यदि किसी मरीज को उपचार के लिए लेकर आने वाले व्यक्ति और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े परिसर में इस तरह का विवाद होता है, तो आम मरीज और उसके परिजनों के साथ व्यवहार की निगरानी किस स्तर पर होती है?
स्थानीय स्तर पर यह मांग भी उठ रही है कि यदि संबंधित व्यक्ति के व्यवहार को लेकर पूर्व में कोई लिखित शिकायत हुई है तो उसकी भी जांच की जाए। हालांकि, पूर्व शिकायतों अथवा ऐसे मामलों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बरघाट से जिला मुख्यालय तक पहुंचा मामला
अब यह मामला केवल सरपंच और डॉक्टर पक्ष के बीच कथित विवाद तक सीमित नहीं रहा है। सरपंच संघ द्वारा कलेक्टर को शिकायत दिए जाने के बाद प्रशासन के सामने निष्पक्ष जांच की चुनौती है।
जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरपंच की पत्नी के उपचार को लेकर वास्तविक घटनाक्रम क्या था, कितनी देर तक इंतजार कराया गया, बातचीत किस बिंदु पर विवाद में बदली और कथित अभद्र भाषा का इस्तेमाल किसने किया।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो जांच के निष्कर्ष भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या बरघाट में चर्चा का विषय बने इस मामले की जांच स्थानीय स्तर पर होगी या जिला स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करेंगे?



