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कानून की धारा टूटी, भरोसा भी टूटा: सिवनी में हवाला राशि की लूट का शक पुलिस पर!

BNNS 2023 की धारा 105 की खुली अनदेखी, अब तक विभागीय कार्रवाई में नौ पुलिसकर्मी निलंबित

 Seoni October 13, 2025
सिवनी यशो:- सिवनी जिले का बहुचर्चित हवाला प्रकरण अब पुलिस विभाग के गले की फांस बनता जा रहा है। थाना लखनवाड़ा क्षेत्र में 8 एवं 9 अक्टूबर 2025 की दरम्यानी रात को घटी घटना में पुलिस की भूमिका डकैती जैसे कृत्य की तरह सामने आ रही है। इस मामले में जब्त की गई राशि का आधिकारिक उल्लेख ₹1,45,000 किया गया है, जबकि मीडिया और सोशल मीडिया में यह राशि ₹2 करोड़ 96 लाख 50 हजार बताई जा रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

सूत्रों के अनुसार यह पूरी राशि एक ज्वेलर्स की हवाला रकम थी, जिसे इरफान पठान और शेख मुश्ताक नामक व्यक्तियों द्वारा ले जाया जा रहा था।
यही वह राशि थी जिसे पुलिस ने रास्ते में रोककर जप्त कर लिया। प्रारंभिक सूचना में कहीं भी मादक पदार्थ का उल्लेख नहीं था, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से एफआईआर में मादक पदार्थ मिलने का जिक्र जोड़ा गया, जिसकी प्रकृति और कीमत का विवरण अब तक नहीं दिया गया है।

2.96 करोड़ से 1.45 लाख तक कैसे पहुँची राशि?

जानकारी के अनुसार, सोहन परमार, जो उक्त राशि का वास्तविक धारक बताया जा रहा है, वह 9 अक्टूबर की सुबह सिवनी पहुँचा और कोतवाली सिवनी में हवाला राशि लूटे जाने की शिकायत दर्ज कराई।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सोहन परमार ने पुलिस के सामने यह कहा कि उसके कर्मचारियों से मारपीट कर पूरी राशि छीन ली गई और उन्हें धमकाकर भगा दिया गया।

सूत्र बताते हैं कि शिकायत के बाद सीएसपी पूजा पांडे ने सोहन परमार को एसडीओपी कार्यालय बुलाकर ₹1 करोड़ 30 लाख रुपये लौटाए,
परंतु शेष राशि लौटाने से इनकार कर दिया गया।
जब सोहन परमार ने इस पूरे प्रकरण की जानकारी उच्चाधिकारियों और मीडिया संस्थानों को दी, तो आईजी जबलपुर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बंडोल थाना प्रभारी सहित नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।
अगले ही दिन सीएसपी पूजा पांडे को भी निलंबित कर दिया गया।

एफआईआर में गंभीर विसंगतियाँ

11 अक्टूबर को थाना लखनवाड़ा में एफआईआर क्रमांक 0449/25 दर्ज की गई।
शिकायतकर्ता आर. कृष्णकुमार भालेरकर ने सोहन परमार, इरफान पठान और शेख मुश्ताक के विरुद्ध शिकायत दी थी।
लेकिन एफआईआर में केवल ₹1,45,000 की जप्ती का उल्लेख है —
जबकि जप्त वाहन, नोटों की गड्डियों या मादक पदार्थ की कोई वीडियोग्राफी नहीं की गई, 

राशि की जप्त बताई गई, मादक पदार्थ नहीं मिला, वाहन जप्त नहीं किया गया।

जप्त राशि की वीडियो ग्राफी होना चाहिए थी।‌ नही हुई 

जो कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 105 के आज्ञापक प्रावधान का खुला उल्लंघन है।

यह धारा स्पष्ट रूप से कहती है कि —

“किसी भी संपत्ति, वाहन, मुद्रा या मादक पदार्थ की जब्ती के समय उसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी।”

विवेचना में लापरवाही, थाना प्रभारी भी निलंबित

सूत्रों के अनुसार, इस मामले की विवेचना स्वयं थाना प्रभारी लखनवाड़ा द्वारा की जा रही थी।
लेकिन 12 अक्टूबर को उन्हें भी निलंबित कर दिया गया,
क्योंकि उनकी जांच में लापरवाही और आचरण संदिग्ध पाया गया।

वाहन और जप्त सामग्री का रहस्य

मामले से जुड़े वाहन की जब्ती की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
एफआईआर में मादक पदार्थ मिलने का उल्लेख तो है,

लेकिन यह नहीं बताया गया कि मादक पदार्थ क्या था, कितना था और उसकी कीमत कितनी थी।

यही नहीं, जप्ती की वीडियोग्राफी या दस्तावेजी साक्ष्य तक दर्ज नहीं किए गए,

जो पूरे प्रकरण को और भी संदेहास्पद बनाता है।

अब जांच जबलपुर क्राइम ब्रांच के पास

अनौपचारिक सूत्रों का कहना है कि पूरा मामला जबलपुर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है,

हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।

बताया जा रहा है कि जिन तीन आरोपियों के नाम एफआईआर में हैं,

उन्हें जालना (महाराष्ट्र) से उठाकर पूछताछ के लिए जबलपुर लाया गया है।

मुख्य तथ्य

  • घटना तिथि: 08-09 अक्टूबर 2025

  • एफआईआर दर्ज: 11 अक्टूबर 2025

  • जप्त राशि (आधिकारिक): ₹1,45,000

  • जप्त राशि (अनौपचारिक स्रोतों के अनुसार): ₹2.96 करोड़

  • आरोपित: सोहन परमार, इरफान पठान, शेख मुश्ताक

  • निलंबित अधिकारी: 9 पुलिसकर्मी, बंडोल थाना प्रभारी, टीआई लखनवाड़ा, सीएसपी पूजा पांडे

  • मुख्य आरोप: हवाला राशि की लूट, जप्ती में अनियमितता, वीडियोग्राफी न होना

  • जांच एजेंसी (सूत्रों के अनुसार): क्राइम ब्रांच जबलपुर

कानूनी विशेषज्ञों की राय

विधि विशेषज्ञों का कहना है कि —

“जप्ती के मामलों में वीडियोग्राफी न होना न्यायिक पारदर्शिता के साथ खिलवाड़ है।
यदि यह साबित होता है कि वास्तविक जब्त राशि और दर्ज राशि में अंतर है,
तो यह मामला डकैती की श्रेणी में आ सकता है।”

बंडोल थाना प्रभारी का कहना है कि उनके पास रिपोर्ट हुई हमें जो रिपोर्ट में बताया गया है वह हमने लिखा है। रिपोर्ट में लिखाया गया है कि मादक पदार्थ की सूचना थी पर वह‌‌ नहीं मिला।

निष्कर्ष

सिवनी का यह हवाला प्रकरण अब पुलिस विभाग की साख और पारदर्शिता दोनों पर गहरे प्रश्न खड़े कर रहा है।

यदि जांच में मीडिया रिपोर्टों के तथ्य पुष्ट हो जाते हैं,
तो यह मामला राज्य की सबसे बड़ी पुलिस-डकैती कांड की शक्ल ले सकता है।

https://hindi.oneindia.com/news/bhopal/hawala-scandal-in-seoni-rs-1-45-crore-embezzled-csp-pooja-pandey-and-10-policemen-suspended-1405977.html

Dainikyashonnati

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